कछुए के 120 किलो मांस के साथ अंतरराज्यीय गिरोह के 6 तस्कर गिरफ्तार, पहली बार पकड़ा ऐसा मामला
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बाराबंकी में पुलिस ने कछुआ तस्करों के अंतरराज्यीय गिरोह के छह सदस्यों को लोनीकटरा क्षेत्र में गिरफ्तार कर लिया। ये हाफ डाला में थर्माकोल के चार डिब्बों में बर्फ के बीच कछुए का मांस रखकर ले जा रहे थे। छिपाने के लिए ऊपर से कुछ मछलियां भर दी थीं। ये तस्कर उत्तराखंड के रास्ते पश्चिम बंगाल व बांग्लादेश तक कछुओं के मांस की सप्लाई करते थे।
एसपी डॉ. अरविंद चतुर्वेदी के मुताबिक गिरफ्तार किए गए तस्करों में उधमसिंहनगर (उत्तराखंड) निवासी रामानंद भगत, रायबरेली का गुड्डू व कमलेश तथा लखनऊ निवासी विशाल, राकेश व सलमान शामिल हैं। इनके पास से कछुए का 120 किलो मांस, एक हाफ डाला, एक बाइक, दो हथौड़ी और अन्य औजार बरामद किए गए हैं।
पुलिस का दावा है कि उत्तर भारत में पहली बार इतनी अधिक मात्रा में कछुए का मांस बरामद करने के साथ अंतरराज्यीय तस्करों को पकड़ा गया है। पुलिस के मुताबिक रामानंद भगत और गुड्डू ने पूछताछ में बताया कि वे कई वर्षों से कछुओं की तस्करी कर रहे हैं। रामानंद भगत मूलत: पश्चिम बंगाल का रहने वाला है।
उसका संपर्क उधमसिंहनगर, पीलीभीत तथा आसपास के जिलों में है, जहां कछुओं के मांस की मांग रहती है। पीलीभीत की प्यूरिया, टांडा, जोशी कॉलोनी, माला नौजरिया, लग्गा-भग्गा, चंदिया हजारा आदि बंगाली बस्तियों में इसकी काफी मांग है। गुड्डू ने बताया कि वह स्थानीय मल्लाहों से कछुए का शिकार कराने के बाद मांस के छोटे-छोटे टुकड़े कर सप्लाई करता है।
जांच के लिए देहरादून भेजा जा रहा है सैंपल
एसपी ने बताया कि टर्टल सर्विलांस अलायंस (टीएसए) के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. शैलेंद्र सिंह, अरुणिमा सिंह और अन्य सदस्यों ने मांस के टुकड़ों और मृत कछुए के पैर से इसकी प्रजाति की पहचान इंडियन सॉफ्ट सेल टर्टल के रूप में की। इसका प्रचलित नाम कटहवा है। यह भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत अधिसूचित है।
इसकी जांच के लिए सैंपल देहरादून भेजा जा रहा है। इस संबंध में केंद्रीय एजेंसियों के दिल्ली मुख्यालय को भी सूचित किया गया है। एसपी ने बताया कि वाइल्डलाइफ क्राइम डिवीजन, इंटरपोल सिंगापुर ऑफिस ने भी ऐसी तस्करी होना पहली बार बताया है।