लखनऊ। देश के बंटवारे के समय पाकिस्तान के सिंध प्रांत से लखनऊ पहुंचे सिंधी परिवारों ने कड़ी मशक्कत के बाद खुद को स्थापित किया। आज राजधानी के व्यवसाय में इस समाज का अहम योगदान है। वर्तमान समय में तकरीबन 50 हजार की सिंधी आबादी के बीच 20 पंचायतें हैं जो समाज के उत्थान के लिए काम कर रही हैं। इस समाज ने न सिर्फ लखनऊ की संस्कृति को आत्मसात किया बल्कि सिंधी भाषा को बचाने की मुहिम भी छेड़ रखी है।
चेट्टी चंद मेला कमेटी के प्रवक्ता और व्यापारी अशोक मोतियानी कहते हैं कि सिंधी समाज प्रगतिशील है, अब हमारा दायरा बढ़ रहा है। हम अपने बच्चों को उस दौर का संघर्ष बताते हैं ताकि उन्हें अहसास हो। उन्हें यह भी बताते हैं कि हमें अपना धर्म, संस्कृति और भाषा को बचाने के भी प्रयास जारी रखने होंगे। मेरा बेटा व्यवसायी है तो बेटी बंगलूरू में इंजीनियर है। सरकारी नौकरियों और योजनाओं के लिए भी समाज के लोगों को जागरूक कर रहे हैं ताकि उन्हें उसका लाभ मिल सके। कुछ दिन पहले शिविर लगवाकर 500 लोगों के आयुष्मान कार्ड बनवाए गए। बोले, राजनीति में हमारी भागीदारी न के बराबर है लेकिन आगे इस क्षेत्र में भी समाज से लोग आगे आएंगे लेकिन राजनीति में आने का हमारा केवल समाजसेवा होगा।