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कटे होंठ वाले बच्चों को सर्जरी के बाद सहानुभूति की जरूरत
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कटे होंठ वाले बच्चों को सर्जरी के बाद सहानुभूति की जरूरत
लखनऊ। कटे होंठ एवं तालू वाले बच्चों को प्लास्टिक सर्जरी के जरिए ठीक किया जा सकता है। सर्जरी के बाद ऐसे बच्चों को सहानुभूति की जरूरत होती है। उन्हें मानसिक रूप से यह विश्वास दिलाना पड़ता है कि अब वे पूरी तरह से ठीक हैं। यह बातें केजीएमयू प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष और स्माइल ट्रेन इंडिया कार्यक्रम के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रोफेसर अरुण कुमार सिंह ने कहीं। वह केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि यह क्लेफ्ट जन्मजात बीमारी है। ऐसे बच्चों को खाने, सांस लेने और बोलने में कठिनाई होती है। लेकिन यह सर्जरी से ठीक हो सकता है। उन्होंने बताया कि स्माइल ट्रेन प्रोग्राम के तहत विभिन्न अस्पतालों को जोड़ा गया है। भारत में हर साल 35000 से अधिक बच्चे क्लेफ्ट के साथ जन्म लेते हैं।
करीब 19 वर्ष में लखनऊ में 18500 से अधिक क्लेफ्ट सर्जरी की गई है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के जरिए जरूरतमंद बच्चों की मुफ्त सर्जरी की जाती है। इस दौरान संस्थान से जुड़ी ममता कैरल ने बताया कि लोगों में जागरूकता लाने के लिए क्लेफ्ट संस्था स्माइल ट्रेन इंडिया की ओर से स्माइल टार्च यात्रा शुरू की गई है। राष्ट्रीय क्लेफ्ट दिवस आठ फरवरी से निकली स्माइल टार्च के लखनऊ पहुंचने पर स्वागत किया गया।
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आज होगा वॉकाथॉन
लखनऊ में स्माइल टॉर्च का स्वागत करने और स्माइल ट्रेन इंडिया और उसके सहयोगी अस्पतालों को समर्थन देने के लिए 14 जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास से क्लेफ्ट वॉकथॉन का आयोजन किया जाएगा। इसमें बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन भी शामिल होंगे।
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लखनऊ। कटे होंठ एवं तालू वाले बच्चों को प्लास्टिक सर्जरी के जरिए ठीक किया जा सकता है। सर्जरी के बाद ऐसे बच्चों को सहानुभूति की जरूरत होती है। उन्हें मानसिक रूप से यह विश्वास दिलाना पड़ता है कि अब वे पूरी तरह से ठीक हैं। यह बातें केजीएमयू प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष और स्माइल ट्रेन इंडिया कार्यक्रम के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रोफेसर अरुण कुमार सिंह ने कहीं। वह केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि यह क्लेफ्ट जन्मजात बीमारी है। ऐसे बच्चों को खाने, सांस लेने और बोलने में कठिनाई होती है। लेकिन यह सर्जरी से ठीक हो सकता है। उन्होंने बताया कि स्माइल ट्रेन प्रोग्राम के तहत विभिन्न अस्पतालों को जोड़ा गया है। भारत में हर साल 35000 से अधिक बच्चे क्लेफ्ट के साथ जन्म लेते हैं।
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करीब 19 वर्ष में लखनऊ में 18500 से अधिक क्लेफ्ट सर्जरी की गई है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के जरिए जरूरतमंद बच्चों की मुफ्त सर्जरी की जाती है। इस दौरान संस्थान से जुड़ी ममता कैरल ने बताया कि लोगों में जागरूकता लाने के लिए क्लेफ्ट संस्था स्माइल ट्रेन इंडिया की ओर से स्माइल टार्च यात्रा शुरू की गई है। राष्ट्रीय क्लेफ्ट दिवस आठ फरवरी से निकली स्माइल टार्च के लखनऊ पहुंचने पर स्वागत किया गया।
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लखनऊ में स्माइल टॉर्च का स्वागत करने और स्माइल ट्रेन इंडिया और उसके सहयोगी अस्पतालों को समर्थन देने के लिए 14 जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास से क्लेफ्ट वॉकथॉन का आयोजन किया जाएगा। इसमें बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन भी शामिल होंगे।