यूपी से सिमी आतंकियों के गहरे कनेक्शन, पश्चिमी यूपी में बना रखें है ठिकाने
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प्रतिबंधित संगठन सिमी के सदस्य दूसरे प्रांतों के साथ ही यूपी में भी सक्रिय हैं। वे पश्चिम यूपी के कई जिलों में स्लीपिंग माड्यूल के रूप में हैं और अपनी हरकतों को अंजाम देने के बाद इधर-उधर चले जाते हैं। देश के कई स्थानों से पकड़े गए सिमी आतंकियों के सूबे से गहरे कनेक्शन इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं कि उन्होंने किस तरह अपनी जड़ें सूबे में फैला रखी हैं।
भोपाल में एनकाउंटर में मारे गए सिमी आतंकवादियों का यूपी कनेक्शन तो अभी जांच का विषय है लेकिन इससे पहले 2013 में मध्य प्रदेश में खंडवा जेल से सात सिमी आतंकी भाग निकले थे।
उन्होंने जेल के दो सुरक्षा गार्डों पर चाकू से हमला किया था और जेल के बाथरूम की खिड़की तोड़कर भागे गए थे। इन्हीं में से पांच ने यूपी के बिजनौर में ठिकाना बनाया था।
खुफिया एजेंसियों को इनकी इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के साथ मिलीभगत की जानकारी मिली थी। एजेंसियों को भी इनका पता तब चला जब 14 दिसंबर 2014 को बिजनौर में एक बम विस्फोट हुआ। यह विस्फोट आतंकियों द्वारा बम बनाने के दौरान हुआ था। इन्होंने उत्तराखंड के रुड़की में भी एक बम विस्फोट किया था। इसमें एक 12 वर्षीय बालक मर गया था।
पश्चिमी यूपी को निशाना बनाना चाहते थे आतंकी
उड़ीसा के भुवनेश्वर में जब फरवरी 2016 में एनआईए ने सिमी के चार आतंकियों को पकड़कर पूछताछ की तो कई चौंकाने वाली सूचनाएं मिलीं। इनके मंसूबे काफी खतरनाक थे। इन आतंकियों ने पश्चिम यूपी के कुछ जिलों को अपने मंसूबों के लिए चिन्हित कर रखा है। खुफिया एजेंसी के सूत्रों का दावा है कि सिमी पर जब 2001 में प्रतिबंध लगा तब उसके ज्यादातर सदस्य यूपी से भाग कर मुंबई में बस गए।
मुंबई में चार सिमी आतंकियों को जब पकड़ा गया तो उनमें खलीक अहमद नानपारा, बहराइच और मोहम्मद याहया बहराइच शहर का रहने वाला था जबकि एक सुल्तानपुर के मुसाफिरखाना और एक सिद्धार्थनगर के बांसी का रहने वाला था।
एजेंसियों का दावा है कि सिमी के स्लीपिंग मॉड्यूल खासकर पश्चिम यूपी में अलग-अलग स्थानों पर पड़े हैं। ये लोग खासकर सहारनपुर, मुरादाबाद, अलीगढ़, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, बुलंदशहर, ब़ागपत आदि जिलों में पनाह लिए हुए हैं।
यासीन भटकल ने भी दी थी जानकारी
वर्ष 2013 में बिहार से पकड़े गए इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी यासीन भटकल ने भी यह स्वीकार किया था कि पश्चिमी उप्र में सिमी व आईएम के मॉड्यूल सक्रिय हैं। वह खुद आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए कुछ सिमी सदस्यों को चिह्नित कर चुका था और उनके संपर्क में था।
सिमी का इतिहास
‘सिमी’ यानी स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया भारत में प्रतिबंधित संगठन है। इसका गठन 25 अप्रैल 1977 को अलीगढ़ में हुआ। भारत सरकार मानती है कि सिमी की गतिविधियां संदिग्ध हैं। यह आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ा हुआ एक संगठन है।
सिमी को 2002 में भारत सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया लेकिन अगस्त 2008 में एक विशेष न्यायाधिकरण ने प्रतिबंध हटा लिया। सुप्रीम कोर्ट ने छह अगस्त 2008 को यह प्रतिबंध बहाल कर दिया।
सिमी को अनलॉफुल ऐक्टिविटीज प्रिवेंशन ऐक्ट 1967 के तहत प्रतिबंधित किया गया था। सिमी 2019 तक प्रतिबंधित है।
इस संगठन की उप्र, दिल्ली, मध्य प्रदेश, गुजरात, केरल, महाराष्ट्र, आंध्र सहित कई राज्यों में मजबूत उपस्थिति है। सूत्रों का मानना है कि प्रतिबंध लगने के बाद सिमी इंडियन मुजाहिदीन नाम से भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता है।
क्या कहते हैं अफसर
इस पर दलजीत सिंह चौधरी एडीजी कानून-व्यवस्था का कहना है कि प्रतिबंध से पहले सिमी का नेटवर्क पूरे उत्तर प्रदेश में काफी हद तक फैला हुआ था लेकिन प्रतिबंध के बाद यह नेटवर्क ध्वस्त होता चला गया। इसके बावजूद हम इस संगठन के पुराने सदस्यों पर नजर रखते हैं।
इनकी गतिविधियों पर पुलिस व खुफिया एजेंसी हर समय चौकन्नी रहती है। जेल में बंद इनके सदस्यों से कौन-कौन मिलने आ रहा है, इस पर नजर रखी जाती है। पिछले काफी समय से यूपी में सिमी की गतिविधियां शून्य हैं।
जहां तक मध्य प्रदेश में एनकाउंटर में मारे गए सिमी आतंकियों का प्रश्न है तो उनका अभी तक कोई यूपी कनेक्शन नहीं निकला है। इन लोगों का यूपी से कोई लिंक नहीं था, न ही इन्होंने यूपी में कोई वारदात की थी।