यूपी में खराब स्वास्थ्य सुविधाओं की रिपोर्ट पर मंत्री बोले, हमने काफी सुधार किया अभी वक्त लगेगा
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नीति आयोग की रिपोर्ट में यूपी को देश के 21 बड़े राज्यों में स्वास्थ्य सेवा व चिकित्सा सेवाओं के मामले में अंतिम पायदान पर दिखाए जाने पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्घार्थनाथ सिंह ने कहा है कि यह रिपोर्ट 2017 की है तब हम सत्ता में आए ही थे।
उन्होंने कहा कि तब से लेकर अब तक स्वास्थ्य सेवाओं में काफी सुधार किया गया है। बच्चों को पोषणयुक्त आहार दिया जा रहा है। शौचालय बनाए गए हैं। हमें पूरा भरोसा है कि आने वाले समय में इसमें और सुधार होगा। खास बात है कि पिछली बार भी यूपी अंतिम पायदान पर था।
राज्य की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक साल पहले यूपी का कंपोजिट इंडेक्स स्कोर 33.69 था, जो अब 5.28 अंक घटकर 28.61 रह गया। ऐसा ही हाल पड़ोसी उत्तराखंड का है, जिसे पिछली बार 15वें स्थान के मुकाबले इस बार 17वां स्थान मिला है।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने मंगलवार को ‘हेल्दी स्टेट प्रोग्रेसिव इंडिया’ नामक रिपोर्ट जारी की। यह दूसरा मौका है जब आयोग ने 23 स्वास्थ्य मानकों के आधार पर राज्यों की रैंकिंग जारी की है।
संस्थागत प्रसव और टीबी के इलाज में पिछड़ा यूपी
संस्थागत प्रसव में उत्तर प्रदेश अंतिम पायदान पर है। 2015-16 में यूपी में जहां यह दर 52.4% थी, वहीं 2017-18 में घटकर 50.6% रही। सूची में तेलंगाना 91.7% के साथ शीर्ष पर है। इसी तरह टीबी के इलाज में भी यूपी आखिरी स्थान पर रहा।
2015 में जहां दर 87.5% थी, 2016 में 23.5% की गिरावट के साथ 64% रही। यूपी में टीबी के मामले भी पिछली बार की तुलना में बढ़े हैं। 2016 में प्रति एक लाख की आबादी पर 137 मामले थे, वहीं 2017 में यह बढ़कर 140 हो गए।