थिएटर मेरा पहला प्यार, तुरंत फीडबैक मिलने के साथ ही सुधरता है अभिनय: श्वेता तिवारी
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रंगमंच मेरा पहला प्यार है। इसीलिए वो खुद रंगमंच को बहुत महत्व देती हैं। आज के दौर के युवा रंगमंच को गंभीरता से नहीं लेते हैं, यह उनके लिए एक सीख जैसी है। अभिनय निखारना हो तो ज्यादा से ज्यादा थिएटर करो, यहां थिएटर में आपको तुरंत फीडबैक मिलता है। इससे गलतियां सुधारने का मौका मिलता है।
शनिवार को नगर में थियेटर प्ले के लिये पहुंचीं अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने पत्रकारों के पूछे गए सवालों के जवाब में ये बातें कहीं। उनके साथ आये फिल्म अभिनेता राकेश बेदी और अभिनेता राहुल भुच्छर ने भी मंच पर अभिनय को लकर पूछे गए सवालों के जवाब दिए। तीनों ही ‘जब वी सेप्रेट’ नाटक के मंचन के सिलसिले में शहर में थे।
राकेश बोले- हर महीने थियेटर करने मंच पर उतरता जरूर हूं
बीते करीब 4 दशकों से अभिनय कर रहे राकेश बेदी का कहना है कि बचपन से ही थियेटर इतना अच्छा लगता रहा है कि कॉलेज के दिन आते-आते थियेटर ने मुझे बुला ही लिया। मेरा मानना है कि एक कलाकार को उसका शौक ही उम्दा एक्टर बनाता है। सिनेमा और धारावाहिकों में काम करने से पैसे तो मिल जाते हैं, लेकिन थियेटर करने से कलाकार का शौक पूरा होता है। नई पीढ़ी को थियेटर के प्रति सकारात्मक सोच के लिए आगे आना चाहिये।
कलाकारों को उनकेशहर में ही मिले रोजी-नाम
युवा अभिनेता राहुल ने बताया कि नगर के कलाकारों को रंगमंच से जोड़ने के उद्देश्य से उन्होंने थिएटर ग्रुप बनाया है। कलाकारों को उनकेशहर में ही थिएटर करके रोजी रोटी केसाथ नाम मिल सके, इसी उददेश्य को लेकर आगे चल रहा हूं। लखनऊ को लेकर पूछे गये सवाल पर श्वेता तिवारी ने कहा कि शहर खूबसूरत है, तरक्की कर रहा है, लेकिन एक बात अलग है वो ये कि यहां के लोगों को अपनी संस्कृति की समझ है।