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Lucknow News: अंतरिक्ष में शुभांशु की प्रयोगशाला देख हैरत में थे पिता...
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लखनऊ। त्रिवेणी नगर निवासी ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष में जाने के बाद बृहस्पतिवार को पहली बार अपने परिवार बात की। अंतरिक्ष स्टेशन से टीडीआरएस नेटवर्क के जरिये जैसे ही शुभांशु अपने माता-पिता से जुड़े, दोनों के लिए यह बेहद भावुक कर देने वाला खुशी का पल था। लगभग 15 मिनट की बातचीत में शुभांशु ने परिजनों को अंतरिक्ष स्टेशन पर मौजूद अपनी प्रयोगशाला की वर्चुअल सैर कराई। अंतरिक्ष में इतनी बड़ी और अति-आधुनिक प्रयोगशाला देखकर पिता शंभुदयाल शुक्ला हैरत में पड़ गए।
बेटे की अच्छी सेहत देख मां को मिला सुकून
लंबे इंतजार के बाद आखिरकार अंतरिक्ष से बेटे शुभांशु से जब मां आशा शुक्ला ने बात की तो उनकी आंखें नम हो गईं। मां ने गौर किया कि शुभांशु का चेहरा पहले से ताजा और खुशगवार दिख रहा था। यह देखकर मां का चेहरा खिल गया। बातों के दौरान ही उन्होंने अपनी मां को अंतरिक्ष से सूर्योदय का नजारा दिखाया जो बस कुछ पलों के लिए था। इसी बीच स्पेस स्टेशन ने अपनी दिशा बदल ली।
अद्भुत अनुभव....सोते कहीं हैं, जागते हैं कहीं
पिता के अंतरिक्ष स्टेशन पर सोने-जागने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष स्टेशन में छत और दीवार से लगकर कहीं भी सो सकते हैं। मजेदार बात है कि अंतरिक्ष में आप जहां सोते हैं, जागने पर हवा में तैरकर या बहकर कहीं और पहुंच जाते हैं। पिता ने बताया कि शुभांशु की 12 जुलाई को वापसी होनी है। घर में माता-पिता का दोनों वक्त प्रार्थना और पूजा-पाठ जारी है। पिता को बेटे की कामयाब वापसी पर 100 फीसदी भरोसा है।
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शोध से हमारा कल होगा बेहतर
शुभांशु ने बताया कि टीम अंतरिक्षयात्रियों की मांसपेशियों के कमजोर हो जाने के कारणों की पड़ताल कर रही है। उनकी टीम अंतरिक्ष में फसलों के बीजों के अंकुरण और उनके विकास पर अध्ययन करेगी। अंतरिक्ष लैब में यह देखा जाएगा कि जहां ग्रेविटी नहीं है, वहां सूक्ष्म एल्गी की वृद्धि और आनुवंशिक गतिविधियों पर क्या फर्क पड़ता है।
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बेटे की अच्छी सेहत देख मां को मिला सुकून
लंबे इंतजार के बाद आखिरकार अंतरिक्ष से बेटे शुभांशु से जब मां आशा शुक्ला ने बात की तो उनकी आंखें नम हो गईं। मां ने गौर किया कि शुभांशु का चेहरा पहले से ताजा और खुशगवार दिख रहा था। यह देखकर मां का चेहरा खिल गया। बातों के दौरान ही उन्होंने अपनी मां को अंतरिक्ष से सूर्योदय का नजारा दिखाया जो बस कुछ पलों के लिए था। इसी बीच स्पेस स्टेशन ने अपनी दिशा बदल ली।
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अद्भुत अनुभव....सोते कहीं हैं, जागते हैं कहीं
पिता के अंतरिक्ष स्टेशन पर सोने-जागने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष स्टेशन में छत और दीवार से लगकर कहीं भी सो सकते हैं। मजेदार बात है कि अंतरिक्ष में आप जहां सोते हैं, जागने पर हवा में तैरकर या बहकर कहीं और पहुंच जाते हैं। पिता ने बताया कि शुभांशु की 12 जुलाई को वापसी होनी है। घर में माता-पिता का दोनों वक्त प्रार्थना और पूजा-पाठ जारी है। पिता को बेटे की कामयाब वापसी पर 100 फीसदी भरोसा है।
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शुभांशु ने बताया कि टीम अंतरिक्षयात्रियों की मांसपेशियों के कमजोर हो जाने के कारणों की पड़ताल कर रही है। उनकी टीम अंतरिक्ष में फसलों के बीजों के अंकुरण और उनके विकास पर अध्ययन करेगी। अंतरिक्ष लैब में यह देखा जाएगा कि जहां ग्रेविटी नहीं है, वहां सूक्ष्म एल्गी की वृद्धि और आनुवंशिक गतिविधियों पर क्या फर्क पड़ता है।