UP: शुभांशु का अंतरिक्ष मिशन टलने से मायूसी, पिता ने कहा - देर सही, दुरुस्त हो यात्रा
11 जून की शाम को रॉकेट की लॉन्चिंग तय थी लेकिन तकनीकी खामी के कारण यात्रा को टाल दिया गया। शुभांशु के पिता ने कहा कि अच्छा हुआ समय रहते यान में खामी का पता लग गया। यात्रा देर से सही, दुरुस्त और कामयाब होनी चाहिए।
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लखनऊ वासियों और अंतरिक्ष विज्ञान में दिलचस्पी रखने वाले लोगों को फौरी तौर पर मायूसी तो हुई है, लेकिन शुभांशु के परिजन और उनके शुभचिंतकों का कहना है कि यात्रा देर से सही, लेकिन सुरक्षित और सफल हो, ये जरूरी है।
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कामयाब हो अंतरिक्ष यात्रा
शुभांशु के पिता शंभू दयाल शुक्ल ने अमर उजाला से कहा कि सब कुछ ठीक रहा होता तो बुधवार की शाम हम सभी भारतवासी शुभांशु की अंतरिक्ष यात्रा की लॉन्चिंग का लाइव प्रसारण देख रहे होते। अच्छा हुआ समय रहते यान में खामी का पता लग गया। यात्रा देर से सही, दुरुस्त और कामयाब होनी चाहिए। बताया कि बुधवार को भी शुभांशु के घर पर शुभकामना देने वालों का तांता लगा रहा। मां आशा देवी ने कहा कि शुभांशु की कॉल आएगी तो मिशन की वर्तमान प्रगति और स्थिति के बारे में ठीक-ठीक जानकारी हो पाएगी।
इस बार मिशन के टलने की ये है वजह
इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला के विज्ञान अधिकारी डॉ. सुमित कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) ने 11 जून को एक्स पर जानकारी दी कि मिशन में शामिल रॉकेट की लॉन्चिंग से पहले बूस्टर स्टेज की परफॉर्मेंस चेक के दौरान ऑक्सीजन लीक का पता चला। जिसके बाद मिशन को स्थगित कर दिया गया। नई तारीख की घोषणा अभी नहीं की गई है।
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पहले भी टाला जा चुका है मिशन एक्जियम-4
- पहली बार 29 मई को ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट के तैयार नहीं होने के कारण लॉन्चिंग टाल दी गई।
- दोबारा इसे 8 जून को शेड्यूल किया गया, लेकिन मौसम खराब होने के कारण फिर ये टल गया।
- नई तारीख 10 जून तय की गई, लेकिन मौसम की खराबी की वजह से टाला गया।
- चौथी बार 11 जून को मिशन को शेड्यूल किया गया, इस बार रॉकेट-यान में आक्सीजन का रिसाव हो गया। इस बार कोई नई तारीख नहीं दी गई है।
अंतरिक्ष यात्रा को लेकर कुछ दिलचस्प बातें
अंतरिक्ष में 16 बार डूबता और उगता है सूरज
अंतरिक्ष में एक दिन में 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्त दिखाई देता है, क्योंकि अंतरिक्ष स्टेशन, यान और उपग्रह 28,800 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से धरती का चक्कर लगाते हैं। इस हिसाब से हर डेढ़ घंटे में एक बार सूर्योदय और एक बार सूर्यास्त होता है। हकीकत में रात हो रही या सुबह, इसे जानने के लिए अंतरिक्ष में यूनिवर्सल टाइम यानी लंदन टाइम का इस्तेमाल किया जाता है।
अंतरिक्ष में खाने को क्या ले जा रहे हैं शुभांशु
अंतरिक्ष की यात्रा में एस्ट्रोनॉट, नासा की तरफ से स्पेशल पैक किया हुआ खाना ले जाते हैं। कहा जा रहा है कि शुभांशु भारतीय खानों में मूंग की दाल का हलवा, गाजर का हलवा, राजमा-चावल, जयपुरी मिक्स वेज जैसी चीजें ले जाएंगे।
अंतरिक्ष में होती है यूरिन की रिसाइक्लिंग
अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं होता, इसलिए वहां टॉयलेट का उपयोग एक सामान्य टॉयलेट जैसा नहीं होता, बल्कि यह एक विशेष वैक्यूम टॉयलेट होता है, जो मल को टैंक में खींच लेता है। अंतरिक्ष में पानी की कमी बड़ी चुनौती होती है, इसलिए यूरिन की रिसाइक्लिंग होती है। उसे फिल्टर करके पीने के पानी में बदल लिया जाता है।