फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   shivpal singh yadav's plan for his party pragtisheel samajwadi party.

यूपी: नए तेवर और कलेवर में दिखेगी शिवपाल यादव की प्रसपा, सपा पर तीखा होगा हमला, ये है पूरी योजना

Thu, 05 May 2022 11:31 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 05 May 2022 11:31 AM IST
सार

प्रसपा की प्रदेश कार्यकारिणी का गठन सप्ताह भर में हो जाएगा। विधानसभा चुनाव के बाद प्रसपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी को छोड़ अन्य सभी कमेटियां भंग कर दी गई थी। पार्टी के कर्ताधर्ता शिवपाल सिंह यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की तो उनके भाजपा में जाने की अटकलें चलीं लेकिन अब इन अटकलों पर विराम लग गया है।

विज्ञापन
shivpal singh yadav's plan for his party pragtisheel samajwadi party.
प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) जल्द ही नए तेवर और कलेवर में नजर आएगी। पार्टी के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वहीं अभी तक सपा के मामले में चुप रहने वाली प्रसपा अब उस पर हमला करने से पीछे नहीं हटेगी। प्रसपा लोगों को यह भी समझाएगी कि किस तरह से सपा अपने मूल रास्ते से भटक गई है।

विज्ञापन


विधानसभा चुनाव के बाद प्रसपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी को छोड़ अन्य सभी कमेटियां भंग कर दी गई थी। पार्टी के कर्ताधर्ता शिवपाल सिंह यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की तो उनके भाजपा में जाने की अटकलें चलीं लेकिन अब इन अटकलों पर विराम लग गया है। वहीं उम्मीद है कि बृहस्पतिवार को नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर कोर कमेटी विमर्श करेगी और दो से तीन दिन में अध्यक्ष के नाम पर मुहर लग जाएगी। मई में प्रदेश कमेटी व फ्रंटल संगठन तैयार हो जाएगा। इसके बाद जिलेवार अभियान चलेगा।
विज्ञापन


जिला, तहसील और ब्लॉकवार प्रशिक्षण शिविर लगाए जाएंगे। इसमें समाजवाद की अवधारणा से कार्यकर्ताओं को वाकिफ कराया जाएगा और समझाया जाएगा कि डॉ. लोहिया के सपनों को लेकर किस तरह से प्रसपा आगे बढ़ेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


पिछले सप्ताह आजम खां के बहाने शिवपाल सिंह ने सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव पर हमला बोलकर अपनी मंशा साफ कर दी है। शिवपाल ने कहा कि सपा को शून्य से शिखर तक पहुंचाया है। जिस पार्टी को लेकर कुछ लोग इतरा रहे हैं, उसमें शिवपाल और उनके साथियों का खून-पसीना लगा है। अब उसी तर्ज पर प्रसपा को भी शिखर पर पहुंचाकर दम लेंगे। भाजपा में जाने की चर्चाओं के सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी उनका सिर्फ और सिर्फ एक ही मकसद है कि प्रसपा फिर से सक्रिय भूमिका में आ जाए।

हमने उसे चलना सिखाया और वो हमें रौंदते चला गया

ईद के मौके पर शिवपाल ने ट्वीट के जरिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर हमला बोला था। उन्होंने लिखा था कि अपने सम्मान के न्यूनतम बिंदु पर जाकर मैंने उसे संतुष्ट करने का प्रयास किया। इसके बावजूद अगर नाराज हूं तो किस स्तर तक उसने हृदय को चोट दी होगी। हमने उसे चलना सिखाया और वो हमें रौंदता चला गया...।

इस भावनात्मक टिप्पणी पर बुधवार को शिवपाल ने कहा कि हमने परिवार व समाज की भलाई के लिए अपनी पार्टी खत्म करने से भी गुरेज नहीं किया। चाहते थे कि अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनें लेकिन अहंकार उन्हें ले डूबा। चुनाव में किसी भी मुद्दे पर राय तक नहीं ली गई। हर कदम पर सम्मान से समझौता किया पर अब मुश्किल हो रहा है। इसलिए पार्टी को फिर से खड़ा कर रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि उनके जो भी साथी इधर-उधर हैं, वे जल्द ही उनके साथ खड़े नजर आएंगे। सभी से बातचीत हो रही है।

विधानसभा चुनाव के बाद बढ़ी शिवपाल की नाराजगी
विधानसभा चुनाव के दौरान प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से शिवपाल सिंह ने इस्तफा दे दिया था। वह पार्टी का सपा में विलय करना चाहते थे। वह खुद सपा के टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन उनके साथियों को टिकट नहीं मिला। सपा से विधायक चुने जाने के बाद भी उन्हें विधायक दल की बैठक में नहीं बुलाया गया। यहीं से जुबानी जंग शुरू हुई। भाजपा में जाने की चर्चा शुरू हुई तो अखिलेश ने टिप्पणी की। इस पर शिवपाल ने दो टूक कह दिया कि सपा अध्यक्ष चाहें तो उन्हें विधायक दल से निकाल दें।

प्रसपा की सक्रियता से सपा को लग सकता है झटका

प्रदेश की राजनीति पर नजर रखने वालों का कहना है कि प्रसपा जितनी मजबूत होगी, सपा को उतना तगड़ा झटका लगेगा। खासतौर से आलू बेल्ट में शिवपाल की पकड़ मजबूत मानी जाती है। आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, एटा, कासगंज फर्रुखाबाद, कन्नौज व आसपास के जिलों में शिवपाल की धाक है।

वर्ष 2017 में जब शिवपाल ने अखिलेश पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ी तो इस क्षेत्र में असर दिखा। वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन को 65 सीटें मिली तो सपा सिर्फ पांच पर सिमट गई। जानकारों का कहना है कि शिवपाल सिंह संगठन के माहिर खिलाड़ी है। सामाजिक परिवर्तन यात्रा के दौरान भी उन्होंने अपना असर दिखाया था। अब चुनाव बाद सपा की कार्यशैली पर सवाल उठाने वाले नेताओं को प्रसपा के बहाने एक विकल्प मिलेगा।

प्रदेश की राजनीति में तीसरे मोर्चे को मिलेगी ताकत
प्रसपा की सक्रियता बढ़ने से प्रदेश की राजनीति में तीसरे मोर्चे को भी ताकत मिलेगी। जेल से बाहर आने के बाद आजम खां नई पार्टी बनाते हैं या नई रणनीति अपनाते हैं, यह गौर करने वाली बात होगी। राजनीति विश्लेषकों का यह भी मानना है कि आजम खां के बहाने सपा पर निशाना साधने वाले ज्यादातर लोग शिवपाल की छतरी के नीचे गोलबंद हो सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed