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एक होंगे शिया व सुन्नी वक्फ बोर्ड, यूपी मुस्लिम बोर्ड का होगा गठन, विलय की तैयारी शुरू

Tue, 24 Oct 2017 12:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 24 Oct 2017 12:58 AM IST
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shia and sunni waqf board to be merged soon.

यूपी में अलग-अलग संचालित सुन्नी व शिया वक्फ बोर्ड अब एक होंगे। प्रदेश की भाजपा सरकार ने दोनों वक्फ बोर्ड के विलय की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रदेश सरकार में वक्फ राज्य मंत्री मोहसिन रजा ने कहा कि काफी समय से शिया व सुन्नी वक्फ बोर्ड के विलय के संबंध में लोगों के सुझाव आ रहे थे। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी की मंजूरी मिलने के बाद विलय की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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इस संबंध में शासन से प्रस्ताव मांगा गया है। विधि विभाग के परीक्षण के बाद उत्तर प्रदेश मुस्लिम वक्फ बोर्ड का गठन कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे शिया व सुन्नी वक्फ बोर्ड जल्द ही भंग किए जाएंगे। संयुक्त बोर्ड बनने की स्थिति में उसमें वक्फ संपत्तियों के प्रतिशत के हिसाब से शिया और सुन्नी सदस्य नामित किए जाएंगे। उन्हीं में से किसी को अध्यक्ष बनाया जाएगा।
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यूपी और बिहार में ही अलग-अलग वक्फ बोर्ड
मोहसिन रजा का कहना है कि केवल उत्तर प्रदेश और बिहार में ही शिया व सुन्नी वक्फ बोर्ड अलग-अलग संचालित हो रहे हैं। अन्य सभी राज्यों में एक ही वक्फ बोर्ड है।

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विलय के संबंध में क्या कहता है एक्ट

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वक्फ राज्य मंत्री मोहसिन रजा

वक्फ एक्ट 1995 के मुताबिक शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड गठित करने के लिए कुल वक्फ संपत्तियों में किसी एक तबके की कम से कम 15 फीसद हिस्सेदारी जरूरी है। यानी कुल 100 वक्फ संपत्तियां होने पर शिया वक्फ की कम से कम 15 संपत्तियां होनी चाहिए।

मानक पर खरा नहीं शिया वक्फ बोर्ड : मोहसिन
वक्फ राज्य मंत्री ने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड एक्ट के मानकों को पूरा नहीं कर रहा। वर्तमान में सुन्नी वक्फ बोर्ड में करीब एक लाख 24 हजार वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं जबकि शिया वक्फ बोर्ड के पास पांच से सात हजार वक्फ संपत्तियां ही दर्ज हैं जो महज चार फीसद ही है।

केंद्रीय वक्फ परिषद के मुताबिक यूपी के शिया वक्फ बोर्ड के पास मात्र तीन हजार ही वक्फ संपत्तियां हैं। उन्होंने कहा कि दोनों वक्फ बोर्ड में अलग-अलग अध्यक्ष, मुख्य अधिशासी अधिकारी और अन्य स्टाफ रखने से फिजूलखर्ची होती है। इससे सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ता है।

शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने विलय के प्रस्ताव पर जताया विरोध

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वसीम रिजवी

उधर, वक्फ राज्य मंत्री के शिया व सुन्नी वक्फ बोर्ड के विलय के बयान पर शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सैयद वसीम रिजवी ने कड़ा विरोध जताते हुए इसे अवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि शिया व सुन्नी वक्फ बोर्डों का गठन 2020 तक के लिए हो चुका है। वक्फ कानून में बोर्डों को भंग करने का कोई प्रावधान नहीं है। बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सरकार वक्फ संपत्तियों और उनकी आय की जांच कराकर इस पर फैसला ले सकती है।

उन्होंने कहा कि विलय के लिए वक्फ अधिनियम में केवल वक्फ की संख्या ही नहीं, कुल आय को भी आधार बनाया गया है। कुल वक्फ की आय में हुसैनाबाद ट्रस्ट की आय भी शामिल कर ली जाए तो शिया संपत्तियों की आय 15 फीसद से अधिक है। हालांकि अभी ट्रस्ट के संबंध में उच्च न्यायालय में मुकदमा विचाराधीन है। रिजवी ने कहा कि राम मंदिर के पक्ष में कोर्ट में हलफनामा दाखिल करने के बाद से कुछ मुस्लिम धर्मगुरु वक्फ बोर्ड से नाराज हैं। राज्यमंत्री की उन धर्मगुरुओं से नजदीकियां हैं। इसीलिए वे अवैधानिक बयान दे रहे हैं।

सुन्नी वक्फ बोर्ड ने किया विलय के प्रस्ताव का स्वागत

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प्रतीकात्मक तस्वीर

सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारूकी ने शिया व सुन्नी वक्फ बोर्ड के विलय के प्रस्ताव का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सरकार इसका ध्यान रखे के बोर्डों का विलय वक्फ एक्ट 1995 के प्रावधान के मुताबिक ही किया जाए। हालांकि विलय होने की दशा में उन्होंने उत्तर प्रदेश मुस्लिम वक्फ बोर्ड नाम रखे जाने पर एतराज जताया। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड में मुस्लिम शब्द जोड़ा जाना सही नहीं है।

वक्फ बोर्ड का नाम प्रदेश के नाम पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड में 12 सदस्य चुने जाते हैं। इनमें दो सांसद, दो एमएलए या एमएलसी, दो राज्य बार काउंसिल सदस्य, दो मुतवल्ली, दो मौलवी, एक अधिकारी और एक समाजसेवी का चयन होता है। ये सभी सदस्य चेयरमैन का चुनाव करते हैं। संयुक्त वक्फ बोर्ड के गठन के बाद भी यही प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

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