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VIDEO: पुलिस की करतूत से इंसानियत हुई शर्मसार

Sat, 27 Dec 2014 12:17 PM IST
हेमंत पाण्डेय/अमर उजाला, लखनऊ
हेमंत पाण्डेय/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 27 Dec 2014 12:17 PM IST
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Shameful act of UP Police.

हजरतगंज में बृहस्पतिवार रात हुई भीषण सड़क दुर्घटना ने पुलिस के कई बदसूरत चेहरे उजागर कर दिए। बिल्डर का नाम आते ही पुलिसकर्मी डंपर छोड़ने का प्रयास करने लगे।

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मैकेनिक बुलवाकर न सिर्फ डंपर की मरम्मत कराई, बल्कि इसमें लदे माल को साइट पर उतरवाया। बाद में दबाव पड़ा तो खाली डंपर को हजरतगंज कोतवाली के सामने खड़ा करवा दिया।
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वकीलों ने इसमें घूसखोरी और बिल्डर से सांठगांठ का आरोप लगाया है। यही नहीं, घायल की कटी अंगुलियां पुलिस कर्मियों ने कार में छोड़ दी।

अगले दिन जब लोगों ने कार में कटी अंगुलियां देखीं तो पुलिस कर्मियों ने उसे नाले में फेंक दिया। घायलों को दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी से निकालने व उसे इलाज कराने में काफी लापरवाही बरती गई।

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नाले में फेंकीं कटी अंगुलियां

Shameful act of UP Police.

दुर्घटनाग्रस्त कार में फंसे घायलों को काफी मशक्कत के बाद बाहर निकला गया। इसके बाद उनको आनन-फानन में सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने घायल आयुष्मान का इलाज शुरू किया तो पता चला कि उसकी तीन अंगुलियां कटी हुई हैं। एक तो खाल के सहारे लटकी हुई थी, लेकिन उसकी दो गायब थीं।

डॉक्टरों के कहने पर भी पुलिस कर्मी इन अंगुलियों को लेकर अस्पताल नहीं गए। अगले दिन प्रभाकर की दोनों कटी हुई अंगुलियों को वकीलों ने हजरतगंज कोतवाली के बाहर खड़ी दुर्घटनाग्रस्त कार पड़ा देखा तो हड़कंप मच गया।

खुद को फंसता देखकर पुलिसकर्मियों ने इन अंगुलियों को कार से निकालकर नाले में फेंक दिया। वकील राजेश दुबे के साथ दर्जनों लोग सीओ हजरतगंज हरतगंज अशोक कुमार वर्मा से मामले की शिकायत की। इसके बाद दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।

दुर्घटना के बाद बिल्डर से की सांठगांठ

Shameful act of UP Police.

वकील राजेश दुबे ने आरोप लगाया है कि दुर्घटना के बाद पुलिस ने बिल्डर से सांठगांठ कर ली। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के कहने पर पुलिसकर्मियों ने ही खराब डंपर को मैकेनिक बुलवाकर ठीक कराया।

इसके बाद चालक को गाड़ी समेत छोड़ना चाहते थे। बाद में लोगों ने आक्रोश जताना शुरू कर दिया तो पुलिस कर्मी झांसा देकर उसे बादशाहनगर ले गए। आरोप है कि बिल्डर के साथ  साथ पुलिस की गाड़ियां भी डंपर के साथ बादशाहनगर में साइट तक गई।

वहां पर गिट्टी उतरवाने के बाद खाली डंपर को हजरतगंज कोतवाली लाकर खड़ा कर दिया गया। इस मामले में वकील राजेश दुबे के नेतृत्व में वकीलों के एक दल ने सीओ हजरतगंज से शिकायत की और दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ जांच की मांग की है।

आरोप है कि इस मामले में पुलिस के अधिकारी ने घूस लेकर बिल्डर का साथ दिया और माल को साइट पर उतरवाया।

...तो जोड़ी जा सकती थीं कटी अंगुलियां

Shameful act of UP Police.

घायल आयुष्मान प्रभाकर की कटी अंगुलियों को अगर समय रहते अस्पताल पहुंचा दिया जाता तो उसे सर्जरी करके दोबारा शरीर से जोड़ा जा सकता था। पुलिस कर्मी घायलों को समय से अस्पताल पहुंचाने में सफल नहीं रहे।

देर से पहुंचे तो भी डॉक्टरों ने उन्हें कटी हुई अंगुलियां लेकर आने के लिए कहा था। इसके बाद वह वहां से नदारद हो गए। अगले दिन दोपहर में जब अगुंलियां मिलीं तो पुलिस कर्मी इसे लेकर अस्पताल पहुंचे लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

इसके बाद डॉक्टरों ने बताया कि छह घंटे तक तो अंगुलियों को आसानी से जोड़ा जा सकता है लेकिन इसके बाद उम्मीद काफी कम हो जाती है।

आयुष्मान की अंगुलियों को 14 घंटे बाद अस्पताल पहुंचाया गया। इससे पहले उसे नाली में फेंक दिये जाने की वजह से शरीर में जोड़ने पर संक्रमण का खतरा भी पैदा हो गया है।

यहां देखें वीडियो

Shameful act of UP Police.
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