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कोरोना से बचाई जान, अब नसों व मांसपेशियों पर नियंत्रण खोने की बीमारी का होगा इलाज

Sun, 06 Sep 2020 04:21 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sun, 06 Sep 2020 04:21 PM IST
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SGPGI : Life saved from corona, now disease will be treated to lose control of nerves and muscles
SGPGI
पीजीआई के डॉक्टरों ने नसों और मांसपेशियों पर नियंत्रण खोने की बीमारी (मायस्थीनिया ग्रेविस) से पीड़ित कोरोना संक्रमित महिला की जान बचाने में सफलता पाई है। पंजाब निवासी दुर्गेश नंदिनी मायस्थीनिया ग्रेविस से ग्रसित थी। इस बीमारी में नसों और मांसपेशियों के बीच तालमेल खत्म हो जाता है। इससे मरीज की दैनिक क्रिया तक प्रभावित होने लगती है। इलाज कराने पीजीआई आई। कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उसे 29 जुलाई को कोरोना वार्ड में भर्ती किया गया। स्थिति खराब होने पर आईसीयू में शिफ्ट किया गया। सांस लेने में परेशानी के वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। प्लाज्मा थेरेपी समेत अन्य दवाओं के बाद धीरे-धीरे उसकी रिकवरी बढ़ती गई और वह ठीक हो गई। अब मरीज को न्यूरो सर्जरी विभाग में शिफ्ट कर दिया गया है। यहां उसकी मायस्थीनिया ग्रेविस नामक बीमारी का इलाज किया जाएगा।
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इस टीम ने दिया इलाज
महिला को इलाज देने वाली टीम में न्यूरोलॉजिस्ट प्रो. विमल पालीवाल, रेस्पिरेटरी के प्रो. आलोक नाथ, एनेस्थीसिया विभाग के प्रो. पुनीत गोयल, डॉ. प्रतीक, हेमेटोलॉजी विभाग के प्रो. अंशुल गुप्ता, इम्यूनोलॉजी विभाग के प्रो. एविल लारेंस और ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के प्रो. अनुपम वर्मा, इमरजेंसी मेडिसिन के डॉ. तन्मय घटक शामिल रहे।
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जानिए क्या है मायस्थीनिया ग्रेविस
डॉ. तन्मय ने बताया कि मायस्थीनिया ग्रेविस एक तरह की कमजोरी होती है। यह हमारे नियंत्रण में रहने वाली मांसपेशियों में होने वाली थकान को दर्शाती है। हाथ या पैर की मांसपेशियों की कमजोरी, दोहरी दृष्टि और पलकों के खुलने और झुकने में नियंत्रण न होना इसके लक्षण हैं। इसके अलावा बोलने, चबाने, निगलने व सांस लेने में कठिनाई होने लगती है। यह 40 से कम उम्र की महिलाओं और 60 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में ज्यादा पाई जाती है।
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