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Lucknow News: डाक मुहर-टिकटों की खरीद में हेरफेर के दोषी को सात साल की कैद
Sat, 01 Mar 2025 01:27 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sat, 01 Mar 2025 01:27 AM IST
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डाक मुहर-टिकटों की खरीद में हेरफेर के दोषी को सात साल की कैद
लखनऊ। फर्जी तरीके से डाक मुहर व टिकटों की खरीद में हेरफेर कर सरकार को लाखों का चूना लगाने वाले अलीगंज स्थित मेसर्स इंद्रधनुष के मालिक तरुण भगौलीवाल को दोषी ठहराया है। भ्रष्टाचार निवारण के विशेष न्यायाधीश श्याम मोहन जायसवाल ने तरुण को सात साल की कैद की सजा सुनाई है। 80 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामले में आरोपी रहे मिठाई राम की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। आरोपी सरवन कुमार और सुनील साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिए गए थे।
महानगर के न्यू हैदराबाद स्थित उप डाकघर के उप अधीक्षक सूरज सिंह ने चार मार्च 2006 को थाने में केस दर्ज कराया था। इसमें बताया था कि न्यू हैदराबाद का डाकघर मास मेलिंग के लिए अधिकृत नहीं था। फिर भी उसमें अनधिकृत रूप से 20 लाख डाक की पोस्टिंग और प्रेषण की बात सामने आई थी। जांच में पता चला कि रेलवे विभाग और आरोपी तरुण की फर्म ने बिना आवेदन वर्ष 2006 में जनवरी व फरवरी में अधिकृत मास मेलिंग केंद्रों (लखनऊ जीपीओ, महानगर डाकघर, आरएमएस चारबाग व आलमबाग डाकघर) में करीब 38.65 लाख रुपये के डाक टिकटों की खरीद व विक्रय डाकघर खजाने में जमा न करके गबन कर लिया।
साथ ही गुमराह किया गया कि दिल्ली की रेलवे भर्ती सेल की प्रतिनिधि फर्म इंद्रधनुष के मालिक व कर्मचारियों और न्यू हैदराबाद डाकघर के पोस्टमास्टर मिठाई राम ने डाकघर की लाइसेंसधारक स्टांप वेंडरों की मिलीभगत से 1.93 लाख रुपये के कमीशन का भुगतान कर आपस में बांट लिया। विवेचक ने तरुण भगोलीवाल, सरवन कुमार व सुनील कुमार के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
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इसके अलावा टिकटों की हेराफेरी के मामले में भी दोषी तरुण भगौलीवाल को सात साल की कैद की सजा सुनाई है। तरुण पर 65 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। इस मामले की रिपोर्ट महानगर थाने में डाक विभाग के वरिष्ठ अधीक्षक राम लखन सिंह ने दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि 20 फरवरी 2006 को न्यू हैदराबाद उपडाकघर से भेजे गए कुछ डाक जो करीब 27 थैलों में थे। लालबाग स्थित सिटी शंटिंग ऑफिस में संदिग्ध अवस्था में गेट के बाहर पड़े मिले थे।
थैले खोलने पर पाया गया कि उनमें बड़ी संख्या में पत्रों पर ऐसे टिकट लगाए गए थे, जो पहले भी इस्तेमाल किए जा चुके थे। इन डाक टिकटों का इस्तेमाल करने से पहले किसी रसायन से इन्हें साफ किया गया था। इससे टिकटों का रंग फैल गया था। वास्तविक टिकटों की स्थिति ऐसी नहीं होती है। रेलवे के प्रतिनिधि ने 2.82 लाख रुपयों की धोखाधड़ी कर विभाग को क्षति पहुंचाई थी।
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महानगर के न्यू हैदराबाद स्थित उप डाकघर के उप अधीक्षक सूरज सिंह ने चार मार्च 2006 को थाने में केस दर्ज कराया था। इसमें बताया था कि न्यू हैदराबाद का डाकघर मास मेलिंग के लिए अधिकृत नहीं था। फिर भी उसमें अनधिकृत रूप से 20 लाख डाक की पोस्टिंग और प्रेषण की बात सामने आई थी। जांच में पता चला कि रेलवे विभाग और आरोपी तरुण की फर्म ने बिना आवेदन वर्ष 2006 में जनवरी व फरवरी में अधिकृत मास मेलिंग केंद्रों (लखनऊ जीपीओ, महानगर डाकघर, आरएमएस चारबाग व आलमबाग डाकघर) में करीब 38.65 लाख रुपये के डाक टिकटों की खरीद व विक्रय डाकघर खजाने में जमा न करके गबन कर लिया।
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साथ ही गुमराह किया गया कि दिल्ली की रेलवे भर्ती सेल की प्रतिनिधि फर्म इंद्रधनुष के मालिक व कर्मचारियों और न्यू हैदराबाद डाकघर के पोस्टमास्टर मिठाई राम ने डाकघर की लाइसेंसधारक स्टांप वेंडरों की मिलीभगत से 1.93 लाख रुपये के कमीशन का भुगतान कर आपस में बांट लिया। विवेचक ने तरुण भगोलीवाल, सरवन कुमार व सुनील कुमार के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
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इसके अलावा टिकटों की हेराफेरी के मामले में भी दोषी तरुण भगौलीवाल को सात साल की कैद की सजा सुनाई है। तरुण पर 65 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। इस मामले की रिपोर्ट महानगर थाने में डाक विभाग के वरिष्ठ अधीक्षक राम लखन सिंह ने दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि 20 फरवरी 2006 को न्यू हैदराबाद उपडाकघर से भेजे गए कुछ डाक जो करीब 27 थैलों में थे। लालबाग स्थित सिटी शंटिंग ऑफिस में संदिग्ध अवस्था में गेट के बाहर पड़े मिले थे।
थैले खोलने पर पाया गया कि उनमें बड़ी संख्या में पत्रों पर ऐसे टिकट लगाए गए थे, जो पहले भी इस्तेमाल किए जा चुके थे। इन डाक टिकटों का इस्तेमाल करने से पहले किसी रसायन से इन्हें साफ किया गया था। इससे टिकटों का रंग फैल गया था। वास्तविक टिकटों की स्थिति ऐसी नहीं होती है। रेलवे के प्रतिनिधि ने 2.82 लाख रुपयों की धोखाधड़ी कर विभाग को क्षति पहुंचाई थी।