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Lucknow News: केजीएमयू में 27 दिन में नहीं हो पाए खून की सात जांच
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केजीएमयू।
लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के गठिया रोग विभाग में इलाज के लिए पहुंची युवती बीते 27 दिनों से विभाग के चक्कर काट रही है, लेकिन खून की सात जांच नहीं करा पाई है। खून की जांच के लिए दो बार सैंपल भी दिए, लेकिन कभी सैंपल खराब होने और कभी कम होने की बात बताई गई। बुधवार को युवती के घरवालों ने इस पर आपत्ति जताई, तो उनसे अभद्रता की गई।
सीतापुर निवासी शालिनी अवस्थी (यूएचआईडी-20250548025) 30 अक्तूबर को पहली बार जोड़ों के दर्द की समस्या के साथ गठिया रोग विभाग आई थीं। उस समय उन्हें खून से जुड़ी सात प्रकार की जांच लिखी गई। घरवालों ने 6,170 रुपये फीस जमा करके रसीद कटवा ली।। सैंपल देने के दो दिन बाद जब रिपोर्ट लेने पहुंचे, उनसे सैंपल खराब होने की बात कही गई। इस पर उन्हें दोबारा सैंपल देने के लिए कहा गया।
सैंपल देने के बाद घरवाले जब बुधवार को दोबारा रिपोर्ट लेने पहुंचे तो उनसे सैंपल के लिए खून कम होने की बात कही गई। इस पर घरवालों ने नाराजगी जताई। मौके पर मौजूद डॉ. उर्मिला धाकड़ को जब अपनी समस्या बताने की कोशिश की तो उनके साथ अभद्रता की गई।
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हेल्पडेस्क नहीं, मरीज भटकने को मजबूर
गठिया रोग विभाग में इस समय कोई हेल्पडेस्क नहीं है। इससे मरीज अपनी समस्या बता भी नहीं पाते हैं। मरीज ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों से ही मदद मांगते हैं। गार्ड सूचना तो दे देते हैं, लेकिन किसी समस्या का समाधान नहीं करा पाते हैं।
Iमामले की शिकायत नहीं मिली है। फिर भी पड़ताल की जाएगी। मरीज या घरवालों के साथ अभद्रता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह भी जानकारी हासिल की जाएगी कि सैंपल से जांच क्यों नहीं हो सकी।
I
I- प्रो. केके सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयूI
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सीतापुर निवासी शालिनी अवस्थी (यूएचआईडी-20250548025) 30 अक्तूबर को पहली बार जोड़ों के दर्द की समस्या के साथ गठिया रोग विभाग आई थीं। उस समय उन्हें खून से जुड़ी सात प्रकार की जांच लिखी गई। घरवालों ने 6,170 रुपये फीस जमा करके रसीद कटवा ली।। सैंपल देने के दो दिन बाद जब रिपोर्ट लेने पहुंचे, उनसे सैंपल खराब होने की बात कही गई। इस पर उन्हें दोबारा सैंपल देने के लिए कहा गया।
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सैंपल देने के बाद घरवाले जब बुधवार को दोबारा रिपोर्ट लेने पहुंचे तो उनसे सैंपल के लिए खून कम होने की बात कही गई। इस पर घरवालों ने नाराजगी जताई। मौके पर मौजूद डॉ. उर्मिला धाकड़ को जब अपनी समस्या बताने की कोशिश की तो उनके साथ अभद्रता की गई।
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हेल्पडेस्क नहीं, मरीज भटकने को मजबूर
गठिया रोग विभाग में इस समय कोई हेल्पडेस्क नहीं है। इससे मरीज अपनी समस्या बता भी नहीं पाते हैं। मरीज ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों से ही मदद मांगते हैं। गार्ड सूचना तो दे देते हैं, लेकिन किसी समस्या का समाधान नहीं करा पाते हैं।
Iमामले की शिकायत नहीं मिली है। फिर भी पड़ताल की जाएगी। मरीज या घरवालों के साथ अभद्रता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह भी जानकारी हासिल की जाएगी कि सैंपल से जांच क्यों नहीं हो सकी।
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I- प्रो. केके सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयूI