वरिष्ठ लोकगायिका आरती पाण्डेय और हास्य कवि कमलेश द्विवेदी का निधन
पिछले चालीस वर्षों से आकाशवाणी पर गूंजने वाली पारम्परिक संस्कार गीतों की आवाज वरिष्ठ लोकगायिका आरती पाण्डेय का रविवार सुबह निधन हो गया। कोरोना वैक्सीन लेने के बाद से वे बीमार थीं। हास्य कवि कमलेश द्विवेदी का भी कोरोना संक्रमण के चलते निधन हो गया।
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पिछले चालीस वर्षों से आकाशवाणी पर गूंजने वाली पारम्परिक संस्कार गीतों की आवाज वरिष्ठ लोकगायिका आरती पाण्डेय का रविवार सुबह निधन हो गया। कोरोना वैक्सीन लेने के बाद से वे बीमार थीं। बैकुण्ठधाम में उनका अन्तिम संस्कार हुआ। बड़े बेटे आशीष ने मुखाग्नि दी। 73 वर्षीय श्रीमती पाण्डेय अपने पीछे तीन पुत्र, पुत्रवधु, पौत्र व पौत्रियों से भरा पूरा परिवार छोड़ गयी हैं।
वे संस्कार भारती जानकीपुरम की अध्यक्ष, लोक संस्कृति शोध संस्थान व अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी सेवा न्यास की संरक्षक थीं। शारदा सिन्हा, अनूप जलोटा, मालिनी अवस्थी और माधुरी शर्मा आदि कलाकारों के साथ वह प्रस्तुतियां दे चुकी हैं। लुप्तप्राय अवधी लोकगीतों के संरक्षण के लिए आकाशवाणी की ओर से निर्मित व प्रसारित लोक धरोहर धारावाहिक के शोध, संकलन व गायन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। वरिष्ठ लोकगायिका मालिनी अवस्थी, प्रो. कमला श्रीवास्तव, डॉ. विद्या विन्दु सिंह, डॉ. रामबहादुर मिश्र ने शोक व्यक्त किया है।
दिल छू लेने वाली रचनाओं के लिए जाने जाते थे हास्य कवि कमलेश द्विवेदी
हास्य कवि कमलेश द्विवेदी का कोरोना संक्रमण के चलते निधन हो गया। उनके निधन पर कवियों व व्यंग्यकारों ने शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं। वे अपने पीछे एक बेटा व पत्नी को छोड़ गए हैं। ‘रंगभारती’ के अध्यक्ष श्याम कुमार ने बताया कि विगत पहली अप्रैल को हुए ‘घोंघा बसंत सम्मेलन’ में जब कमलेश द्विवेदी आए थे तो कोई कल्पना नहीं कर सकता था कि एक पखवारा बीतते-बीतते कोरोना उन्हें हमसे छीन लेगा।
उन्होंने बताया कि फेसबुक पर कमलेश के जाने की खबर देखकर मैं स्तब्ध रह गया और मन हाहाकार कर उठा। कमलेश द्विवेदी बहुत ही नेक व्यक्ति थे तथा मेरे लिए बहुत बड़ा सहारा थे। कानपुर के लाजपतभवन में ‘रंगभारती’ के संगीत-आयोजन हुआ करते थे। फिर वहां हास्य कवि आयोजन ‘गदहा सम्मेलन’ शुरू किया गया। धीरे-धीरे मेरे हास्य-कवि सम्मेलनों में कमलेश मेरे दाहिने हाथ की तरह हो गए थे।
मैं विगत दो वर्षों से उनसे कहने लगा था कि कानपुर में मेरे बाद ‘गदहा सम्मेलन’ आयोजन कायम रखने का दायित्व उन्हें ही निभाना होगा। उत्तर में वह कहते थे-‘ऐसा न कहिए। कमलेश बहुत सक्रिय थे और उनकी नवरचित कविताएं बहुत उच्चकोटि की होतीं थीं। वर्ष 2018 में कमलेश द्विवेदी को रंगभारती के सर्वोच्च हास्य-सम्मान बेढब बनारसी रंगभारती सम्मान से सम्मानित किया गया था।
वहीं हास्य कवि राजेंद्र पंडित ने कहा कि कई मंचों पर उनका सानिध्य प्राप्त हुआ। कवि लालित्य पल्लव ने बताया कि ऐसे कवि बिरले ही जन्म लेते हैं, वैसे तो वह मूलरूप से कानपुर के रहने वाले थे, पर लखनऊ के सम्मेलनों में उनकी आवाजाही लगी रहती थी।