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कॉलेजों के आगे लाचार लखनऊ यूनिवर्सिटी प्रशासन, शिक्षक अनुमोदन में जमकर हो रहा फर्जीवाड़ा

Mon, 18 Jun 2018 02:34 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 18 Jun 2018 02:34 PM IST
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self finance college of lucknow university doing fraud in approval of faculty
lucknow university - फोटो : amar ujala

केस 1- शैक्षिक सत्र 2017-18 में लविवि से सहयुक्त कई कॉलेज में ऐसे शिक्षक पकड़े गए जो एक से ज्यादा जगह अनुमोदित दिखाए गए थे। इनमें से कुछ तो सरकारी सेवा में भी थे। कई ऐसे थे जिन्हें उसी कॉलेज में बीएड व बीटीसी दोनों विभागों में दिखाया गया था। खुलासा होने पर अनुमोदन निरस्त किया गया।

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केस 2- लविवि से सहयुक्त कुछ कॉलेजों ने अपने यहां के शिक्षकों का ब्योरा वेबसाइट पर अपडेट किया था। इसके बाद उन कॉलेजों की सूची में मौजूद करीब 300 शिक्षकों ने विवि को सूचित किया कि वे उस कॉलेज में कभी पढ़ाने ही नहीं गए। शिक्षकों के पत्र के बाद विवि ने उनका अनुमोदन निरस्त किया।
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राजधानी के वित्तविहीन विद्यालयों में शिक्षक अनुमोदन में खूब फर्जीवाड़ा हो रहा है। शासन ने पिछले सत्र में भी शिक्षकों और प्रधानाचार्य के सत्यापन के लिए विवि को निर्देश दिया था। लविवि ने शिक्षकों का अनुमोदन न होने की वजह से आईटी गर्ल्स कॉलेज में दाखिलों पर रोक लगा दी है। इसके बावजूद विवि इस फर्जीवाड़े को रोकने के लिए कोई कड़ा कदम नहीं उठा रहा है।
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राज्य सरकार के नियम के अनुसार कॉलेज को मान्यता जारी करते समय पढ़ाने वाले शिक्षकों का ब्योरा भी देना होता है। बीएड, बीटीसी या फिर सामान्य डिग्री कॉलेज में अनुमोदन के लिए शिक्षक को समिति के सामने साक्षात्कार से गुजरना होता है। इसके बाद अनुमोदन किया जाता है।

यह अनुमोदन नियमित होता है। इसलिए शिक्षक एक साथ दो कॉलेज में नहीं पढ़ा सकते। उच्च शिक्षा उत्थान समिति के अध्यक्ष जेपी सिंह के अनुसार,कॉलेज अर्ह शिक्षकों का अनुमोदन विवि से करा लेते हैं, लेकिन बाद में अनुमोदित शिक्षकों के बजाय कम वेतन पर अनर्ह शिक्षकों से पढ़ाई करवाई जाती है।

केंद्रीयकृत डाटा से दूर हो सकती है समस्या

जेपी सिंह के अनुसार डिग्री स्तर के शिक्षकों का केंद्रीयकृत डाटा तैयार कर इस फर्जीवाड़े को रोका जा सकता है। इस डाटा में आधार नंबर भी डालना चाहिए। मानस संसाधन मंत्रालय ने इसी आधार पर शिक्षकों का डाटा बेस तैयार किया था। इसके बाद देश भर में 60 हजार से ज्यादा फर्जी शिक्षकों का खुलासा हुआ था। प्रदेश सरकार इसे लागू करे तो यहां भी काफी फर्जी शिक्षक सामने आएंगे। 

क्या कहते हैं जिम्मेदार

आधार नंबर के साथ शिक्षकों का केंद्रीयकृत डाटा तैयार करने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया है। उन्होंने इसके लिए शासन को निर्देश दिया है, लेकिन अभी तक इस प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। विवि को इस फर्जीवाड़े से निपटने के लिए ठोस कदम उठाना चाहिए। 
जेपी सिंह
अध्यक्ष, उच्च शिक्षा उत्थान समिति


शिक्षकों के अनुमोदन में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए विवि गंभीरता से विचार कर रहा है। सत्र शुरू होने से पहले हम ऐसी व्यवस्था करेंगे जिससे कि शिक्षक अनुमोदन में होने वाले फर्जीवाड़े को स्थानीय रूप से समाप्त किया जा सके।
प्रो. एसपी सिंह
कुलपति, लविवि

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