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जिंदगी बचाने के लिए बसों-ट्रकों में भी हो सीट बेल्ट, मंत्रालय को भेजा गया प्रस्ताव
Sun, 11 Oct 2020 03:53 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2020 03:53 PM IST
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लखनऊ के विभूतिखंड स्थित सर्वेभ्यो फाउंडेशन की तरफ से हादसों में जान की क्षति रोकने के लिए बसों और ट्रकों में भी सीट बेल्ट लगवाने का प्रस्ताव बनाया गया है। फाउंडेशन के संस्थापक आलोक सिंह ने इस बाबत एक प्रस्ताव बनाकर सड़क व परिवहन मंत्रालय के मंत्री नितिन गडकरी को प्रस्ताव भेजा है। आलोक सिंह ने बताया कि बीते कुछ साल में बड़े यात्री व माल ढुलाई वाहनों के साथ बड़े हादसे हुए हैं। कई यात्री बसें दुर्घटनाग्रस्त हुईं, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की जान का नुकसान हुआ है।
बीते वर्ष आगरा एक्सप्रेस-वे पर रोडवेज की एक बस दुर्घटनाग्रस्त हुई थी, जिसमें कई यात्रियों की मौत हुई थी। बड़े वाहनों की सड़क दुर्घटना में जानमाल की क्षति न हो इसके लिए उन्होंने स्कूली व यात्री बसों, ट्रकों और अन्य भारी वाहनों में सीट बेल्ट लगवाने का प्रस्ताव बनाया है।
आलोक सिंह के मुताबिक, उन्होंने यात्री बसों के साथ हुए हादसों का गहराई से अध्ययन किया जो सामने आया कि हादसे में यात्रियों की अधिकतर मौतें सिर पर चोट की वजह से हुई हैं। सीट बेल्ट होने से इन मौतों पर अंकुश लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अपने सर्वेक्षण व अध्ययन के दौरान हादसों में जिंदगी बचाने वाले कई यात्रियों से भी संपर्क किया और उनके अनुभव जाने।
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सभी ने सिर पर चोट को बचाने की बात कही। आलोक सिंह ने बताया कि वह सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री से जुड़े हैं और टेक्नोक्रेट हैं। उन्होंने पूर्व में स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए मिशन भरोसा प्रोजेक्ट बनाया है जो उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में चल रहा है।
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बीते वर्ष आगरा एक्सप्रेस-वे पर रोडवेज की एक बस दुर्घटनाग्रस्त हुई थी, जिसमें कई यात्रियों की मौत हुई थी। बड़े वाहनों की सड़क दुर्घटना में जानमाल की क्षति न हो इसके लिए उन्होंने स्कूली व यात्री बसों, ट्रकों और अन्य भारी वाहनों में सीट बेल्ट लगवाने का प्रस्ताव बनाया है।
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आलोक सिंह के मुताबिक, उन्होंने यात्री बसों के साथ हुए हादसों का गहराई से अध्ययन किया जो सामने आया कि हादसे में यात्रियों की अधिकतर मौतें सिर पर चोट की वजह से हुई हैं। सीट बेल्ट होने से इन मौतों पर अंकुश लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अपने सर्वेक्षण व अध्ययन के दौरान हादसों में जिंदगी बचाने वाले कई यात्रियों से भी संपर्क किया और उनके अनुभव जाने।
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सभी ने सिर पर चोट को बचाने की बात कही। आलोक सिंह ने बताया कि वह सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री से जुड़े हैं और टेक्नोक्रेट हैं। उन्होंने पूर्व में स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए मिशन भरोसा प्रोजेक्ट बनाया है जो उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में चल रहा है।