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Lucknow News: शैवाल, कवक पर गहन शोध करें वैज्ञानिक
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एनबीआर में सोमवार को राष्ट्रीय सम्मेलन में मौजूद विशेषज्ञ।
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लखनऊ। राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान में सोमवार को शैवाल, कवक जैसे बिना फूल वाले पौधों पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ। मुख्य अतिथि गुलबर्गा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एसआर निरंजना ने शोध छात्रों व युवा वैज्ञानिकों को अपना काम और बेहतर ढंग से पेश करने व कौशल विकास के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शैवाल, कवक पर गहन शोध करें।
सम्मेलन में इंडियन लाइकेनोलॉजिकल सोसाइटी की ओर से भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण प्रयागराज के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. जीपी सिन्हा को डॉ. डीडी अवस्थी लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से नवाजा गया। साथ ही 10 वैज्ञानिकों को इंडियन लाइकेनोलॉजिकल सोसायटी की फेलोशिप दी गई।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. अनुपम दीक्षित, बीएचयू वाराणसी के प्रो. आरएन खरवार, डीयू के प्रो. पीएल उनियाल और सिलचर विश्वविद्यालय के प्रो. जॉयश्री रॉउत को ''''ऑनर ऑफ एप्रिसिएशन'''' पुरस्कार दिया गया। दो शोधार्थियों जयपुर के डॉ. केसी सैनी और प्रयागराज के डॉ. एस. मुथुकुमार को डॉ. डीके उप्रेती सर्वश्रेष्ठ पीएचडी थीसिस पुरस्कार दिया गया।
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एनबीआरआई के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. पीए शिर्के ने बताया कि एनबीआरआई के वैज्ञानिक अब तक अपुष्पी पादपों की 100 से अधिक नई प्रजातियों की खोज कर चुके हैं।
सम्मेलन में इंडियन लाइकेनोलॉजिकल सोसाइटी की ओर से भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण प्रयागराज के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. जीपी सिन्हा को डॉ. डीडी अवस्थी लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से नवाजा गया। साथ ही 10 वैज्ञानिकों को इंडियन लाइकेनोलॉजिकल सोसायटी की फेलोशिप दी गई।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. अनुपम दीक्षित, बीएचयू वाराणसी के प्रो. आरएन खरवार, डीयू के प्रो. पीएल उनियाल और सिलचर विश्वविद्यालय के प्रो. जॉयश्री रॉउत को ''''ऑनर ऑफ एप्रिसिएशन'''' पुरस्कार दिया गया। दो शोधार्थियों जयपुर के डॉ. केसी सैनी और प्रयागराज के डॉ. एस. मुथुकुमार को डॉ. डीके उप्रेती सर्वश्रेष्ठ पीएचडी थीसिस पुरस्कार दिया गया।
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एनबीआरआई के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. पीए शिर्के ने बताया कि एनबीआरआई के वैज्ञानिक अब तक अपुष्पी पादपों की 100 से अधिक नई प्रजातियों की खोज कर चुके हैं।