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लखनऊ के सरकारी अस्पतालों में दवाओं का संकट गहराया
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राजधानी के सरकारी अस्पतालों में दवाओं का संकट गहराता जा रहा है। कई जरूरी दवाएं न मिलने से मरीज बाहर से खरीदने को मजबूर हैं।
अस्पताल प्रभारियों का कहना है कि ड्रग कॉरपोरेशन से पर्याप्त मात्रा में दवाएं न मिलने से कुछ संकट है। दवाओं की मांग का पत्र भेजा गया है। जल्द ही राहत मिल जाएगी।
बलरामपुर, सिविल, लोकबंधु, बीआरडी महानगर और ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय समेत कई बड़े अस्पताल हैं। जहां रोजाना करीब आठ से दस हजार से ज्यादा मरीज आते हैं।
कोरोना की दूसरी लहर कमजोर पड़ने के बाद ओपीडी तो शुरू कर दी गई है, पर मरीजों को दवाएं नहीं मिल पा रही है। दमा रोगियों के लिए इनहेलर तक का संकट है। वहीं, कई एंटीबायोटिक, बीपी, कार्डियक, मनोरोग व यूरो संबंधी दवाओं का भी टोटा है।
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नगरीय स्वास्थ्य केंद्र की बुरी स्थिति, पोर्टल पर नहीं हुए लोड
नगरीय स्वास्थ्य केंद्रों में छह माह से एंटीबॉयोटिक, विटामिन, कैल्शियम समेत अन्य सामान्य दवाओं का टोटा है। क्योंकि ड्रग कॉरपोरेशन के पोर्टल पर इन केंद्रों को अपलोड नहीं किया गया है। जबकि पहले सीएमओ के जरिए यहां दवाएं भेजी जाती थीं। केंद्रों के प्रभारियों का कहना है कि दवाओं की डिमांड के साथ रिमांइडर भी भेजा जा रहा है, मगर दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। सबसे ज्यादा परेशानी महिला मरीजों को हो रही है।
लोकल पर्चेज बंद होने से बढ़ा संकट
सरकारी अस्पतालों में पहले परेशानी होने पर मरीजों को लोकल पर्चेज के जरिए दवाएं आसानी से मिल जाती थीं। हर अस्पताल का दो से तीन करोड़ का बजट लोकल पर्चेज के लिए मिलता था। अस्पताल अपने स्तर से भी दवाएं खरीदते थे। अब शासन ने अस्पतालों से दवाएं खरीदने का अधिकार छीन लिया है। ड्रग कॉरपोरेशन से सभी दवाओं की खरीद हो रही है।
इन दवाओं का है टोटा
एलकासाल - पेशाब संबंधी दवा
सेट्रालीन तनाव रोगियों के लिए
सेरिनेस तनाव रोगियों के लिए
सिफजीन - एंटीबॉयोटिक
मेटलॉर बीपी
एमलोडीपीन - बीपी
सारवीट्रेट कार्डियक
डाइटार - पेशाब बढ़ाने की दवा
दमा रोगियों के लिए इनहेलर
कुछ दवाओं का संकट
अस्पताल में कुछ दवाओं का संकट है। ड्रग कॉरपोरेशन से जो भी दवाएं मिल रही हैं, उनका वितरण कराया जा रहा है।
- डॉ. सुभाष, निदेशक, सिविल
कुछ दवाएं हैं कम
जो दवाएं अस्पताल में हैं उनका वितरण मरीजों को हो रहा है। कुछ दवाएं कम हैं तो उनकी जगह दूसरी दवाएं दी जा रही है।
- डॉ. आरके गुप्ता, सीएमएस बलरामपुर अस्पताल
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अस्पताल प्रभारियों का कहना है कि ड्रग कॉरपोरेशन से पर्याप्त मात्रा में दवाएं न मिलने से कुछ संकट है। दवाओं की मांग का पत्र भेजा गया है। जल्द ही राहत मिल जाएगी।
बलरामपुर, सिविल, लोकबंधु, बीआरडी महानगर और ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय समेत कई बड़े अस्पताल हैं। जहां रोजाना करीब आठ से दस हजार से ज्यादा मरीज आते हैं।
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कोरोना की दूसरी लहर कमजोर पड़ने के बाद ओपीडी तो शुरू कर दी गई है, पर मरीजों को दवाएं नहीं मिल पा रही है। दमा रोगियों के लिए इनहेलर तक का संकट है। वहीं, कई एंटीबायोटिक, बीपी, कार्डियक, मनोरोग व यूरो संबंधी दवाओं का भी टोटा है।
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नगरीय स्वास्थ्य केंद्र की बुरी स्थिति, पोर्टल पर नहीं हुए लोड
नगरीय स्वास्थ्य केंद्रों में छह माह से एंटीबॉयोटिक, विटामिन, कैल्शियम समेत अन्य सामान्य दवाओं का टोटा है। क्योंकि ड्रग कॉरपोरेशन के पोर्टल पर इन केंद्रों को अपलोड नहीं किया गया है। जबकि पहले सीएमओ के जरिए यहां दवाएं भेजी जाती थीं। केंद्रों के प्रभारियों का कहना है कि दवाओं की डिमांड के साथ रिमांइडर भी भेजा जा रहा है, मगर दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। सबसे ज्यादा परेशानी महिला मरीजों को हो रही है।
लोकल पर्चेज बंद होने से बढ़ा संकट
सरकारी अस्पतालों में पहले परेशानी होने पर मरीजों को लोकल पर्चेज के जरिए दवाएं आसानी से मिल जाती थीं। हर अस्पताल का दो से तीन करोड़ का बजट लोकल पर्चेज के लिए मिलता था। अस्पताल अपने स्तर से भी दवाएं खरीदते थे। अब शासन ने अस्पतालों से दवाएं खरीदने का अधिकार छीन लिया है। ड्रग कॉरपोरेशन से सभी दवाओं की खरीद हो रही है।
इन दवाओं का है टोटा
एलकासाल - पेशाब संबंधी दवा
सेट्रालीन तनाव रोगियों के लिए
सेरिनेस तनाव रोगियों के लिए
सिफजीन - एंटीबॉयोटिक
मेटलॉर बीपी
एमलोडीपीन - बीपी
सारवीट्रेट कार्डियक
डाइटार - पेशाब बढ़ाने की दवा
दमा रोगियों के लिए इनहेलर
कुछ दवाओं का संकट
अस्पताल में कुछ दवाओं का संकट है। ड्रग कॉरपोरेशन से जो भी दवाएं मिल रही हैं, उनका वितरण कराया जा रहा है।
- डॉ. सुभाष, निदेशक, सिविल
कुछ दवाएं हैं कम
जो दवाएं अस्पताल में हैं उनका वितरण मरीजों को हो रहा है। कुछ दवाएं कम हैं तो उनकी जगह दूसरी दवाएं दी जा रही है।
- डॉ. आरके गुप्ता, सीएमएस बलरामपुर अस्पताल