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राजधानी के चिकित्सा संस्थानों के ब्लड बैंकों में महज एक तिहाई स्टॉक ही बचा, सर्जरी शुरू होने से और बढ़ेगी मांग तो गहराएगी समस्या
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राजधानी के चिकित्सा संस्थानों में गहराया खून का संकट।
- फोटो : ??? ?????
राजधानी के ब्लड बैंक कोरोना की पहली लहर से उबर भी नहीं पाए थे कि दूसरी लहर ने हालत और भी पतली कर दी है।
डॉक्टरों का कहना है कि एक तरफ जहां कोरोना पॉजिटिव व वैक्सीन लगवाने की वजह से मरीज के तीमारदार चाह कर भी खून डोनेट नहीं कर पा रहे हैं।
वहीं, मार्च से कोई डोनेशन कैंप न लगने और डिमांड बढ़ने से ब्लड बैंकों में स्टॉक एक तिहाई ही बचा है। वहीं, अब सरकारी अस्पताल व संस्थानों में ओपीडी शुरू होने संग सर्जरी की तारीख दी जाना शुरू हो गई हैं।
इसे लेकर ब्लड बैंक प्रभारी चिंतित हैं। सबसे बड़ी मुसीबत निगेटिव ग्रुप के मरीजों के सामने है। केजीएमयू से लेकर पीजीआई तक निगेटिव ग्रुप स्टॉक से गायब हो चुका है।
केजीएमयू से निगेटिव के चारों ग्रुप गायब
केजीएमयू ब्लड बैंक में आमतौर पर तीन हजार यूनिट खून हर वक्त रहता था। कोरोना संकट में डोनेशन न होने से अब महज 700 यूनिट खून ही बचा है। ब्लड बैंक से रोज करीब 100 यूनिट खून मरीजों को दिया जाता है। इसमें दस प्रतिशत लोग डोनेशन नहीं कर पाते हैं। ऐसे में ब्लड बैंक में खून का संकट गहराता जा रहा है। निगेटिव के चारों ग्रुप गायब हो चुके हैं। ऐसे में निगेटिव ग्रुप के मरीजों के तीमारदार निजी ब्लड बैंक की दौड़ाने को मजबूर हैं। ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि कोविड मरीजों को बिना डोनेशन खून दिया जा रहा है। अभी अमूमन सभी ग्रुप का स्टॉक है, पर डोनेशन न आने से यह संकट आगे बढ़ जाएगा।
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लोहिया संस्थान में महज 225 यूनिट
लोहिया संस्थान के ब्लड बैंक में इन दिनों महज 225 यूनिट खून ही बचा है। कोविड से पहले यहां स्टॉक करीब हजार यूनिट तक रहता था। संस्थान में कई नेगेटिव ग्रुप भी नहीं मिल पे रहे हैं। ऐसे में तीमारदार निजी ब्लड बैंक के चक्कर लगा रहे हैं। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. वीके शर्मा के मुताबिक, अभी स्टॉक थोड़ा कम है। सर्जरी शुरू होने के बाद खून की मांग और बढ़ने से डोनेशन न होने से आगे संकट खड़ा हो सकता है।
पीजीआई में तीन सौ यूनिट, निगेटिव ग्रुप गायब
पीजीआई ब्लड बैंक में निगेटिव ग्रुप का संकट गहराया है। ब्लड बैंक में एक तिहाई खून का स्टॉक ही शेष है। ब्लड बैंक प्रभारी प्रो. अनुपम वर्मा के मुताबिक, स्टॉक कम होने संग निगेटिव ग्रुप नहीं है। सर्जरी शुरू होने पर कुछ दिक्कत बढ़ सकती है। फिलहाल कैंप लगवाने का काम शुरू कराया जाएगा।
बलरामपुर में 45 यूनिट, निगेटिव ग्रुप कोई नहीं
बलरामपुर अस्पताल में महज 45 यूनिट खून ही बचा है। इसमें कई पॉजिटिव व निगेटिव सभी ग्रुप गायब हैं। ऐसे में मरीजों को निराश होकर दूसरे संस्थान जाना पड़ रहा है। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. अरविंद शर्मा के मुताबिक, ए और एबी निगेटिव ग्रुप गायब है। उधर, सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में अकाल पड़ा है। वहां पर महज 15 यूनिट खून बचा हुआ है। निगेटिव के सभी ग्रुप गायब हैं।
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डॉक्टरों का कहना है कि एक तरफ जहां कोरोना पॉजिटिव व वैक्सीन लगवाने की वजह से मरीज के तीमारदार चाह कर भी खून डोनेट नहीं कर पा रहे हैं।
वहीं, मार्च से कोई डोनेशन कैंप न लगने और डिमांड बढ़ने से ब्लड बैंकों में स्टॉक एक तिहाई ही बचा है। वहीं, अब सरकारी अस्पताल व संस्थानों में ओपीडी शुरू होने संग सर्जरी की तारीख दी जाना शुरू हो गई हैं।
इसे लेकर ब्लड बैंक प्रभारी चिंतित हैं। सबसे बड़ी मुसीबत निगेटिव ग्रुप के मरीजों के सामने है। केजीएमयू से लेकर पीजीआई तक निगेटिव ग्रुप स्टॉक से गायब हो चुका है।
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केजीएमयू से निगेटिव के चारों ग्रुप गायब
केजीएमयू ब्लड बैंक में आमतौर पर तीन हजार यूनिट खून हर वक्त रहता था। कोरोना संकट में डोनेशन न होने से अब महज 700 यूनिट खून ही बचा है। ब्लड बैंक से रोज करीब 100 यूनिट खून मरीजों को दिया जाता है। इसमें दस प्रतिशत लोग डोनेशन नहीं कर पाते हैं। ऐसे में ब्लड बैंक में खून का संकट गहराता जा रहा है। निगेटिव के चारों ग्रुप गायब हो चुके हैं। ऐसे में निगेटिव ग्रुप के मरीजों के तीमारदार निजी ब्लड बैंक की दौड़ाने को मजबूर हैं। ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि कोविड मरीजों को बिना डोनेशन खून दिया जा रहा है। अभी अमूमन सभी ग्रुप का स्टॉक है, पर डोनेशन न आने से यह संकट आगे बढ़ जाएगा।
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लोहिया संस्थान में महज 225 यूनिट
लोहिया संस्थान के ब्लड बैंक में इन दिनों महज 225 यूनिट खून ही बचा है। कोविड से पहले यहां स्टॉक करीब हजार यूनिट तक रहता था। संस्थान में कई नेगेटिव ग्रुप भी नहीं मिल पे रहे हैं। ऐसे में तीमारदार निजी ब्लड बैंक के चक्कर लगा रहे हैं। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. वीके शर्मा के मुताबिक, अभी स्टॉक थोड़ा कम है। सर्जरी शुरू होने के बाद खून की मांग और बढ़ने से डोनेशन न होने से आगे संकट खड़ा हो सकता है।
पीजीआई में तीन सौ यूनिट, निगेटिव ग्रुप गायब
पीजीआई ब्लड बैंक में निगेटिव ग्रुप का संकट गहराया है। ब्लड बैंक में एक तिहाई खून का स्टॉक ही शेष है। ब्लड बैंक प्रभारी प्रो. अनुपम वर्मा के मुताबिक, स्टॉक कम होने संग निगेटिव ग्रुप नहीं है। सर्जरी शुरू होने पर कुछ दिक्कत बढ़ सकती है। फिलहाल कैंप लगवाने का काम शुरू कराया जाएगा।
बलरामपुर में 45 यूनिट, निगेटिव ग्रुप कोई नहीं
बलरामपुर अस्पताल में महज 45 यूनिट खून ही बचा है। इसमें कई पॉजिटिव व निगेटिव सभी ग्रुप गायब हैं। ऐसे में मरीजों को निराश होकर दूसरे संस्थान जाना पड़ रहा है। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. अरविंद शर्मा के मुताबिक, ए और एबी निगेटिव ग्रुप गायब है। उधर, सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में अकाल पड़ा है। वहां पर महज 15 यूनिट खून बचा हुआ है। निगेटिव के सभी ग्रुप गायब हैं।