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बस्ती में करोड़ों का घपला : जांच में सामने आ रहे बजट हड़पने के नए-नए तरीके

Tue, 18 Jun 2019 11:03 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Tue, 18 Jun 2019 11:03 PM IST
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scam of worth crores in basti : new methods revealed to capture funds
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
बस्ती में तीन सौ से ज्यादा सड़कों के निर्माण में परत दर परत घपले सामने आ रहे हैं। तमाम सड़कों पर स्वीकृत राशि से ज्यादा धन खर्च कर दिया गया, फिर भी सड़कें अधूरी हैं। बड़े पैमाने पर शासन की बिना किसी अनुमति के भी तमाम सड़कों पर राशि खर्च दिखा दी गई है। इसे सरकारी बजट को हजम करने की साजिश माना जा रहा है।
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मामले की जांच प्रमुख अभियंता, ग्रामीण सड़क आरसी बरनवाल को सौंपी गई है। इस घपले के दायरे में एक-एक एसई व एक्सईएन, दो एई और 17 जेई हैं। इन सभी की भूमिका की अलग-अलग जांच की जा रही है। 
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जांच में सामने आया है कि रामजानकी मार्ग के किलोमीटर 8.9 के दाएं से भरोटी पांडे मार्ग के लिए जितनी राशि स्वीकृत की गई थी, उससे ज्यादा खर्च कर दी गई। यह ज्यादा राशि दूसरे मद से बिना किसी नियम-कायदे के ट्रांसफर की गई थी। 
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इसके बावजूद सड़क पूरी नहीं हुई। यही स्थिति जोगिया तालाब से बैदोलिया हियारूपुर लाला टोला मार्ग, लोहिया भारी से डैफरी मार्ग, रामजानकारी मार्ग से मनोवा संपर्क मार्ग और सिकंदरपुर-मसकनवा मार्ग समेत करीब 80 मार्गों पर मिली है।

इतना ही नहीं करीब 40 मार्ग ऐसे मिले हैं, जिनके निर्माण के लिए मुख्यालय या शासन स्तर से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। चूंकि कोई भी नई सड़क बिना शासन की अनुमति के नहीं बनाई जा सकती है, इसलिए उस पर खर्च की गई कोई भी राशि सीधे-सीधे सरकारी धन को हड़पना है। 

यहां बता दें कि वर्ष 2017-18 और 2018-19 में बस्ती में 300 से ज्यादा सड़कों के निर्माण के लिए राशि दी गई थी। जब मौके पर काम नहीं हुआ तो स्थानीय विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों ने इसकी शिकायत उच्चस्तर पर की। 

प्रारंभिक जांच में ये गड़बड़ियां बस्ती के प्रांतीय खंड, पीडब्ल्यूडी के अधीन आने वाले क्षेत्र में मिलीं। मुख्यालय ने अधीक्षण अभियंता शशि भूषण की अध्यक्षता में गठित एक कमेटी से जांच कराई। इस कमेटी ने अपनी जांच में 40 करोड़ रुपये का फंड डायवर्जन (एक मद का दूसरे मद में खर्च करना) बताया। साथ ही इस राशि के एक बड़े हिस्से के गबन की आशंका भी जताई।

अब इस मामले की गहन जांच प्रमुख अभियंता, ग्रामीण सड़क आरसी बरनवाल को सौंपी गई है। सभी आरोपित इंजीनियरों को आरोप पत्र भी दिए जा रहे हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में आरोप पत्रों के जवाब मिलने के बाद ‘वृहद दंड’ के नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई होना तय है। इस कार्रवाई के माध्यम से सरकार एक संदेश भी देना चाहती है कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात सिर्फ हवाहवाई नहीं है। 
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