अल्पसंख्यक योजनाओं में संशोधित लागत के नाम पर 150 करोड़ का खेल, कई अफसरों पर कार्रवाई की तैयारी
प्रदेश में अल्पसंख्यकों के लिए चलाई जा रही योजनाओं में संशोधित आकलन (रिवाइज्ड एस्टीमेट) के नाम पर करीब 150 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। योजनाओंं के लिए निर्माण कार्य जल निगम के कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडीएस) को दिए गए थे।
लेकिन समय से भुगतान होने के बावजूद काम अधूरा है। इस मामले में गोपनीय ढंग से दोषी अधिकारियों को चिह्नित किया जा रहा है। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय है। यही स्थिति गोमती रिवर फ्रंट परियोजना में थी, जिसकी सरकार सीबीआई जांच करवा रही है।
सपा-बसपा शासन में अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, पॉलीटेक्निक, आंगनबाड़ी व जूनियर हाईस्कूल के भवन बनाने और पेयजल की व्यवस्था के लिए सीएंडडीएस को 900 करोड़ रुपये के काम दिए गए थे। इनमें से अधिकांश काम अभी भी अधूरे हैं।
सीएंडडीएस ने रिवाइज्ड एस्टीमेट मंजूर होने पर ही काम पूरा करने की बात कही। उसका कहना है कि समय से धनराशि न मिलने के कारण लागत बढ़ गई।
कमीशन के खेल में अधूरे पड़े हैं काम
वित्त नियंत्रक, अल्पसंख्यक कल्याण विनय श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली कमेटी ने रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। इसमें कहा गया है कि 300 करोड़ रुपये लागत की परियोजनाएं ऐसी हैं, जिनमें समय से राशि जारी की गई थी। इनमें बजट मिलने में देरी के तर्क को जायज नहीं ठहराया जा सकता।
देरी के लिए सीएंडडीएस के इंजीनियर और अधिकारी जिम्मेदार हैं। समय से 300 करोड़ रुपये दिए जाने के बावजूद अब उन कामों को पूरा करने के लिए 150 करोड़ रुपये और मांगे जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि तमाम परियोजनाएं के बीच में ही सीएंडडीएस के इंजीनियर बदल दिए गए। कमीशन के खेल में उन्होंने समय से काम पूरा करने में कोई रुचि नहीं ली, बल्कि रिवाइज्ड एस्टीमेट भेजकर अधिक धनराशि ऐंठने के फेर में फंसे रहे।
कठोर कार्रवाई का निर्णय
प्रदेश सरकार ने निर्माण कार्यों में देरी के लिए जिम्मेदार इंजीनियरों और अधिकारियों को चिह्नित करने के आदेश दिए हैं। इन सभी मामलों में उच्चस्तर से दोषी कार्मिकों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे, बर्खास्तगी, अनिवार्य सेवानिवृत्ति और रिकवरी की कार्यवाही का निर्णय लिया गया है।