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भाजपा को झटका : सावित्री बाई फुले ने छोड़ा कमल का साथ, थामा कांग्रेस का हाथ
Sun, 03 Mar 2019 06:26 AM IST
Avdhesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Sun, 03 Mar 2019 06:26 AM IST
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सावित्री बाई फुले ने कांग्रेस से हाथ मिलाया
- फोटो : amar ujala
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भाजपा की सांसद सावित्री बाई फुले ने कमल का साथ छोड़कर, कांग्रेस का हाथ थाम लिया लिया है। उन्होंने दिल्ली में शनिवार को कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर ली। इस दौरान उनके साथ पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी, उत्तर प्रदेश पूर्वी क्षेत्र की सचिव प्रियंका गांधी व उत्तर प्रदेश पश्चिम क्षेत्र के सचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया मौजूद थे। सावित्री बाई फुले बहराइच से भाजपा की सांसद हैं। उनके साथ राकेश सचान ने भी समाजवादी पार्टी छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल हो गए।
फुले ने कहा कि बीजेपी की नीतियां दलित विरोधी हैं, इसके चलते देश के पिछड़े, दलित व मुस्लिम लोगों ने भाजपा को हटाने का फैसला किया है। उसे कांग्रेस ही रोक सकती है इसलिए मैंने कांग्रेस का साथ देने का फैसला किया है। पिछले साल दिसंबर में फुले ने सामाज को बांटने का आरोप लगाते हुए भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि दलित सांसद होने की वजह से पार्टी में कभी उनकी बात नहीं सुनी गई।
वहीं राकेश सचान ने बताया कि समाजवादी पार्टी में उनकी अनदेखी होने लगी थी। इस वजह से उन्होंने कांग्रस को चुना। यह भी कहा कि जब तक सपा की कमान नेता जी के हाथों में थी जमीनी लोगों का सम्मान होता था लेकिन उसके बाद सब कुछ बदल गया।
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फुले ने कहा कि बीजेपी की नीतियां दलित विरोधी हैं, इसके चलते देश के पिछड़े, दलित व मुस्लिम लोगों ने भाजपा को हटाने का फैसला किया है। उसे कांग्रेस ही रोक सकती है इसलिए मैंने कांग्रेस का साथ देने का फैसला किया है। पिछले साल दिसंबर में फुले ने सामाज को बांटने का आरोप लगाते हुए भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि दलित सांसद होने की वजह से पार्टी में कभी उनकी बात नहीं सुनी गई।
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वहीं राकेश सचान ने बताया कि समाजवादी पार्टी में उनकी अनदेखी होने लगी थी। इस वजह से उन्होंने कांग्रस को चुना। यह भी कहा कि जब तक सपा की कमान नेता जी के हाथों में थी जमीनी लोगों का सम्मान होता था लेकिन उसके बाद सब कुछ बदल गया।
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