फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Sarangi magician Pt Vinod Mishra is no more

नहीं रहे सारंगी के जादूगर पं. विनोद मिश्रा, करीबियों का भातखंडे प्रशासन पर प्रताड़ना का आरोप 

Fri, 24 Jan 2020 01:52 AM IST
दुष्यंत शर्मा माई सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 24 Jan 2020 01:52 AM IST
विज्ञापन
Sarangi magician Pt Vinod Mishra is no more
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media

नगर के सांस्कृतिक मंचों पर सारंगी वादन का जादू बिखेरने वाले वरिष्ठ सारंगी वादक पं. विनोद मिश्र नहीं रहे। बीती नौ जनवरी को बीमार होने के बाद ब्रेन हैमरेज से जूझ रहे पं. विनोद मिश्र ने बुधवार देर रात अंतिम सांस ली। वह करीब 60 वर्ष के थे। बृहस्पतिवार दोपहर बाद उनका अंतिम संस्कार बैकुंठधाम पर किया गया। पुत्र महेंद्र मिश्र ने उन्हें मुखाग्नि दी। 

विज्ञापन


अंतिम संस्कार के मौके पर पं विनोद के भाई तबलावादक पं प्रमोद मिश्र, तबला वादक पं. रविनाथ मिश्र, उस्ताद युगांतर सिंदूर, पं धर्मनाथ मिश्र समेत कई साथी संगीत शिक्षक मौजूद रहे। परिवार में पत्नी के अलावा पुत्र महेंद्र, पुत्री नम्रता और पुत्री प्रीति मिश्रा हैं। बीमार होने के बाद शुरुआती इलाज निजी अस्पताल से हुआ। बीते कुछ दिनों से पीजीअीई मे भर्ती थे। इलाज के दौरान करीबी और कलाकार उनके लिये आर्थिक मदद का अभियान भी चला रहे थे। 
विज्ञापन


12 की उम्र से शुरू किया था वादन
नगर के युवा सारंगी वादक हयात हुसैन खां ने कहा कि सारंगी वादन में वे उनके गुरु थे। नगर के दिग्गज मृदंगाचार्य पं. राज खुशीराम ने कहा कि उनके जैसा सारंगी वादक प्रदेश में कोई दूसरा नहीं है। बनारस घराने के संगीतज्ञ पं विनोद ने दिग्गज कथक कलाकारों के अलावा मौजूदा पीढ़ी तक संगत की। 10-12 साल की उम्र में बजाना शुरू किया था। शास्त्रीय गायन भी सीखा, सारंगी बजाना अपने पिता पं भगवान दास मिश्र से सीखा था। दिग्गज कथक नृत्यांगना सुरभि सिंह ने कहा कि वे इस बात से आहत हैं कि जिस भातखंडे विवि से वे दशकों तक जुड़े रहे, वहां सेवा के अंतिम वर्षों में उनके साथ शोषण हुआ। 
विज्ञापन
विज्ञापन


अनिवार्य सेवानिवृत्ति के बाद से ही थे परेशान 
पं. विनोद मिश्र लंबे समय से भातखंडे संगीत विवि में सारंगी संगतकर्ता पद पर रहे। उनकी बेटी प्रीति ने बताया कि अप्रैल 2019 में भातखंडे प्रशासन ने पिता को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी थी। उसके बाद से ही वे परेशान रहने लगे थे। बकाया भुगतान के लिए भी दौड़भाग करनी पड़ रही थी। मौत से दो दिन पहले वे कोमा में जा चुके थे। 

निधन के बाद बृहस्पतिवार शाम को कथक गुरु पं. अनुज मिश्र, कथक नृत्यांगना सुरभि सिंह, उस्ताद इलियास खान, संगीत शिक्षिका शहनाज, एसके गोपाल, दबीर सिद्दकी, विकास श्रीवास्तव, अनिल मिश्र गुरु, डॉ. नवीन मिश्र, कंवलजीत समेत तमाम कला जगत के लोगों ने भातखंडे गेट पर उनके लिए न्याय की आवाज उठाई और दीपदान कर श्रद्धांजलि दी। परिवारीजनों और परिचितों ने रात को कई मांगों को लेकर डीएम कार्यालय पर ज्ञापन दिया। उन्होंने उनसे काफी कुछ सीखा, हर बड़ा कलाकार जब लखनऊ आता सबसे पहले उन्हें ही साथ के लिये खोजता था। 

परिवारीजनों का कहना है कि वे पूरे मामले को मुख्यमंत्री और राज्यपाल के सामने भी रखेंगे। सोशल मीडिया पर उन्हें न्याय दिलाने के लिए अभियान भी चलाया गया। भातखंडे कुलपति प्रो. श्रुति सडोलीकर काटकर ने फोन पर बातचीत में बताया कि  वे शहर से बाहर हैं। लौटने पर 27 जनवरी को प्रेस वार्ता कर पक्ष रखेंगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed