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Lucknow: माफिया मुख्तार के जरिये ही नगालैंड में बना था संदीप का लाइसेंस, बिचौलियों का भी पता कर रही पुलिस

Tue, 04 Jul 2023 10:25 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 04 Jul 2023 10:25 AM IST
सार

एसटीएफ ने सपा विधायक के साले संदीप सिंह को अवैध शस्त्र लाइसेंस के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उसका शस्त्र लाइसेंस बनवाने में माफिया मुख्तार अंसारी की भूमिका सामने आई है।

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Sandeep Singh's weapon licence was made in Nagaland with the help of Mafia Mukhtar Ansari.
मुख्तार अंसारी। - फोटो : amar ujala

विस्तार

सपा विधायक अभय सिंह के साले संदीप सिंह के अवैध शस्त्र प्रकरण के बारे में अहम खुलासा हुआ है। माफिया मुख्तार अंसारी ने ही अपने गुर्गे के जरिये संदीप का लाइसेंस बनवाया था। ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया भी इसी गिरोह ने कराई थी। यही वजह है कि लाइसेंस मुख्तार के पते पर ट्रांसफर हुआ था। जांच में ये खुलासा हुआ है।

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एसटीएफ ने संदीप सिंह को अवैध शस्त्र लाइसेंस मामले में गिरफ्तार किया था। एसटीएफ ने खुलासा किया था कि संदीप का जो राइफल का लाइसेंस है वह नगालैंड से फर्जी बनवाया गया। जिसे मुख्तार के पते पर ट्रांसफर कराया गया। अयोध्या से बनवाए गए पिस्टल लाइसेंस में आपराधिक इतिहास छिपाया गया। विभूतिखंड थाने में एसटीएफ ने एफआईआर दर्ज कराई थी। सूत्रों के मुताबिक तफ्तीश में सामने आया कि मुख्तार अंसारी के गिरोह का नेटवर्क नगालैंड में था। उसी नेटवर्क के जरिये मुख्तार ने संदीप का लाइसेंस बनवाया था। इसमें कौन कौन से बिचौलिए रहे, अब उनके बारे में जांच टीम पता कर रही है।
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खुद कुबूला पूरा मामला
गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ ने संदीप से गहनता से पूछताछ की थी फिर वह जेल भेजा गया था। पुलिस ने जब विवेचना शुरू की तो कोर्ट की अनुमति लेकर जेल में जाकर उससे पूछताछ की। कस्टडी रिमांड पर भी लिया था। सूत्रों के मुताबिक संदीप ने पूछताछ में खुद कुबूला था कि मुख्तार से उसका संपर्क था। लाइसेंस बनवाने से लेकर ट्रांसफर करवाने में उसी की भूमिका रही। इसमें पुलिस और प्रशासन के संबंधित लोगों ने भी साथ दिया। इसलिए सत्यापन कराने और नवीनीकरण में कभी कोई दिक्कत नहीं आई।

कइयों की भूमिका आई सामने, कसेगा शिकंजा
जिस तरह से संदीप सिंह के अवैध शस्त्र लाइसेंस में ट्रांसफर कराने से लेकर नवीनीकरण की प्रकिया की गई, उसमें सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत की पूरी आशंका थी। सूत्रों के मुताबिक असलहा विभाग में तैनात रहे कुछ कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं। वहीं पुलिस रिपोर्ट लगाने में कुछ पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध है। पुलिस एक तरह अपनी विवेचना कर ही रही है वहीं दूसरी तरफ एसटीएफ अपने स्तर से तफ्तीश जारी किए है। जल्द बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

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