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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Samajwadi Party review meeting on defeat in UP Vidhansabha Election 2022.

Review meeting of SP: यूपी विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण में देरी बनी सपा की हार की बड़ी वजह

Sun, 05 Jun 2022 04:03 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 05 Jun 2022 04:03 PM IST
सार

सपा ने विधानसभा क्षेत्रवार हार के कारणों की समीक्षा की और कई बिंदुओं पर चर्चा की। तय किया गया कि अब टिकट के लिए आवेदन नहीं मांगे जाएंगे। हाई कमान सीधे प्रत्याशी तय करेगा।

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Samajwadi Party review meeting on defeat in UP Vidhansabha Election 2022.
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala

विस्तार

सपा ने शनिवार को विधानसभा चुनाव में मिली हार के कारणों की समीक्षा की और हारने वाले पार्टी प्रत्याशियों से फीडबैक लिया। एक एजेंसी की सर्वे रिपोर्ट भी पेश की गई। पार्टी ने स्वीकार किया कि टिकट वितरण में देरी, मतदाता सूची में गड़बड़ी, तालमेल का अभाव व लचर रणनीति की वजह से विधानसभा में कई सीटों पर पार्टी प्रत्याशी मामूली अंतर से हारे। तय किया गया कि नई रणनीति से 2024 के लोकसभा और 2027 के विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा। अभी से जनता के बीच रह कर संघर्ष करने वालों को 2027 में मौका दिया जाएगा। अब टिकट के लिए आवेदन नहीं मांगे जाएंगे। हाई कमान सीधे प्रत्याशी तय करेगा।

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पार्टी कार्यालय में हारे प्रत्याशियों, प्रकोष्ठों के राष्ट्रीय व प्रदेश अध्यक्षों, कुछ जिलों के जिलाध्यक्षों की मौजूदगी में हुई बैठक में हर पहलू पर चर्चा हुई। सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को कई प्रत्याशियों ने बताया कि उन्हें ऐन मौके पर टिकट दिया गया, जिससे समस्या हुई।
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इस पर अखिलेश ने कहा कि अब भविष्य में होने वाले लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में आवेदन के बजाय नियमित तौर पर जनता के बीच रहने वालों को मैदान में उतारा जाएगा। हारे प्रत्याशियों ने बताया कि जिला प्रशासन ने कई विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव परिणामों को प्रभावित किया। मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां कराई गईं। तमाम मतदाताओं के नाम गायब थे।

कई बूथों पर पीठासीन अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध रही। इस पर राष्ट्रीय अध्यक्ष ने निर्देश दिया कि हर विधानसभा क्षेत्र से नियम विरुद्ध नाम कटने वालों का हलफनामा बनवाया जाए और जनहित याचिका दायर की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी नाम कटने वालों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन तमाम लोग अभी तक सूची नहीं दिए हैं।

बढ़े वोट प्रतिशत को बनाए रखने की जरूरत

बैठक में तय किया गया कि विधानसभा चुनाव में मिले वोटबैंक को बचाए रखने के लिए हर स्तर पर सतर्कता बरतते हुए इस ग्राफ को बढ़ाया जाएगा। तय किया गया कि विधानसभा 2022 के चुनाव में जो कमियां दिखीं उनसे सबक लिया जाएगा। आगे से मतदान के प्रति जागरूकता फैलाते हुए मतदान प्रतिशत बढ़ाने का प्रयास होगा। संगठन को मजबूती देने तथा बूथ स्तर पर चिह्नित करके वोट बढ़ाने पर विशेष बल दिया जाएगा।

300 सीटों के पेश किए गए आंकड़े
बैठक के दौरान सर्वे एजेंसी ने 300 सीटों पर अपनी रिपोर्ट दी। इसमें बताया गया कि 65 विधानसभा क्षेत्रों के तमाम बूथ ऐसे हैं, जहां सपा को भाजपा से एक या दो वोट कम मिले हैं। यदि संबंधित बूथ पर नाम न कटे होते तो वहां सपा प्रत्याशी की जीत थी। एजेंसी ने मतदाताओं को पार्टी के पक्ष में जागरूक करने में हुई देरी को भी हार की वजह बताया।

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