यूपी चुनाव 2022: पूर्वांचल और बुंदेलखंड को नए सिरे से साध रही सपा, दोनों इलाको के लिए बन रही अलग-अलग रणनीति
सपा के रणनीतिकार पूर्वांचल को अपने लिए सबसे ज्यादा उपजाऊ मान रहे हैं। रविवार को बाहुबली हरिशंकर तिवारी का परिवार भी सपा में शमिल हो गया है। सपा इनके सहारे पूरे इलाके में माहौल बनाने की तैयारी में है।
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सपा पूर्वांचल और बुंदेलखंड को नए सिरे से साध रही है। उसका लक्ष्य है कि यहां से ज्यादा से ज्यादा सीटें जीती जाएं। यह दोनों क्षेत्र उसके लिए सत्ता के द्वार साबित होंगे। वह पूरब में हाते की हवा और बुंदेलखंड में पाठे की प्यास को सियासी पतवार बना रही है। दोनों इलाके के लिए अलग-अलग एजेंडा और रणनीति तैयार की जा रही है।
पार्टी के रणनीतिकार पूर्वांचल को अपने लिए उपजाऊ मान रहे हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में लगातार राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सक्रिय हैं। गोरखपुर से सिद्धार्थनगर और फिर गाजीपुर से लखनऊ तक विजय रथयात्रा निकाल चुके हैं। पूर्वांचल के अन्य जिलों में भी यात्रा निकाल कर विभिन्न जातीय संगठनों को जोड़ चुके हैं।
रविवार को बाहुबली हरिशंकर तिवारी का परिवार भी सपा में शमिल हो गया है। उनके साथ भाजपा विधायक जय चौबे सहित तमाम ब्राह्मण नेता सपा में शामिल हुए हैं। ऐसे में सपा को तिवारी हाते से चली हवा पूरे प्रदेश में फैलने की उम्मीद है। फिलहाल सपा में पहले से कई ब्राह्मण नेता मौजूद हैं, लेकिन इस परिवार के साथ सभी की एकजुटता समान रूप से दिखी।
अब यह परिवार ब्राह्मण चेहरे के रूप में पूरे प्रदेश में फिजा बनाएगा। सपा कार्यालय के बाहर तमाम ऐसे बोर्ड भी लगाए गए, जिसमें लिखा था कि तिवारी हाता अब सपा के साथ है। इसी तरह पूर्वांचल के जिलों में विधानसभा क्षेत्र में जातीय बहुलता को ध्यान में रखकर संबंधित जाति के नेता को विधानसभा क्षेत्र की समीक्षा में लगाया गया है। ताकि वह ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ सके।
जल, जंगल और जमीन के साथ दलित व मजदूरों की भी बात
अब बात करते हैं बुंदेलखंड की। इस इलाके में जल, जंगल और जमीन के साथ दलितों, मजदूरों को लेकर संघर्ष करने वाले संगठनों को लगातार सपा में शामिल किया जा रहा है। सपा यहां की बेरोजगारी के साथ पानी और सिंचाई का मुद्दा भी उठा रही है। पाठा क्षेत्र में लंबे समय से अधूरी चल रही पेयजल परियोजनाओं का मुद्दा उठाया जा रहा है। सपा शासन में किए गए बांधों के निर्माण से लेकर राहत पैकेट तक को अपनी उपलब्धि में गिनाया जा रहा है। इस इलाके में बनने वाले एक्सप्रेसवे और अन्य अधूरी परियोजनाओं का मुद्दा भी उठाया जा रहा है।
दोनों इलाकों के खास मुद्दों पर फोकस
सूत्रों का कहना है कि पार्टी के घोषणा पत्र में पूर्वांचल और बुंदेलखंड की समस्याओं को लेकर अलग-अलग मुद्दे शामिल किए जाएंगे। दोनों इलाकों के वरिष्ठ नेताओं को यहां के मुद्दों का प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। यही वजह है कि पूर्वांचल के साथ बुंदेलखंड के ब्राह्मण नेताओं को भी पार्टी की सदस्यता दिलाई गई है।
पूर्वांचल में लघु एवं सीमांत किसानों, बेरोजगारी को मुख्य मुद्दा बनाया जा रहा है, वहीं बुंदेलखंड में अन्ना पशु, पानी, सिंचाई , मंडी और राहत पैकेट जैसे मुद्दे अहम माने जा रहे हैं। इन दोनों इलाके में टिकट बंटवारे से पहले दूसरे चरण का सर्वे भी चल रहा है।