समाजवादी पार्टी से निकाले जाने पर बोले अखिलेश, मैं सीएम बना रहूंगा
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सपा से बर्खास्त किए जाने के बाद अखिलेश यादव मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ेंगे। शनिवार को सवेरे नौ बजे उन्होंने विधायक दल की बैठक बुलाई है। इसमें वह विधायकों का भरोसा हासिल कर लेंगे। दो माह पहले भी अधिकतर विधायकों ने उनका समर्थन किया था।
कानून के जानकारों का कहना है कि जब तक विधायकों का समर्थन है, तब तक मुख्यमंत्री को पद पर बने रहने का पूरा हक है।
सपा सुप्रीमो मुलायम ने छह साल के लिए पार्टी से निकाला
टिकट बंटवारे को लेकर दो फाड़ हुई समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया।
मुलायम ने यह कार्रवाई एक जनवरी को आपातकालीन राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाने और प्रत्याशियों की समानांतर सूची जारी करने पर की है। मुलायम ने कहा कि रामगोपाल ने पार्टी को भारी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने अखिलेश का भविष्य बर्बाद कर दिया।
सपा में चल रहे पारिवारिक विवाद पर राज्यसभा सदस्य बेनी प्रसाद वर्मा का कहना है कि मुलायम सिंह को लगातार झुकाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन वह झुकेंगे नहीं।
उन्होंने कहा कि इस वक्त सभी कार्यकर्ता मुलायम के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं। शनिवार को होने वाली बैठक में साफ हो जाएगा कि कौन जीतेगा।
बेनी बोले, हम लोग मुलायम के साथ हैं और सरकार मुलायम की सपा की ही बनेगी।
उनके बयान से पता चलता है कि सपा में विवाद की जड़ अब इतनी गहरी हो गई है, जहां समझौते की गुंजाइश खत्म हो गई है।
अखिलेश ने 5 केडी पहुंचकर विधायकों से मुलाकात की वहीं शिवपाल भी मुलायम के घर मीटिंग करने पहुंचे। मुलायम के घर शारदा प्रताप शुक्ला भी मौजूद रहे। आज सुबह से अखिलेश के घर के बाहर समर्थकों की भीड़ जुटने लगी थी। जिनको टिकट नहीं मिला है वे टिकट मिलने की उम्मीद में यहां इकट्ठे हुए। वहीं सपा मुख्यालय के बाहर भी जमावड़ा रहा।
बता दें कि टिकट बंटवारे में तवज्जो न मिलने के बाद अखिलेश यादव ने गुरुवार शाम अपने 235 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की। अखिलेश के जवाब में देर रात शिवपाल ने अपने 68 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की। इसके साथ ही चाचा-भतीजे के बीच की जंग खुलकर सामने आ गई।
32 घंटे में तीनों नेताओं ने जारी कीं तीन लिस्टें
सबसे पहले मुलायम ने बुधवार दोपहर 3 बजे 403 विधानसभा सीटों में से 325 प्रत्याशियों का ऐलान किया। इस लिस्ट में अपने करीबियों की अनदेखी से अखिलेश यादव नाराज हो गए। उसके 30 घंटे बाद गुरुवार रात 9 बजे अखिलेश ने 235 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की। इसके ठीक 2 घंटे बाद शिवपाल यादव ने 68 प्रत्याशियों की एक और लिस्ट जारी कर दी।
आगे क्या-क्या होने की संभावना?
चाचा-भतीजा में टकराव ज्यादा गहराया तो शिवपाल यादव प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पार्टी से सस्पेंड भी कर सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो सपा दो हिस्सों में बंट सकती है। अखिलेश नई पार्टी की घोषणा कर सकते हैं।
अखिलेश की लिस्ट को नॉमिनेशन के वक्त शिवपाल चुनौती दे सकते हैं। लिस्ट पार्टी अध्यक्ष की ही मान्य होती है, क्योंकि नामांकन के समय फॉर्म बी देने का अधिकार पार्टी अध्यक्ष का होता है।मुलायम राजी हुए तो तो अखिलेश की लिस्ट रद्द हो सकती है। ऐसे में, अखिलेश अपने लोगों को बतौर निर्दलीय मैदान में बने रहने को कह सकते हैं।
शिवपाल की सूची में 16 मुस्लिम, 10 यादव
शिवपाल यादव द्वारा देर रात जारी सूची में जौनपुर की शाहगंज सीट से राज्यमंत्री शैलेन्द्र यादव ललई और पीलीभीत की बरखेड़ा सीट से राज्यममंत्री हेमराज वर्मा का टिकट काट दिया है। इन दोनों सीटों पर क्रमस: राजनारायण बिंद और ताराचन्द्र लोधी को उम्मीदवार बनाया है। बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर) से गुलफाम मलिक को प्रत्याशी बनाया है।
अखिलेश यादव ने भी चला मुस्लिम-यादव का दांव
अखिलेश यादव ने भी प्रत्याशियों के चयन में मुस्लिम-यादव (एम-वाई) कार्ड चला है। उनकी 235 प्रत्याशियों की सूची में 45 मुस्लिम और 37 यादव है। मुलायम सिंह ने बुधवार को जो 325 प्रत्याशियों की जो सूची जारी थी उसमें 64 मुस्लिम प्रत्याशी थे। अखिलेश ने 235 उम्मीदवारों में 45 मुसलमानों पर दांव लगाया है।
अखिलेश ने बदले शिवपाल की सूची के 51 प्रत्याशी
चार घंटे के भीतर तीन बार मुलायम से मिले शिवपाल
सपा में टिकट के बंटवारे को लेकर मचे घमसान के बीच बिक्रमादित्य मार्ग स्थित सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह का आवास देर रात तक सियासी गतिविधियों का केन्द्र बना रहा।
प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने रात को करीब 4 घंटे दौरान जहां तीन बार मुलायम से मिले, वहीं सपा मुखिया के नजदीकी माने जाने वाले परिवहन मंत्री गायत्री प्रसाद और एमएलसी आशु मलिक भी घंटों मुलायम के घर मौजूद रहे।
मंत्री पद से बर्खास्त किए गए नारद राय भी मुलायम से मिलने पहुंचे थे। मुलायम के घर के बाहर देर रात विधायक व अन्य नेताओं का भी जमावड़ा लगा रहा।
विधायक बोले, आपके चेहरे पर ही लड़ा जाएगा चुनाव
अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को अपने आवास पर ऐसे विधायकों व कुछ नेताओं की बैठक बुलाई थी जिनके टिकट काट दिए गए हैं या जिनकी सीटों पर प्रत्याशी की घोषणा रोक दी गई है।
बैठक में कई विधायकों, मंत्रियों व कुछ अन्य नेताओं ने राय रखी। मैनपुरी के विधायक राजकुमार उर्फ राजू यादव ने मुख्यमंत्री से कहा कि किसी को गलतफहमी नहीं रहनी चाहिए, चुनाव आपके चेहरे पर लड़ा जाएगा। आपके काम से आपका नाम पार्टी से भी बड़ा हो गया है। कहा, आपको आज ही कोई फैसला लेना चाहिए।
सरधना (मेरठ) से टिकट से वंचित हुए छात्र सभा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अतुल प्रधान ने सीएम से कहा कि 24 अक्तूबर की बैठक, 3 नवंबर की रथयात्रा और 5 नवंबर को रजत जयंती समारोह उन्होंने संयम दिखाया। अब आगे बढ़कर जनता के बीच जाने की जरूरत है। प्रदेश आपको मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहता है। धनौरा (अमरोहा) के विधायक माइकल चन्द्रा ने सीएम के नेतृत्व की सराहना की। कहा कि जिन लोगों को टिकट दिए गए हैं, वे दो हजार वोट भी नहीं ले सकते। सपा ने धनौरा (सुरक्षित) सीट से चन्द्रा का टिकट काटकर उर्वशी को उम्मीदवार बनाया है।
कहीं गठबंधन की राह पर तो नहीं अखिलेश यादव?
दरअसल, अखिलेश यादव खुद कई बार सार्वजनिक मंच से यह कह चुके हैं कि यदि कांग्रेस के साथ गठबंधन हो जाएगा तो 300 से अधिक सीटें आ जाएंगी। हाल ही में प्रियंका गांधी से उनकी मुलाकात को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है।
कांग्रेस आलाकमान भी यह चाहता है कि उसका गठबंधन हो जाए। क्योंकि आलाकमान यह जानता है कि सूबे में पार्टी की चुनाव तैयारियां जीरो हैं। यही वजह है कि कांग्रेस आलाकमान भी प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर को बगैर विश्वास में लिए गठबंधन की राह पर चल रही है। इसका मुख्य कारण मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का राजबब्बर को पसंद न करना भी है।