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फसल बर्बाद, कई जानें गईं लेकिन किसानों के प्रति सरकार संवेदनहीन: अखिलेश
Sat, 07 Mar 2020 08:37 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Vikas Kumar
Updated Sat, 07 Mar 2020 08:37 PM IST
सार
-असमय बारिश व ओलावृष्टि से चूर-चूर हुआ अच्छी फसल का सपना
- प्राकृतिक आपदा से ग्रामीण अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है
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अखिलेश यादव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि प्रदेश में असमय हुई वर्षा और ओलावृष्टि से किसानों का अपने खेतों में अच्छी उपज का सपना चूर-चूर हो गया है। किसानों का पूरा जीवन चक्र फसल के इर्द-गिर्द घूमता है। प्राकृतिक आपदा से ग्रामीण अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है। इस आपदा के चलते पूरब से पश्चिम तक आम, चना, मटर, सरसों, गेहूं की हजारों हेक्टेयर फसल पर ओला पड़ गया है, कई जाने भी गई है। दुखद है कि किसानों पर संकट की घड़ी में सरकार पूरी तरह संवेदनहीन बनी हुई है।
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अखिलेश यादव ने बयान में कहा कि पूरे राज्य में जहां-जहां अतिवृष्टि और ओलावृष्टि हुई है, कहीं भी न तो नुकसान का आंकलन हुआ है और न हीं किसानों को अंतरिम आर्थिक मदद मिली है। वैसे भी किसानों के नुकसान की भरपाई करना भाजपा सरकार के बस की बात नहीं है। किसानों का सरकार पर से भरोसा उठ गया है। उन्होंने कहा, वस्तुस्थिति यह है कि किसान कर्ज मुक्त नहीं हो पा रहा है। उसे न तो न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल पाता है और न ही उसको फसल की लागत का ड्योढ़ा दाम मिला। किसानों की आय दोगुनी करने का दावा दम तोड़ चुका है। किसान को खेती के लिए जो बीज, खाद, कृषि उपकरण, कीटनाशक चाहिए, उसके लिए मजबूरी में साहूकारों के पास जाना पड़ता है। सूदखोरों के चंगुल में फंसे किसान को नकद आर्थिक मदद मिलनी चाहिए।
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सपा अध्यक्ष ने कहा, किसानों को समाजवादी सरकार में पेंशन और फसल बीमा का लाभ दिया गया था। सिंचाई के लिए मुफ्त पानी और बैंकों से सस्ते कर्ज की सुविधा थी। आसानी से टयूबवेल कनेक्शन मिल जाता था। किसानों की कर्जमाफी भी हुई थी। बजट का 75 प्रतिशत हिस्सा गांव, किसान को आवंटित किया था। भाजपा सरकार में आते ही किसानों की सुविधाओं में कटौती कर बड़े पूंजीघरानों को रियायतें दे रही है। जनता अब उसकी तुकबंदी या जुमलेबाजी से बहकने वाली नहीं है। उन्होंने कहा, सरकार को विपदा में फंसे किसानों का तमाम सरकारी देय, सरकारी और गैर सरकारी ऋण माफ करना चाहिए।
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