यूपी विधानसभा में मंगलवार को अभूतपूर्व हंगामा हुआ। संपूर्ण विपक्ष विधानसभा में अपने चुनावी तेवर में नजर आया। हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों को विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश पर मार्शलों के जरिए बाहर निकाल दिया गया।
मार्शलों ने विधायकों को जबरन सदन से बाहर निकालने की कोशिश की तो उनके साथ भी हाथापाई हुई। सदन से निकाले जाने के बाद बसपा, भाजपा और कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के ऑफिस के बाहर गैलरी में धरना दिया। ऐसा पहली बार हुआ है, जब विपक्षी सदस्यों को एक साथ सदन से बाहर किया गया।
विधानसभा की कार्यवाही प्रारंभ होने से पहले ही बसपा, भाजपा और कांग्रेस के सदस्य वेल में आ गए थे। विधानसभा अध्यक्ष के आसन पर पहुंचते ही उन्होंने सरकार विरोधी नारे लिखे बैनर लहराते हुए नारेबाजी शुरू कर दी।
वे महिलाओं पर अत्याचार, जमीनों पर कब्जे बंद करने, गन्ना मूल्य भुगतान कराने, बलात्कारियों को फांसी देने, प्रदेश सरकार को बर्खास्त करने, बलिया गोलीकांड की सीबीआई जांच कराने और बिजली संकट दूर करने के नारे लगा रहे थे। बसपा सदस्य पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग भी कर रहे थे।
संसदीय कार्यमंत्री आजम खां ने कहा कि सदन की कार्यवाही प्रारंभ होने से पहले ही हंगामा शुरू करना सदन का अपमान है। उन्होंने भाजपा पर सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने, दंगा कराने और माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया।