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पैसा न देने पर ऑक्सीजन हटाई, मरीज की तड़प-तड़पकर मौत, जमकर बवाल

Sat, 16 Apr 2016 05:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 16 Apr 2016 05:32 AM IST
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Ruckus in hospital after patient's death in zainiss hospital in lucknow.
अस्पताल का एक दृश्य - फोटो : amar ujala

गोमतीनगर के जैनिस अस्पताल में मरीज की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। सांस लेने में दिक्कत की समस्या के बाद महिला को जैनिस अस्पताल में भर्ती कराया गया।

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परिवारीजनों का आरोप था कि डॉक्टरों ने इलाज के नाम एक लाख रुपए की रकम वसूल ली। दोबारा पैसा मांगा तो परिवारीजनों ने पैसा देने में असमर्थता जताई। इस बात से नाराज आईसीयू में तैनात डॉक्टर ने मरीज की ऑक्सीजन निकाल दी।
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ऑक्सीजन निकलते ही मरीज की सांस फूलने लगी। अभी कोई कुछ समझ पाता उससे पहले ही मरीज की मौत हो गई।

महिला मरीज की मौत के बाद नाराज परिवारीजनों ने जमकर हंगामा किया। अस्पताल में हंगामा और तोड़फोड़ होते देख सभी डॉक्टर, स्टाफ और अन्य कर्मचारी फरार हो गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने समझाने की कोशिश की लेकिन इसके बाद भी देर रात तक हंगामा चलता रहा।
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इस्माइलगंज के अनुज तिवारी की मां पुष्पा तिवारी (48) को सांस लेने में दिक्कत होने पर शुक्रवार सुबह में गोमतीनगर नगर नीलकंठ चौराहे के पास स्थित 50 बेड के जैनिस अस्पताल में भर्ती कराया गया।

सुबह से शाम तक एक लाख वसूले

Ruckus in hospital after patient's death in zainiss hospital in lucknow.
मरीज की मौत के बाद बदहाल परिवारीजन - फोटो : amar ujala

बेटे अनुज तिवारी ने बताया कि सुबह अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने हालत गंभीर बताकर आईसीयू में भर्ती कर दिया। सुबह से शाम पांच बजे तक एक लाख से अधिक की रकम वसूल ली। करीब नौ बजे आईसीयू में तैनात डॉ. अंकुर ने और पैसा जमा करने के लिए कहा।

इस पर परिवारीजनों ने कहा कि पैसे की व्यवस्था करने के लिए थोड़ा समय चाहिए उसके बाद जमा कर देंगे। करीब सवा नौ बजे तक पैसा जमा नहीं हुआ तो डॉक्टर ने दोबारा पैसा जमा करने के लिए कहा। बेटी मीना मिश्रा ने कहा कि थोड़ी देर बाद पैसा जमा कर देंगे।

इससे नाराज आईसीयू में तैनात डॉक्टर ने मरीज को लगी ऑक्सीजन निकाल दी। ऑक्सीजन निकलते ही पुष्पा की सांस फूलने लगी।

मीना ने डॉक्टर से ऑक्सीजन लगाने के लिए कहा तो उसने अनसुना कर दिया और मीना को आईसीयू से धक्के मारकर बाहर निकाल दिया। करीब साढ़े नौ बजे परिवारीजन जोर जबरदस्ती कर आईसीयू में घुसे तो डॉक्टर ने बताया कि मरीज की मौत हो चुकी है।

मौत से गुस्साए परिवारीजनों ने किया हंगामा

Ruckus in hospital after patient's death in zainiss hospital in lucknow.
मामले की जानकारी अन्य परिवारीजनों को मिली तो 50 से अधिक लोग अस्पताल पहुंच गए। मरीज की मौत की जानकारी के बाद परिवारीजनों ने आईसीयू में लगे शीशे के गेट, कार्डियक मॉनीटर, सक्शन मशीन समेत अन्य उपकरण और दवांए तोड़फोड़ कर पूरी आईसीयू यूनिट को तहस नहस कर दिया।

चार बेड के आईसीयू में तोड़फोड़ होते देख दूसरे मरीजों के तीमारदार अपने मरीज लेकर भाग खड़े हुए। मौके पर मौजूद भीड़ ने पहले तल पर स्थित ओटी के प्रवेश द्वार के कांच को भी तोड़ दिया।

तोडफोड़ की वजह से तीमारदारों के हाथ में गंभीर चोट लग गई जिससे आईसीयू से लेकर ओटी तक की फर्श खूना खच्चर हो गई। अस्पताल में तोड़फोड़ और हंगामा होते देख अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारी भाग खड़े हुए।

पुलिस रही बेबस, हंगामा करते रहे परिवारीजन

Ruckus in hospital after patient's death in zainiss hospital in lucknow.

जैनिस अस्पताल में मरीज की मौत के बाद हुए हंगामे और तोड़फोड़ के बाद पहुंची गोमतीनगर पुलिस भी तीमारदारों के सामने बेबस और लाचार दिखी। एसओ अखिलेश चंद्र पांडेय, सीओ सत्य सेन यादव के नेतृत्व में आठ जीप और दर्जनों बाइक से 60 से अधिक पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे।

जैनिस अस्पताल पहुंचने पर दोनों आला अधिकारियों ने आईसीयू यूनिट में पड़े शव के पास पहुंचकर परिवारीजनों को समझाने बुझाने की कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

मौके पर पहुंची पुलिस ने अस्पताल के सभी कमरों की तलाशी ली लेकिन अस्पताल में कोई डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारी नहीं मिला। इसके बाद देर रात तक अस्पताल में पुलिस के सामने हंगामा होता रहा।

कर रहे डॉक्टरों की गिरफ्तारी की मांग

Ruckus in hospital after patient's death in zainiss hospital in lucknow.
मृत पुष्पा के साथ उसका बेटा अनुज - फोटो : amar ujala

बेटे अनुज तिवारी, विनय तिवारी और बेटी मीना मिश्रा का रो-रोकर बुरा हाल था। बेटे और बेटी की मांग थी कि पुष्पा तिवारी की जान लेने वाले डॉक्टरों को गिरफ्तार किया जाए।

परिवारीजनों का आरोप था कि जैनिस अस्पताल में इलाज के नाम पर वसूली का धंधा चल रहा है। मरीजों के तीमारदारों से पैसा जमा कराया जाता है। इसके बाद कोई डॉक्टर देखने तक नहीं आता है और आयुर्वेद यूनानी के डॉक्टरों के भरोसे गंभीर मरीजों का इलाज किया जाता है।

छह घंटे पहले ऑपरेशन पर डॉक्टर नहीं
जैनिस अस्पताल में हंगामे और तोड़फोड़ के बाद ऑपरेशन वाले मरीजों का इलाज उनके तीमारदार करते नजर आए। दूसरे तल पर भर्ती बाराबंकी के राजेश कुमार (50) का पित की थैली का ऑपरेशन हुआ था।

ऑपरेशन के बाद राजेश को ऑक्सीजन लगी हुई थी और कार्डियक मॉनीटर भी लगा था। इसके बाद भी कोई डॉक्टर नहीं था और बेटे उनके इलाज में लगे थे। इसी वार्ड में दूसरे अन्य गंभीर मरीज थे जिनका इलाज भगवान भरोसे चल रहा था और कोई डॉक्टर पूरे अस्पताल में नहीं था।

डॉक्टरों का बोर्ड पर डॉक्टर नहीं

Ruckus in hospital after patient's death in zainiss hospital in lucknow.
पुलिस - फोटो : amar ujala

अस्पताल के प्रवेश द्वार पर शहर के बड़े-बड़े डॉक्टरों के नाम लिखे थे लेकिन मरीजों की देखरेख के लिए कोई डॉक्टर नहीं था। अस्पताल के बाहर डॉ. अयाज खान, डॉ. अनुराग श्रीवास्तव, डॉ. विकास श्रीवास्तव, डॉ. उमेश शर्मा, डॉ. प्रसून कांत, डॉ. राहुत कवत्रा, डॉ. उदित सिंघल, डॉ. तुषार मोहन, डॉ. रवि लिलि, डॉ. सरिता चंद्रा, डॉ. रितु वाजपेई की फ्लीट थी लेकिन हंगामे के घंटो बाद देर रात तक कोई डॉक्टर नहीं पहुंचा।

मोबाइल बंद कर भागे प्रबंधक
जैनिस अस्पताल के प्रबंधक डॉ. अयाज खान अस्पताल में तोड़फोड़ और हंगामे की सूचना के बाद मौके से फरार हो गए। परिवारीजनों का आरोप था कि जैनिस अस्पताल के डॉ. खान से मरीज का इलाज जारी रखने के लिए कहा गया तो उन्होंने साफ कह दिया कि पैसा नहीं तो इलाज नहीं।

अस्पताल में मरीज की मौत के मामले में जब डॉ. अयाज खान के मोबाइल नंबर 9839036550 पर ग्यारह बजे फोन किया गया तो उनका नंबर बंद मिला। करीब पौने बारह बजे दो बार फोन किया गया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

शिकायत पर दर्ज होगा मुकदमा

Ruckus in hospital after patient's death in zainiss hospital in lucknow.
हंगामे के बाद अस्पताल का हाल - फोटो : amar ujala

इस पर गोमतीनगर के एसओ अखिलेश चंद्र पांडेय का कहना है कि गोमतीनगर के जैनिस अस्पताल में मरीज की मौत के बाद परिवारीजनों ने आईसीयू, ओटी में तोड़फोड़ की है। तोड़फोड़ और हंगामे की वजह से अस्पताल के डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ अस्पताल छोड़कर भाग गए थे।

मौके पर पहुंची पुलिस ने परिवारीजनों को समझाने की कोशिश की लेकिन वो देर रात तक नहीं माने। परिवारीजनों से मामले की लिखित शिकायत मांगी गई है जिसके बाद मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच कराई जाएगी।

फिलहाल मामला शांत कराने के लिए पुलिस की टीम लगी हुई है। अस्पताल का कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं है।

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