यूपी के युवाओं के सहारे पूर्वोत्तर में जड़ें मजबूत करेगा संघ
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वैसे तो पूर्वोत्तर के सात राज्यों असोम, अरुणांचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा व मेघालय संघ परिवार के संगठनों के कार्यक्षेत्र के दायरे में पहले से हैं। पर, अब उसने इन राज्यों में विस्तार की योजना बनाई है।
इस काम में उत्तर प्रदेश प्रमुख भूमिका निभाएगा। खासतौर से यहां की विद्यार्थी परिषद की इकाई। बाकी संगठन अलग-अलग तरह से काम बढ़ाएंगे। परिषद ने उत्तर प्रदेश से 100 कार्यकर्ता तैयार किए हैं।
बाकी संगठन वनवासी कल्याण आश्रम, सेवा संपर्क संस्थान, विश्व हिंदू परिषद भी अलग से कार्यकर्ता जुटाएंगे। इन कार्यकर्ताओं की संख्या भी लगभग सौ के आसपास है। विद्यार्थी परिषद की तरफ से तैयार किए जा रहे यह 100 पूर्णकालिक कार्यकर्ता इन राज्यों में अलग-अलग हिस्सों में रुककर वहां के युवकों में हिंदुत्व और राष्ट्रीयता का भाव भरने की कोशिश करेंगे।
साथ ही उनसे सामाजिक सरोकारों के जरिये भी जुड़ने का प्रयास करेंगे। इनके इस काम में हाथ बटाएंगे, इन राज्यों में पहले से काम करने वाले कार्यकर्ता और वहां के रहने वाले वे युवक और वे लोग जो विद्यार्थी परिषद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परषिद के कामकाज से पहले से जुड़े हैं।
यह है योजना
विद्यार्थी परिषद की तरफ से तैयार पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं का मुख्य फोकस इन राज्यों के शैक्षणिक संस्थान होंगे। जहां इन्हें कुछ युवकों के साथ दोस्ताना संबंध बनाकर उनके समूह बनाकर काम बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह युवक छह महीने वहां काम करेंगे। इसके बाद उत्तर प्रदेश से दूसरी टोली वहां भेजी जाएगी।
वहां के लोगों से परिवार के स्तर पर जुड़ने के काम को भी रफ्तार देने का फैसला किया गया है। तय किया गया है कि इन सातों राज्यों से इस बार 250 युवकों को बुलाकर यहां के परिवारों में रोका जाए तो यहां के लोगों को इन राज्यों में भेजकर उन समूहों के परिवारों में ठहराया जाए। जिन्हें संघ परिवार के संगठनों की तरफ से पहले से विभिन्न संगठनों के माध्यम से जोड़ा जा चुका है।
काम बढ़ाने का फैसला
अच्छे परिणामों को देखते हुए अब काम बढ़ाने का फैसला किया गया है। संघ के विभिन्न संगठनों की तरफ से सेवा के कई काम शुरू किए गए हैं। इन राज्यों के नौजवानों का कौशल विकास करने के लिए विद्यार्थी परिषद की तरफ से गुवाहाटी में युवा विकास केंद्र स्थापित किया गया है।
अब अन्य राज्यों में भी इस तरह के केंद्रों की स्थापना की योजना बनाई गई है। साथ ही प्रदेश में वनवासी कल्याण आश्रमों में रहकर पढ़ाई कर रहे पूर्वोत्तर के छात्रों की संख्या में भी बढ़ोतरी की योजना बनाई गई है।
पूर्वोत्तर के नौजवानों का भ्रम दूर करने की कोशिश
विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीहरि बोरीकर के अनुसार, पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में लगभग 350 शैक्षिक संस्थान हैं। इनमें से लगभग 70 प्रतिशत में विद्यार्थी परिषद का काम पहुंच सका है। पूर्वोत्तर के राज्यों में तमाम तरह के लोग और संगठन दूसरे देशों के इशारे पर युवाओं में अलगाववादी भाव भरने का षडयंत्र करते हैं।
उनमें यह भ्रम भी भरने की कोशिश करते हैं कि भारत उनका देश ही नहीं। इसीलिए विद्यार्थी परिषद ने ‘स्टू़डेंट एक्सपीरियंस इन इंटर स्टेट’ (शील) का गठन किया था। इसके माध्यम से ‘भारत को जानो’ कार्यक्रम शुरू किया गया है।
जिससे इन सात राज्यों के नौजवानों को खासतौर से विद्यार्थियों के दिमाग में यह बात बैठाई जा सके कि कुछ संगठन दूसरे देशों के इशारे पर सिर्फ उन्हें बरगला रहे हैं। देश में कहीं भी इन राज्यों के लोगों को गैर नहीं माना जाता। इस प्रयास के काफी अच्छे नतीजे आए हैं।