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दयाशंकर मामले में बसपा के दो विधायक हुए बागी, निलंबित

Thu, 28 Jul 2016 01:52 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 28 Jul 2016 01:52 AM IST
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romi sahni and brijesh verma slam bsp for ticket trade
निलंबित विधायक रोमी साहनी व ब्रजेश वर्मा - फोटो : amar ujala

दयाशंकर मामले को लेकर बसपा के दो विधायक बागी हो गए हैं। लखीमपुर खीरी के पलिया से पार्टी के विधायक हरबिंदर साहनी उर्फ रोमी साहनी और हरदोई के मल्लावां से विधायक बृजेश वर्मा ने बसपा सुप्रीमो मायावती पर टिकट बेचने का आरोप लगाया है। जिस पर बसपा ने कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर‌ दिया है।

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बसपा के प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर ने विधायकों के आरोप को बेबुनियाद, तथ्यहीन, गलत और झूठा बताते हुए इसे अनुशासनहीनता करार दिया और निलंबन की घोषणा की। उन्होंने विधायकों को भविष्य में पार्टी के किसी कार्यक्रम में शामिल न होने की हिदायत भी दी है।
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निलंबित विधायकों के अनुसार, प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के लिए दो से 10 करोड़ रुपये तक में टिकट बेचे जा रहे हैं। बागी विधायकों ने यह भी कहा- बहन मायावती पर दयाशंकर की टिप्पणी अशोभनीय थी, पर उसके बाद बसपा के धरना में दयाशंकर की 12 साल की बेटी, पत्नी और बुजुर्ग मां को पेश करो-पेश करो के नारे लगे, उससे उन्हें काफी आघात पहुंचा। दोनों विधायकों ने कहा, हम दयाशंकर के परिवार के साथ हैं।

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सिद्दीकी सुनाते हैं टिकट की बोली, हमसे भी मांगे पैसे

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बसपा विधायक - फोटो : amar ujala

दोनों विधायकों ने आरोप लगाया कि मायावती के इशारे पर नसीमुद्दीन सिद्दीकी टिकट के एवज में बोली सुनाते हैं। इसके लिए दबाव भी बनाते हैं। जो असमर्थता जताता है उसे टिकट नहीं दिया जाता। रोमी साहनी ने कहा कि सिद्दीकी ने मायावती के सामने मुझसे 5 करोड़ और बृजेश वर्मा से 4 करोड़ रुपये मांगे।

पार्टी में खौफ से नेता हो रहे बीमार
दोनों ने आरोप लगाया कि मायावती और सिद्दीकी ने पार्टी में दहशत व खौफ कायम कर रखा है। इससे पार्टी के तमाम विधायक व नेता बीमार हो गए हैं। दोनों ने कहा, हम बागी हैं, पर बसपा नहीं छोड़ रहे। हम तो बस इतना चाहते हैं कि मायावती यह सब छोड़कर दलितों व गरीबों के कल्याण में ईमानदारी से जुटें।

आलाकमान ने तय किए थे दयाशंकर के खिलाफ नारेरोमी साहनी और बृजेश वर्मा ने दयाशंकर सिंह के परिवार पर बसपाइयों की टिप्पणियों को अनुचित करार दिया। साथ ही इसके लिए बसपा के शीर्ष नेतृत्व को कठघरे में खड़ा किया। कहा- नारे किसी ने अपने मन से नहीं लगाए थे। नारे पहले से तय थे। बसपा में कोई अपने मन से नारे नहीं लगा सकता। नारे लिखकर दिए जाते हैं, जिन्हें पार्टी आलाकमान तय करता है।

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