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Lucknow News: सुतली के सहारे रोडवेज बसें, नोटिस बोर्ड, अग्निशमन यंत्र
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रोडवेज बसों और अड्डों का हाल बदहाल।
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लखनऊ। रोडवेज बसों और बस अड्डों की स्थिति बदहाल है। बसों में फर्स्ट एड बॉक्स और सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। खिड़कियां बंद नहीं होतीं और वायरिंग खुली पड़ी है। रस्सी और सुतली से बसों के बोनट, नोटिस बोर्ड और अग्निशमन यंत्रों को सहारा दिया जा रहा है। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।
कैसरबाग बस अड्डा ही नहीं, लखनऊ के आलमबाग, कमता और चारबाग के बस अड्डों की बसों की भी यही हालत है। यात्री खस्ताहाल रोडवेज बसों में सफर करने के लिए मजबूर हैं। कैसरबाग बस अड्डे से प्रतिदिन 700 से अधिक बसों की आवाजाही होती है। यहां से सीतापुर, लखीमपुर, गोंडा, बहराइच, हरदोई और बरेली सहित करीब दो दर्जन जगहों के लिए बसें चलती हैं। प्रतिदिन 20 से 25 हजार यात्री आते-जाते हैं, मगर इन्हें कोई सुविधा नहीं मिल रही है।
केस - 1 : बहराइच जाने वाली बस संख्या यूपी 78 एफटी 7144 का बोनट रस्सी से बंधा था। बोनट खुलने से इंजन को ओवरहीट से बचाने में मदद मिलती है। इसी तरह, बरेली रूट पर चलने वाली बस संख्या यूपी 32 एमएन 9848 का बोनट भी रस्सी से बांधकर रखा गया था।
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केस- 2 : कैसरबाग बस अड्डे पर लगा नोटिस बोर्ड खराब हालत में है। इसे सुतली के सहारे टांगा गया है। वहीं, अग्निशमन यंत्रों को दीवार पर टांगने के लिए बिजली के तारों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
सेंट्रलाइज्ड एसी तीन साल से खराब
कैसरबाग बस अड्डा प्रदेश का पहला सेंट्रलाइज्ड एसी वाला बस स्टेशन है, लेकिन यहां का सेंट्रलाइज्ड एसी तीन साल से खराब है, जिसे बनवाने पर करीब 20 लाख रुपये का खर्च आना है। मरम्मत न होने से यात्रियों को भीषण गर्मी में राहत नहीं मिल पा रही है।
आधी एसी बसें डिपो में
रोडवेज के अवध डिपो से एसी बसों का संचालन होता है, लेकिन मरम्मत के अभाव में आधी बसें रूट पर नहीं उतर रहीं। डिपो में करीब 80 बसें हैं, जिनमें से औसतन 30 से 35 बसें ही प्रतिदिन चलती हैं, जिससे यात्रियों को लग्जरी सुविधाएं नहीं मिल पातीं।
Iबसों की मरम्मत के बाद ही उन्हें डिपो से भेजने के निर्देश हैं। जिन बसों में गड़बड़ी है, उन्हें दुरुस्त करवाया जाएगा। I
I- विमल राजन, क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज लखनऊ परिक्षेत्रI
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कैसरबाग बस अड्डा ही नहीं, लखनऊ के आलमबाग, कमता और चारबाग के बस अड्डों की बसों की भी यही हालत है। यात्री खस्ताहाल रोडवेज बसों में सफर करने के लिए मजबूर हैं। कैसरबाग बस अड्डे से प्रतिदिन 700 से अधिक बसों की आवाजाही होती है। यहां से सीतापुर, लखीमपुर, गोंडा, बहराइच, हरदोई और बरेली सहित करीब दो दर्जन जगहों के लिए बसें चलती हैं। प्रतिदिन 20 से 25 हजार यात्री आते-जाते हैं, मगर इन्हें कोई सुविधा नहीं मिल रही है।
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केस - 1 : बहराइच जाने वाली बस संख्या यूपी 78 एफटी 7144 का बोनट रस्सी से बंधा था। बोनट खुलने से इंजन को ओवरहीट से बचाने में मदद मिलती है। इसी तरह, बरेली रूट पर चलने वाली बस संख्या यूपी 32 एमएन 9848 का बोनट भी रस्सी से बांधकर रखा गया था।
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केस- 2 : कैसरबाग बस अड्डे पर लगा नोटिस बोर्ड खराब हालत में है। इसे सुतली के सहारे टांगा गया है। वहीं, अग्निशमन यंत्रों को दीवार पर टांगने के लिए बिजली के तारों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
सेंट्रलाइज्ड एसी तीन साल से खराब
कैसरबाग बस अड्डा प्रदेश का पहला सेंट्रलाइज्ड एसी वाला बस स्टेशन है, लेकिन यहां का सेंट्रलाइज्ड एसी तीन साल से खराब है, जिसे बनवाने पर करीब 20 लाख रुपये का खर्च आना है। मरम्मत न होने से यात्रियों को भीषण गर्मी में राहत नहीं मिल पा रही है।
आधी एसी बसें डिपो में
रोडवेज के अवध डिपो से एसी बसों का संचालन होता है, लेकिन मरम्मत के अभाव में आधी बसें रूट पर नहीं उतर रहीं। डिपो में करीब 80 बसें हैं, जिनमें से औसतन 30 से 35 बसें ही प्रतिदिन चलती हैं, जिससे यात्रियों को लग्जरी सुविधाएं नहीं मिल पातीं।
Iबसों की मरम्मत के बाद ही उन्हें डिपो से भेजने के निर्देश हैं। जिन बसों में गड़बड़ी है, उन्हें दुरुस्त करवाया जाएगा। I
I- विमल राजन, क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज लखनऊ परिक्षेत्रI

रोडवेज बसों और अड्डों का हाल बदहाल।

रोडवेज बसों और अड्डों का हाल बदहाल।

रोडवेज बसों और अड्डों का हाल बदहाल।

रोडवेज बसों और अड्डों का हाल बदहाल।