फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   rheumatic fever affecting hearts of children

बच्चों का दिल कमजोर कर रहा रुमेटिक फीवर

Wed, 20 Jan 2021 12:44 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 20 Jan 2021 12:44 AM IST
विज्ञापन
rheumatic fever affecting hearts of children
rheumatic fever affecting hearts of children
चंद्रभान यादव
विज्ञापन

लखनऊ। अर्जुनगंज निवासी देवराज के बेटे पंकज (10) को दो साल पहले बुखार के साथ जुकाम रह रहा था। घर के पास के डॉक्टर को दिखाया। कुछ दिन दवा खाई और छोड़ दिया। सांस फूलने पर बच्चे को लोहिया संस्थान के बाल रोग विभाग में दिखाया तो चिकित्सक ने रुमेटिक फीवर बताया। यह भी कहा कि नियमित दवा लेनी पड़ेगी, लेकिन आराम मिलने पर पंकज ने दवा छोड़ दी। दो दिन पहले अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। जांच में पता चला कि दिल का वॉल्व क्षतिग्रस्त हो गया है। अब उसे सर्जरी के लिए सीटीवीएस विभाग रेफर किया गया है।
केजीएमयू, पीजीआई और लोहिया संस्थान में हर माह औसतन 30 से 35 मरीज विभिन्न जिलों से रेफर होकर पहुंच रहे हैं। लोहिया संस्थान के बाल रोग विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ. केके यादव बताते हैं कि रुमेटिक फीवर की चपेट में आने वाले 80 फीसदी मरीजों का वॉल्व रिकवर कर लिया जाता है, लेकिन जो बीच में दवा छोड़ देते हैं उनके दिल में कई समस्याएं आ जाती हैं। इनकी सर्जरी करानी पड़ती है। सीटीवीएस विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ. डीके श्रीवास्तव बताते हैं कि सही समय पर सही से इलाज नहीं किया तो यह रुमेटिक हार्ट डिजीज का कारण बन जाता है। हर सप्ताह इसका मरीज पहुंच रहा है। ऐसे मरीजों में जरूरत मुताबिक वॉल्व बदलने या छल्ला डालने के लिए सर्जरी होती है। देखा गया है कि जो बच्चे एक बार रुमेटिक फीवर की चपेट में आ जाते हैं, उनके दिल की नसों में कमजोरी आ रही है। इन्हें ताउम्र दवाएं लेनी पड़ती हैं।
विज्ञापन

ये हैं प्रमुख लक्षण
बुखार के साथ गले में लगातार खराश, सांस फूलना, छाती में दर्द, ध्यान केंद्रित न कर पाना, त्वचा पर लाल चकत्ते, हाथ-पैरों में कंपन, दर्द और कंधे में झटके लगना, जोड़ों और पैरों में सूजन, कमजोरी, दिल की धड़कन तेज या अनियमित होना आदि।
विज्ञापन
विज्ञापन

रुमेटिक हार्ट डिजीज के लक्षण
कार्डियो सर्जन डॉ. डीके श्रीवास्तव बताते हैं कि रुमेटिक फीवर में बच्चे को नियमित दवा देनी पड़ती है। कुछ दवाएं मर्ज ठीक होने पर भी ताउम्र लेनी पड़ती है। जो दवाएं नहीं लेते, धीरे-धीरे उनके दिल के वॉल्व खराब हो जाते हैं। ये वॉल्व वनवे डोर की तरह काम करते हैं। इससे हृदय द्वारा पंप किए जाने वाले खून का प्रवाह एक ही दिशा में होता है। वॉल्व क्षतिग्रस्त होने पर इनसे खून रिस सकता है। इलाज में देरी पर हार्ट के डैमेज होने की आशंका रहती है। इस स्थिति में दिल के आसपास पानी जमा होने लगता है। इससे वॉल्व बहुत ढीले या कस जाते हैं। दोनों स्थितियों में वे सही से काम नहीं कर पाते और हृदय शरीर की जरूरत पूरा करने के लिए पर्याप्त खून पंप नहीं कर पाता। इसी तरह हृदय के क्षतिग्रस्त वॉल्वों में संक्रमण, दिल में खून का थक्का बनने से स्ट्रोक, क्षतिग्रस्त वॉल्वों का टूटना आदि समस्याएं होती हैं।
...इसलिए होता है यह बुखार
जहां पर्याप्त सफाई नहीं रहती उस क्षेत्र के बच्चों को बैक्टीरिया स्ट्रेप्टोकोकस चपेट में ले लेता है। इस संक्रमण को स्कारलेट फीवर भी कहा जाता है। इससे इम्यून सिस्टम असंतुलित हो जाता है। कुछ में आनुवंशिक कारण भी होते हैं।
यह है बचाव का तरीका
घर के आस-पास सफाई रखें। गले में संक्रमण के साथ 100 डिग्री के करीब बुखार हो तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं। संक्रमित बच्चे से अन्य को दूर रखें। मर्जी से दवाएं बंद ना करें। बुखार से दिल में समस्या शुरू हो गई है तो संबंधित दवा लें। आराम मिलने पर भी बिना डॉक्टर की अनुमति के दवा बंद ना करें।

बिना सीना खोले ही बदल देते हैं वॉल्व
डॉ. डीके श्रीवास्तव ने बताया कि वॉल्व बदलने के लिए अब हार्ट को खोलना नहीं पड़ता। हाथ के नीचे और छाती के पास छोटा सा छेद करके वॉल्व दुरुस्त किया जा सकता है। कुछ मामलों में वॉल्व को कृत्रिम वॉल्व से बदलना पड़ता है। इसके लिए हृदय के कक्षों (चैंबर) एवं वॉल्वों की जांच के लिए ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल होता है। इको से वॉल्व फ्लैप, वॉल्व लीक होने से रिसाव और हृदय का आकार बढ़ने की जानकारी मिल जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed