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RTE: पांच वर्षों में हुए दाखिलों की समीक्षा की जाएगी, CBSE और CISCE से मान्यता प्राप्त स्कूलों की होगी निगरानी

Thu, 29 May 2025 03:10 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Thu, 29 May 2025 03:10 PM IST
सार

लखनऊ में आरटीई के तहत पांच वर्षों में कितने बच्चों को दाखिला दिया गया, इसकी समीक्षा की जाएगी। इससे CBSE और CISCE से मान्यता प्राप्त स्कूलों की निगरानी होगी। कई विद्यालय ऐसे हैं, जिन्होंने पिछले पांच वर्षों में एक भी बच्चे को दाखिला नहीं दिया है। 

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review will be done on how many children were given admission in CBSE and CISCE schools under RTE In Lucknow
School Admission (Demo) - फोटो : freepik

विस्तार

राजधानी लखनऊ में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत पिछले पांच वर्षों में सीबीएसई और सीआईएससीई के स्कूलों में कितने बच्चों को प्रवेश दिया गया, इसकी समीक्षा की जाएगी। शहर में सीबीएसई से मान्यता प्राप्त 200 से ज्यादा और सीआईएससीइ के करीब 60 स्कूल संचालित हैं। इन विद्यालयों को एनओसी तो बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग देता है, लेकिन इनके प्रबंधक राज्य सरकार के आदेश-निर्देश जल्दी नहीं मानते हैं। 

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आरटीई के तहत दाखिला प्रक्रिया इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इस बार तो सीबीएसई व सीआईएससीई से जुड़े स्कूलों ने जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के दबाव में दो-चार बच्चों को किसी तरह प्रवेश दे दिया है। लेकिन, इनमें कई विद्यालय ऐसे हैं, जिन्होंने पिछले पांच वर्षों में एक भी बच्चे को दाखिला नहीं दिया है। 
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अब इन विद्यालयों की समीक्षा बेसिक शिक्षा विभाग करेगा। समीक्षा में जो विद्यालय प्रवेश न लेने वाले मिलेंगे, उनसे जवाब तलब करने के बाद एनओसी रद्द करने की सिफारिश संयुक्त शिक्षा निदेशक माध्यमिक को भेजी जाएगी।

कितने सेक्शन में चल रही क्लास, होगी जांच

निजी स्कूलों में प्री नर्सरी और कक्षा एक की कक्षाएं कितने सेक्शन में चल रही हैं, इसकी जांच की जाएगी। दरअसल, प्री नर्सरी व कक्षा एक में हर सेक्शन के हिसाब से बच्चों की संख्या के अनुसार आरटीई की सीटें निर्धारित की जाती हैं। इस संबंध में अमर उजाला ने मुद्दे को उठाया है।

छूटे सभी विद्यालयों को जोड़ा

बीएसए राम प्रवेश ने बताया कि आरटीई के तहत छूटे हुए लगभग सभी विद्यालयों को जोड़ने में सफलता मिली है। अब निजी स्कूल क्लास के सेक्शन न छिपा सकें, इसके लिए जांच होगी और पांच साल में कितने बच्चों का प्रवेश लिया इसकी समीक्षा की जाएगी।

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