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पुनर्विचार याचिका राम मंदिर निर्माण को लटकाने की साजिश, हल्के में न लें: प्रवीण तोगड़िया

Thu, 21 Nov 2019 03:16 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या Published by: ishwar ashish Updated Thu, 21 Nov 2019 03:16 PM IST
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Review petition is an effort to stop construction of Ram temple in Ayodhya.
प्रवीण भाई तोगड़िया

राम मंदिर के लिए संघर्ष करने वाले अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया को राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट से आया फैसला फिर अटकने का अंदेशा है। उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और बाबरी एक्शन कमेटी को हल्के में लेने की गलती भारी पड़ सकती है। उनके साथ कई शक्तियां हैं, जो पुनर्विचार याचिका के जरिए मामले को फिर लटकाने में सफल हो सकती हैं। ऐसे में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को अब अपना वादा पूरा करना ही होगा। सरकार इसी शीतकालीन सत्र में राम मंदिर निर्माण के लिए सोमनाथ की तर्ज पर संसद में कानून पारित कराए।

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तोगड़िया ने बुधवार को ‘अमर उजाला’ से फोन पर बातचीत में राम मंदिर पर केंद्र सरकार की तैयारी से लेकर विहिप की ओर से मंदिर मॉडल अपनाने की जिद और हिंदू पक्षकारों व संतों में ट्रस्ट को लेकर आपसी प्रतिस्पर्धा को औचित्यहीन ठहराया। उन्होंने कहा कि मंदिर के स्वरूप, ट्रस्ट, प्रबंधन आदि की चर्चा तब ठीक होती, जब कोई पक्ष पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की बात नहीं करता।
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तोगड़िया ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल है कि राम मंदिर बनना शुरू होगा क्या? क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद भी उस पर दो अपीलें हो सकती हैं। एक पुनर्विचार याचिका होती है, जिसे दाखिल करने का फैसला बाबरी एक्शन कमेटी और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कर लिया है। जैसे ही अदालत इसे स्वीकार करेगी, राम मंदिर के फैसले पर रोक लग जाएगी। इसके बाद एक और क्यूरेटिव याचिका दाखिल करने का प्रावधान है। इसलिए मंदिर बनना शुरू हो ही नहीं पाएगा। पुनर्विचार याचिका में यदि निर्णय बदल दिया गया तो क्या होगा।

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'हिंदू समाज अब इंतजार नहीं करेगा'

तोगड़िया ने कहा, पुनर्विचार याचिका के निर्णय के बाद अंतरराष्ट्रीय हिंदू संगठन का स्पष्ट मत है कि हिंदू अब इंतजार नहीं करेगा। आगे किसकी सरकार आएगी, क्या होगा, क्या पता। 1998 के बाद 2004 में चुनाव आए थे तब सबको लगता था कि भाजपा की सरकार आएगी, लेकिन नहीं आई। ऐसे में आगे भाजपा हार गई और 2024 निकल गया तो राम मंदिर भी लटक जाएगा।

कानून बनाने पर सरकार की खामोशी से मुझे यह स्थिति दिखती है कि राम मंदिर का मुद्दा लटक जाएगा। भाजपा ने जनता से वादा किया था कि सरकार बनी तो संसद में कानून बनाकर राम मंदिर का निर्माण कराएंगे। इसी वादे को लेकर लालकृष्ण आडवाणी ने रथयात्रा निकाली और सत्ता में आए। यदि भाजपा सरकार मंदिर का मुद्दा हवा में लटकाना नहीं चाहती है तो संसद में कानून बनाए। काशी-मथुरा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अभी सिर्फ राम मंदिर की ही चर्चा कर रहा हूं।

बहु धनुहिं तोरी लरिकाई...जैसा होगा हश्र : सखा रामलला
सखा रामलला के पक्षकार त्रिलोकी नाथ पांडेय ने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की बात करके दोनों संप्रदाय में बने सौहार्द के माहौल को कलुषित करने का प्रयास किया है। इसका हश्र बहु धनुहिं तोरी लरिकाईं...जैसा होगा। हमलोग बहुत दिनों से उनके दांव-पेच को बेकार करते आ रहे हैं, इस बार भी ऐसा ही होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका स्वीकार नहीं होगी।

पुनर्विचार याचिका के पीछे कांग्रेस की चाल : वेदांती

श्रीराम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती ने कहा कि पुनर्विचार याचिका के पीछे मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ही नहीं है। कांग्रेस की मुखिया सोनिया गांधी, राहुल गांधी, कपिल सिब्बल, चिदंबरम आदि के इशारे पर ऐसा निर्णय हुआ है। ऐसी ताकतें चाहती हैं कि देश का सांप्रदायिक माहौल बिगड़े। हमें विश्वास है कि पुनर्विचार याचिका निरस्त होगी। अगर ऐसा नहीं हुआ तो मोदी सरकार संसद से कानून बनाकर राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगी।

इसी सत्र में बने राम मंदिर पर कानून : मुख्य पुजारी
विराजमान रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सतेंद्र दास कहते हैं कि अब राम मंदिर पर स्पष्ट फैसला आ गया है। सरकार को ट्रस्ट व प्रबंधन को लेकर योजना बनाने का आदेश भी सुप्रीम कोर्ट ने दे दिया है। यदि पुनर्विचार याचिका से मामला लटकता है तो रामभक्त बहुत नाराज होंगे। ऐसे में सरकार को किसी को भी मामले को लटकाने का मौका नहीं देना चाहिए। इसी संसद सत्र में प्रस्ताव लाकर राम मंदिर पर कानून बनाना चाहिए।

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