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2015: बेटियों से उम्मीद, बदलेगी लखनऊ की तस्वीर

Thu, 01 Jan 2015 04:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 01 Jan 2015 04:23 PM IST
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review 2014 girls will lead.

नए साल से सबको अलग-अलग उम्मीदें है। अगर बीते साल पर नजर डालें तो लखनऊ की बेटियां सुनहरे भविष्य की जमीन पहले ही तैयार कर चुकी हैं।

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राजधानी में दो लाख 12 हजार 989 लड़कियां 20-24 साल की हैं। यानी उस आयु वर्ग से जो किसी देश की दशा और दिशा बदल सकती है, विकास को दिशा दे सकती है।

यही नहीं दो लाख 40 हजार 941 लड़कियां 15-19 की आयु वर्ग की है। यानी विकास को स्थायी दिशा और उसको मुकाम तक पहुंचाने की पूरी क्षमता। चाहे तो सेक्टर हो, उसमें मजबूत कदम रख वे विकास में अपनी भागीदारी बढ़ा भी रही है।

ज्यादा दूर नहीं जाएं सिर्फ 2014 में ही झांकें तो पता चलता है कि किस तरह बेटियां सफलता का परचम फहरा खुद को साबित कर रही हैं। उनमें कामयाबी का जुनून है।
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यूपी सीपीएमटी में आलिया जेहरा ने चौथी रैंक हासिल की। वहीं सीमा सिंह इंडियन कॉस्ट एकाउंटेंट ऑफ इंडिया, लखनऊ की महिला अध्यक्ष चुनी गईं।

केजीएमयू में बीडीएस में शिखा गुप्ता छात्रों को कहीं पीछे छोड़ टॉप पर पहुंच गई। कैट के रिजल्ट में सृष्टि अग्रवाल ने 99.15 परसेंटाइल लाकर जता दिया कि बेटियों के लिए 100 परसेंटाइल अब दूर नहीं।

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अकाउंटिंग में भी होगा कब्जा

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आरक्षण की बात की जाए तो बेटियां इस दायरे को तोड़ आगे बढ़ रही हैं। केजीएमयू में एमबीबीएस की 40 फीसदी सीटों पर बेटियों का दाखिला यानी आने वाले दिनों में ज्यादा बेटियां डॉक्टर व इंजीनियर बनेंगी।

सीएके रिजल्ट पर नजर दौड़ाएं तो साफ हो जाता है कि वह दिन दूर नहीं, जब इस क्षेत्र में बेटियों का पूरा कब्जा होगा। 2014 में सीए फाइनल क्लीयर करने वालों में 70 फीसदी बेटियां रहीं।

वहीं, मैनेजमेंट सेक्टर में भी बेटियां अपनी पकड़ मजबूत बना रही हैं। कैट की बात करें तो सफलता हासिल करने वाले शहर के ‌मेधावियों में करीब 50 फीसदी लड़कियां रहीं।

80 प्रतिशत चिकन इंडस्ट्री महिलाओं पर निभर हैं। साइंटिस्ट में 26 महिलाएं तो, 17 फीसदी शिक्षक और 14 फीसदी डॉक्टर महिलाएं हैं। जिस हिसाब से एजुकेशन में बेटियों का प्रदर्शन है, उससे साफ कहै कि इस साल यह दायरा और बढ़ेगा।

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