आधार कार्ड की जगह अब इस कार्ड से होगी नागरिक की पहचान
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बिना जरूरी पड़ताल और रिहायशी सत्यापन के बन रहे आधार कार्ड ने गृह मंत्रालय को परेशानी में डाल दिया है। ऐसे में अब यूपी में ‘आधार’ की जगह इलेक्ट्रॉनिक चिप युक्त नागरिक पहचान पत्र (रेजिडेंट आइडेंटिटी कार्ड) जारी करने की तैयारी है, ताकि इसे राष्ट्रीय पहचान पत्र का दर्जा दिया जा सके।
इससे पहले नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) को अपडेट करने और अब तक बन चुके आधार कार्ड को लिंक कर रिहाइश के सत्यापन का काम शुरू कर दिया गया है। यह काम स्थानीय निकायों और जिला प्रशासन को मिला है।
जनगणना कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली में जनसंख्या से अधिक (106 प्रतिशत) आधार कार्ड बनने के बाद यूपी में भी इसे गंभीरता से लिया गया है।
आधार कार्ड का मकसद पूरा नहीं हो रहा है
यूपी में अब तक 63 प्रतिशत लोगों (13.33 करोड़) के आधार कार्ड बन चुके हैं। राजधानी लखनऊ में ही कुल 45.89 लाख की आबादी में से 37.34 लाख के आधार कार्ड बन चुके हैं।
इसके बावजूद आधार कार्ड बनाने वाली निजी एजेंसी वार्डवार और ग्रामसभा वार सूचना नहीं दे पा रही है। ऐसे में आधार का राष्ट्रीय आईडी के रूप में इस्तेमाल करने का मकसद पूरा नहीं हो पा रहा है। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह पहले ही पूरे देश में राष्ट्रीय पहचान पत्र दिए जाने का संकेत दे चुके हैं।
नागरिक पहचान पत्र बनाने की शुरुआत करने से पहले जनसंख्या कार्यालय ने एनपीआर को आधार सर्वर से लिंक करने की कवायद शुरू कराई।
इसके साथ ही एनपीआर को भी अपडेट किया जा रहा है। यह काम 15 जनवरी तक होना था, लेकिन यह काफी देरी से चल रहा है। गृह मंत्रालय की योजना के मुताबिक, एनपीआर के अपडेट होने के बाद इसके आधार पर ही नागरिक पहचान पत्र जारी कर दिए जाएंगे।