रेजिडेंट डॉक्टरों ने दी चेतावनी : पहले गांधीवादी तरीके से चलेगा आंदोलन, नहीं मानने पर हड़ताल
प्रदेश के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों एवं मेडिकल कॉलेजों में डीएम और एमसीएच का कोर्स पूरा करने वाले छात्रों को सेवा विस्तार दिया जा रहा है। इन छात्रों को फिर से सीनियर रेजीडेंट पद पर ही तैनात किया जा रहा है। रेजिडेंट डॉक्टरों की मांग है कि डीएम और एमसीएच करने के बाद उनके अनुभव को प्रदेश सरकार के बांड में शामिल किया जाए।
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प्रदेश के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों एवं मेडिकल कॉलेजों में डीएम- एमसीएच के सेवा विस्तार का मामला गरमाता जा रहा है। मंगलवार को रेजिडेंट डॉक्टरों की हुई बैठक में तय किया गया कि पहले गांधीवादी तरीके से विरोध दर्ज कराया जाएगा। इसके बाद भी उनकी मांगें नहीं मानी गई तो काम बंद करना विवशता होगी। उन्होंने ऐलान किया कि किसी भी सूरत में दोबारा सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में कार्य नहीं करेंगे। यह भी चेतावनी दी है कि उनके विरोध प्रदर्शन के दौरान मरीजों को किसी तरह की समस्या होती है तो इसके लिए संबंधित संस्थान प्रशासन जिम्मेदार होगा।
प्रदेश के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों एवं मेडिकल कॉलेजों में डीएम और एमसीएच का कोर्स पूरा करने वाले छात्रों को सेवा विस्तार दिया जा रहा है। इस संबंध में चिकित्सा संस्थानों में फार्म भरवाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इन छात्रों को फिर से सीनियर रेजीडेंट पद पर ही तैनात किया जा रहा है। रेजिडेंट डॉक्टरों की मांग है कि डीएम और एमसीएच करने के बाद उनके अनुभव को प्रदेश सरकार के बांड में शामिल किया जाए। मानदेय एवं अनुभव असिस्टेंट प्रोफेसर का दिया जाए।
नेशनल मेडिकल कमीशन की नियमावली में भी यही प्रावधान है। इसके बाद भी चिकित्सा संस्थान इन छात्रों के रेजिडेंट के पद पर ही सेवा विस्तार दे रहे हैं। लोहिया संस्थान में माहभर पहले नोटिस जारी कर दी गई है। अब एसजीपीजीआई और केजीएमयू, कानपुर स्थित कार्डियोलॉजी, आगरा, प्रयागराज सहित अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी यह प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इससे रेजिडेंट डॉक्टरों में आक्रोश है।
एसजीपीजीआई रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के बैनर तले मंगलवार को प्रदेश भर में डीएम और एमसीएच करने वाले छात्रों की वर्चुअल बैठक हुई। इसमें प्रस्ताव पारित करके मुख्यमंत्री, चिकित्सा शिक्षा मंत्री, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण को पत्र भेजा गया है। रेजिडेंट डॉक्टरों ने तय किया है कि बुधवार से काला फीता बांध कर कार्य करेंगे। इसके बाद कैंडल मार्च निकालेंगे। फिर भी सुनवाई नहीं हुई तो कार्य बंद करना विवशता होगी।
एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. आकाश माथुर और महामंत्री डा. अनिल गंगवार ने बताया कि बैठक में छात्रों ने मांग की है कि नेशनल मेडिकल कमीशन के आदेश के तहत उन्हें सीनियर रेजिडेंट के बजाय असिस्टेंट प्रोफेसर (सहायक आचार्य) के पद का अनुभव, मानदेय दे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि संस्थान ऐसा करने में सक्षम नहीं है तो उन्हें कार्यमुक्त कर दे। रेजिडेंट डॉक्टरों ने बताया कि मिनिमन क्वालिफिकेशन फॉर टीचर्स इन मेडिकल इंस्टीट्यूट रेगुलेशन के अनुसार भी तीन साल सीनियर रेजिडेंट रह चुके छात्र सहायक आचार्य के पद के योग्य हो जाते हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
मामले की अभी जानकारी नहीं है। संस्थान के निदेशकों से जानकारी लेकर समस्या का समाधान किया जाएगा। गाइडलाइन के अनुसार ही सेवा विस्तार दिया जाएगा। प्रयास होगा कि रेजिडेंट डॉक्टरों को किसी तरह की समस्या ना हो।
- आलोक कुमार, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा