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Lucknow News: शोध में हुआ खुलासा, शरीर में तांबे की कमी मुंहासों को बनाती है गंभीर
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लखनऊ। शरीर में तांबे की कमी से मुंहासों की समस्या गंभीर हो सकती है। लोहिया संस्थान ने अध्ययन में इसे साबित किया है। इंडियन जर्नल ऑफ डर्मिटोलॉजी के अगस्त के अंक में यह प्रकाशित हुआ है।
अध्ययन में मुंहासे से पीड़ित 139 युवाओं और 86 स्वस्थ नौजवानों को शामिल किया गया। इनकी उम्र 15 से 25 वर्ष के बीच थी। मुंहासे से पीड़ित युवाओं में से 32 की समस्या सामान्य, 82 की मध्यम और 25 की गंभीर थी। दोनों समूहों के खून के सैंपल लेकर तांबा, जस्ता, सेलेनियम, सीसा, पारा, कैडमियम की जांच की गई। अध्ययन के सभी प्रतिभागियों में कैडमियम की उपस्थिति नहीं मिली।
मुंहासों की गंभीरता वाले युवाओं के शरीर में तांबा, तांबा-जिंक और तांबा-सेलेनियम का अनुपात कम था। स्वस्थ युवाओं के मुकाबले इनमें सीसा, पारा, तांबा-पारा और तांबा-सीसा का अनुपात बढ़ा मिला। अध्ययन में डॉ. सौम्या अग्रवाल, डॉ. शिवानी सिंह, डॉ. सोनल अग्रवाल, डॉ. वंदना तिवारी और डॉ. विक्रम सिंह शामिल रहे।
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किशोरावस्था में 90 फीसदी तक में समस्या
किशोरावस्था में 90 फीसदी तक लोगों को मुंहासों की समस्या होती है। आमतौर पर यह समस्या अपने आप ठीक हो जाती है। 20 फीसदी मामलों में इसकी वजह से चेहरे पर निशान पड़ जाते हैं। मुंहासे शारीरिक अस्वस्थता का कारण बन सकते हैं। इसे लेकर किशोरों में चिंता, अवसाद और पारस्परिक संबंधों में समस्या भी देखी जाती है।
-- -- शरीर में सभी धातुओं की आदर्श उपस्थिति उत्तम स्वास्थ्य की निशानी है। हमारे खानपान से इनकी पूर्ति हो जाती है। हमें स्वस्थ आहार लेना चाहिए और भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करना चाहिए।
- डॉ. विक्रम सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और विभागाध्यक्ष, जनरल मेडिसिन विभाग, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान
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अध्ययन में मुंहासे से पीड़ित 139 युवाओं और 86 स्वस्थ नौजवानों को शामिल किया गया। इनकी उम्र 15 से 25 वर्ष के बीच थी। मुंहासे से पीड़ित युवाओं में से 32 की समस्या सामान्य, 82 की मध्यम और 25 की गंभीर थी। दोनों समूहों के खून के सैंपल लेकर तांबा, जस्ता, सेलेनियम, सीसा, पारा, कैडमियम की जांच की गई। अध्ययन के सभी प्रतिभागियों में कैडमियम की उपस्थिति नहीं मिली।
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मुंहासों की गंभीरता वाले युवाओं के शरीर में तांबा, तांबा-जिंक और तांबा-सेलेनियम का अनुपात कम था। स्वस्थ युवाओं के मुकाबले इनमें सीसा, पारा, तांबा-पारा और तांबा-सीसा का अनुपात बढ़ा मिला। अध्ययन में डॉ. सौम्या अग्रवाल, डॉ. शिवानी सिंह, डॉ. सोनल अग्रवाल, डॉ. वंदना तिवारी और डॉ. विक्रम सिंह शामिल रहे।
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किशोरावस्था में 90 फीसदी तक में समस्या
किशोरावस्था में 90 फीसदी तक लोगों को मुंहासों की समस्या होती है। आमतौर पर यह समस्या अपने आप ठीक हो जाती है। 20 फीसदी मामलों में इसकी वजह से चेहरे पर निशान पड़ जाते हैं। मुंहासे शारीरिक अस्वस्थता का कारण बन सकते हैं। इसे लेकर किशोरों में चिंता, अवसाद और पारस्परिक संबंधों में समस्या भी देखी जाती है।
- डॉ. विक्रम सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और विभागाध्यक्ष, जनरल मेडिसिन विभाग, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान