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लखनऊ विश्वविद्यालय में पर्यवेक्षक बनने में शोधपत्र की अनिवार्यता का रोड़ा

Wed, 18 May 2022 02:12 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 18 May 2022 02:12 AM IST
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research paper in lucknow university
अक्षय कुमार, लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने हाल ही में पीएचडी का नया अध्यादेश पास किया है। इसके तहत सहयुक्त कॉलेजों के स्नातक स्तर के नियमित शिक्षकों को भी इस साल से पीएचडी कराने का मौका दिया गया है। इस क्रम में विश्वविद्यालय के विभागों व कॉलेजों से आवेदन भी मांग लिए गए हैं, लेकिन स्नातक कॉलेज शिक्षकों की पीएचडी पर्यवेक्षक बनने की राह इस बार भी आसान नहीं दिख रही है।
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विवि प्रशासन द्वारा पास किए गए नए पीएचडी अध्यादेश के अनुसार विश्वविद्यालय व कॉलेज के शिक्षकों को शोध पर्यवेक्षक बनने के लिए, प्रोफेसर को पांच और अन्य शिक्षकों के कम से कम दो शोधपत्र यूजीसी से मान्य जर्नल में प्रकाशित होने जरूरी हैं। वहीं इसी क्लाज के अंत में कहा गया है कि जो शिक्षक पहले से पीएचडी करा रहे हैं, उनको इससे छूट देते हुए अर्ह माना जाएगा।
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विश्वविद्यालय में इस समय भी काफी शिक्षक ऐसे हैं जो शोधपत्र प्रकाशन की निर्धारित उक्त योग्यता नहीं पूरी करते हैं। पहले से पीएचडी करा रहे शिक्षकों को अर्ह मान लेने की छूट मिलने के बाद ही इनको शोध पर्यवेक्षक बनने का मौका मिल रहा है। कॉलेजों में भी ऐसे काफी शिक्षक हैं जो शोधपत्र प्रकाशन की अनिवार्यता पूरी नहीं कर रहे हैं, लेकिन वे पहले से पीएचडी नहीं करा रहे थे। इसलिए उनको अर्ह नहीं माना जाएगा। ऐसे में पीएचडी कराने की तैयारी कर रहे कॉलेज शिक्षकों को झटका लग सकता है।
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प्राचार्य/हेड के माध्यम से होंगे आवेदन
अध्यादेश के अनुसार पहली बार शोध पर्यवेक्षक बन रहे विश्वविद्यालय/कॉलेजों के शिक्षकों को अपने आवेदन आवश्यक दस्तावेज के साथ प्राचार्य/विभागाध्यक्ष के माध्यम से करने होंगे, जो इसे डीआरसी को भेजेंगे। इसके आधार पर कुलपति शोध पर्यवेक्षक को एप्रूव करेंगे। आवेदन करने की अंतिम तिथि सात मई समाप्त हो चुकी है। हालांकि, लुआक्टा के साथ हुई वार्ता में इसकी तिथि बढ़ाने पर सहमति बनी थी, लेकिन अभी तक इसे लेकर कोई आदेश नहीं जारी हुआ है।
लुआक्टा अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को जो भी नियम बनाने हैं वह विश्वविद्यालय और कॉलेजों के शिक्षकों के लिए एक समान लागू करने चाहिए। विवि को इस बारे में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। स्नातक कॉलेजों के शिक्षकों के साथ भेदभाव स्वीकार नहीं होगा। आवेदन तिथि बढ़ाने का आदेश जल्द जारी होगा।

लविवि प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव का कहना है कि नियमों में कोई भेदभाव नहीं किया गया है। जो छूट विश्वविद्यालय के शिक्षकों को मिलेगी वही पूर्व से पीएचडी करा रहे कॉलेज के शिक्षकों को भी मिलेगी। वही दोनों जगह के नए अर्ह शिक्षकों के लिए भी एक ही नियम होंगे। इसलिए इसे लेकर कोई ऊहापोह नहीं होना चाहिए।
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