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वाट्स एप और एसएमएस से मिलेगी जांच रिपोर्ट
अमित यादव/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 13 Jun 2014 01:00 PM IST
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केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर आने वाले मरीजों को जांच रिपोर्ट अब वाट्स एप और एसएमएस से भी मिलेगी।
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बृहस्पतिवार से 24 घंटे पैथालॉजी और बायोकेमेस्ट्री जांच की सुविधा के साथ ही ये व्यवस्था भी शुरू हो गई। अभी तक खून की जांच ट्रॉमा सेंटर स्थित लैब में होती थी।
मरीजों को गुणवत्तायुक्त जांच रिपोर्ट देने के लिए अब बायोकेमेस्ट्री विभाग की लैब से सभी टेस्ट कराए जाने की व्यवस्था की गई है।
ट्रॉमा सेंटर, क्वीन मेरी और मेडिसिन विभाग के मरीजों को इमरजेंसी खून की जांच के लिए निजी केंद्रों पर भटकने से निजात मिल गई।
इन सभी विभागों के मरीजों के बेड पर ही सैम्पल लेने की व्यवस्था बृहस्पतिवार से शुरू कर दी गई।
हालांकि पहला दिन होने के कारण व्यवस्था में थोड़ा व्यवधान पड़ा लेकिन ट्रॉमा सेंटर प्रभारी प्रो.एसएन शंखवार के स्वयं मोर्चा संभाल लेने के बाद शाम तक पूरी व्यवस्था पटरी पर आ गई।
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कुलपति प्रो. रविकांत के निर्देश के बाद शुरू की गई इस व्यवस्था में मरीज और उसके तीमारदार को अब पैथालॉजी और बायोकेमेस्ट्री जांच कराने की भागदौड़ से राहत मिल गई।
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शाम को पांच बजे तक लिए गए दो दर्जन से अधिक सैंपल को जांच के लिए बायोकेमेस्ट्री विभाग भेज दिया गया।
प्रो. शंखवार ने बताया कि ट्रॉमा पैथालॉजी लैब में पहले की तरह ही सामान्य जांच की सुविधा मिलती रहेगी।
नई सुविधा के तहत मरीजों को खून की बायोकेमिस्ट्री जांच की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
अभी तक ये सुविधा सिर्फ ओपीडी में ही थी। बायोकेमेस्ट्री जांच के लिए तीमारदारों को निजी केंद्रों पर जांच के लिए जाना पड़ता था।
उन्होंने बताया कि सैंपल लैब तक ले जाने और वहां से रिपोर्ट लाने का कार्य एक ही कर्मचारी करेगा। रोजाना शाम 4 बजे से अगले दिन सुबह 8 बजे तक ये सुविधा मिलेगी।
ओपीडी के समय बड़ी पैथालॉजी में सभी जांचों की सुविधा मिलती रहेगी।
सैंपल इकट्ठा करने के लिए क्वीन मेरी, ट्रॉमा सेंटर और मेडिसिन विभाग के लिए अलग-अलग कर्मचारी लगाए जाएंगे।
व्यवस्था को फुल प्रूफ बनाने के लिए अतिरिक्त कर्मचारी तैनात किए जाएंगे।