{"_id":"f0d168b86ebe2f4b0776f2250a90aa1a","slug":"report-on-nursing-home-operator-by-the-order-of-court-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"डॉक्टर बना दलाल, पैसे लेकर भी नहीं किया इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डॉक्टर बना दलाल, पैसे लेकर भी नहीं किया इलाज
हिमांशु अवस्थी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 09 Nov 2014 11:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीजीआई क्षेत्र में गैस्ट्रोकेयर हॉस्पिटल संचालक के खिलाफ शनिवार को कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट लिखी गई। आरोप है डॉक्टर ने मरीज से रकम ऐंठकर उसे बाहर कर दिया था।
विज्ञापन
इलाज न मिलने से मरीज की मौत हो गई। पुलिस में शिकायत के बाद सुनवाई न होने पर घरवालों ने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर शनिवार को ने पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
विज्ञापन
पुलिस के मुताबिक, बरौली के खलिलाबाद निवासी रवि प्रकाश ने आठ सितंबर को अपनी सास मुन्नी तिवारी को तेलीबाग स्थित जावित्री नर्सिंग होम में दिखाया था।
जांच में पेट में कैंसर की पुष्टि के बाद उन्हें अगले दिन गैस्ट्रोकेयर हास्पिटल में भर्ती कराया। आरोप है डॉ. एपी सिंह ने इलाज के नाम पर एक लाख 40 हजार रुपये ऐंठ लिए। तीन दिन तक इलाज करने के बाद उन्हें बाहर कर दिया।
विज्ञापन
तीमारदार ने मामले की शिकायत थाने में की। इसके बावजूद पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की। वहीं, रवि के पास इलाज के लिए पैसा नहीं बचा। ऐसे में तीमारदार उन्हें घर ले आए थे। इलाज न मिलने से महिला की मौत हो गई थी।
जिसके बाद रवि ने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर नर्सिंग होम संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है। एसओ आरएस यादव ने बताया कि जांच कराई जा रही है।
तीमारदार रवि प्रकाश का आरोप है कि डॉ. एपी सिंह ने जांच रिपोर्ट देखने के बाद बेहतर इलाज व बीमारी ठीक होने का झांसा दिया और दो से ढाई लाख रुपये खर्च होने की बात कही।
तीमारदार ने रिश्तेदारों से मदद लेकर एक लाख 40 हजार रुपये जमा किए थे। तीसरे दिन डॉक्टर ने बाकी रकम की मांग कर दी। इन्कार पर डॉक्टर ने मरीज को बिना इलाज बाहर कर दिया था।
तीमारदार का आरोप है डॉ. एपी सिंह ने खुद को बलरामपुर अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर होने की बात कही थी। तीमारदार का कहना है डॉक्टर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य महानिदेशक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है।
ताकि डॉक्टर की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाकर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। वहीं, विभागीय अफसर भी डॉक्टर के सरकारी व गैर सरकारी होने के बारे में जांच कर रहे हैं।