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UP News: आठ दिन बाद भी नहीं हो सका पुलिस कमिश्नरेट के गठन पर फैसला, ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकारी असमंजस में
Thu, 10 Nov 2022 11:54 AM IST
ishwar ashish
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 10 Nov 2022 11:54 AM IST
सार
यूपी में आठ दिनों के बाद भी तीन पुलिस कमिश्नरेट का पुनर्गठन पूरा नहीं हो सका है। इसे लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकारी असमंजस में हैं।
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- फोटो : Social Media
विस्तार
उत्तर प्रदेश के तीन पुलिस कमिश्नरेट के विस्तार के आठ दिन बाद वहां के पुनर्गठन पर फैसला नहीं हो सका है। कैबिनेट ने 2 नवंबर को लखनऊ, कानपुर नगर और वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट का विस्तार करते हुए ग्रामीण क्षेत्र के थानों को पुलिस कमिश्नरेट में मर्ज करने का निर्णय लिया था। कमिश्नरेट के पुनर्गठन की जिम्मेदारी डीजीपी को दी गई थी। माना जा रहा था कि कमिश्नरेट को जल्द पुनर्गठित कर दिया जाएगा। लेकिन एक सप्ताह बाद भी अब तक पुनर्गठन नहीं हो सका है।
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सूत्रों का कहना है कि सभी तीनों पुलिस कमिश्नरेट ने पुनर्गठन का प्रस्ताव डीजीपी को भेज दिया था। इसमें वाराणसी और कानपुर में जोन बढ़ाए जाने और लखनऊ ग्रामीण के थानों को कमिश्नरेट के मौजूदा जोन में ही समायोजित करने का प्रस्ताव था।
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सूत्रों का कहना है कि दिक्कत इस बात की भी आ रही है कि लखनऊ, कानपुर और वाराणसी के ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिला थाना खोल दिया गया था। कमिश्नरेट में ग्रामीण क्षेत्र भी समायोजित होने के बाद कमिश्नरेट में दो महिला थाने हो जाएंगे। एक क्षेत्र में दो महिला थाने के औचित्य को लेकर निर्णय नहीं हो पा रहा है। शासन की ओर से जारी अधिसूचना में कमिश्नरेट में महिला थाने को भी जोड़ दिया गया है। ऐसे में महिला थाना समाप्त करने के लिए दोबारा अधिसूचना जारी करानी पड़ सकती है।
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असमंजस में हैं ग्रामीण क्षेत्रों के पुलिस कप्तान
वहीं सूत्रों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के पुलिस कप्तान अब तक फैसला न होने से असमंजस में हैं। क्योंकि कैबिनेट के फैसले के समय कहा गया था कि पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी होने तक वर्तमान व्यवस्था बहाल रहेगी लेकिन कमिश्नरेट के अधिकारियों से ग्रामीण क्षेत्रों की घटनाओं को लेकर भी सवाल जवाब किए जा रहे हैं।