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यूपी : बाकी है 796 करोड़ देनदारी, फिर भी कर दिया 900 करोड़ सरेंडर
Tue, 06 Apr 2021 01:27 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 06 Apr 2021 01:27 AM IST
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रुपये
- फोटो : pixabay
नई व्यवस्था लागू होने के बाद से ही पोषाहार आपूर्ति करने वाले नेफेड और पीसीडीफ का करोड़ों रुपये फंस गया है। बजट की उपलब्धता के बावजूद ‘समेकित बाल विकास योजना’ (आईसीडीएस) निदेशालय ने दोनों संस्थाओं का करीब 324 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया गया है। इसी प्रकार पूर्व के आपूर्तिकर्ताओं के भी करीब 472 करोड़ की देनदारी निदेशालय पर बाकी है। इसके बावजूद निदेशालय ने करीब 900 करोड़ रुपये केंद्र सरकार को सरेंडर दिए हैं। इस प्रकार से कुल करीब 796 करोड़ की देनदारी होने के बावजूद बजट वापस किए जाने के लेकर सवाल उठने लगे हैं। बजट की उपलब्धता के बावजूद भुगतान न करने को लेकर अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है।
सूत्रों का कहना है कि नेशनल एग्रीकल्चर कोआपरेटिव मारकेंटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (नेफेड) का जनवरी, फरवरी व मार्च का भुगतान बकाया है। नेफेड द्वारा जनवरी, फरवरी व मार्च में की गई पोषाहार की आपूर्ति के एवज में करीब 225 करोड़ रुपये का भुगतान होना था। इसी प्रकार प्रादेशिक कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन (पीसीडीएफ) से नवंबर में जो दूध व घी की आपूर्ति ली गई थी, उसका भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है। आईसीडीएस ने करीब 172 करोड़ की देनदारी में से अब तक सिर्फ 63 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया है। जबकि 99 करोड़ रुपये बाकी रह गया है।
दोनों विभागों के अधिकारी मार्च के अंतिम सप्ताह से ही बकाये भुगतान के लिए आईसीडीएस निदेशालय का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनका भुगतान नहीं हो सका है। चूंकि पोषाहार वितरण के लिए बजट का आवंटन केंद्रीय महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग द्वारा किया जाता है। इसलिए आईसीडीएस निदेशालय ने 31 मार्च के बाद करीब 900 करोड़ रुपये का बजट केंद्र को सरेंडर कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि पिछले बकाये का भुगतान न होने की वजह से नेफेड और पीसीडीएफ को अगले महीने के लिए पोषाहार आपूर्ति आदेश जारी करने में दिक्कत आ सकती है।
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पीसीडीएफ के एक उच्चपदस्थ सूत्र का कहना है कि अगर नियमित तौर पर भुगतान नहीं किया जाएगा तो समय से पोषाहार की आपूर्ति बाधित हो सकती है। उनका यह भी कहना है कि जल्द ही इस संबंध में सरकार और शासन के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर वस्तु स्थिति से अवगत कराया जाएगा। हालांकि आईसीडीएस बकाये भुगतान की व्यवस्था की जा रही है। बजट सरेंडर करने से भुगतान पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
पूर्व के आपूर्तिकर्ताओं का लटका है 472 करोड़ का भुगतान
पीसीडीएफ और नेफेड के अलावा पूर्व के आपूर्तिकर्ता कंपनियों का भी करीब 472 करोड़ रुपये का भुगतान आईसीडीएस में लटका है। हालांकि कंपनियां अपने भुगतान को लेकर कोर्ट भी गई हैं। इस प्रकार से देखा जाए तो आईसीडीएस पर कुल करीब 796 करोड़ की देनदारी होने के बावजूद 900 करोड़ सरेंडर कर दिए गए हैं। इसका सीधा असर पोषाहार वितरण व्यवस्था पर पड़ने की संभावना है।
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सूत्रों का कहना है कि नेशनल एग्रीकल्चर कोआपरेटिव मारकेंटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (नेफेड) का जनवरी, फरवरी व मार्च का भुगतान बकाया है। नेफेड द्वारा जनवरी, फरवरी व मार्च में की गई पोषाहार की आपूर्ति के एवज में करीब 225 करोड़ रुपये का भुगतान होना था। इसी प्रकार प्रादेशिक कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन (पीसीडीएफ) से नवंबर में जो दूध व घी की आपूर्ति ली गई थी, उसका भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है। आईसीडीएस ने करीब 172 करोड़ की देनदारी में से अब तक सिर्फ 63 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया है। जबकि 99 करोड़ रुपये बाकी रह गया है।
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दोनों विभागों के अधिकारी मार्च के अंतिम सप्ताह से ही बकाये भुगतान के लिए आईसीडीएस निदेशालय का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनका भुगतान नहीं हो सका है। चूंकि पोषाहार वितरण के लिए बजट का आवंटन केंद्रीय महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग द्वारा किया जाता है। इसलिए आईसीडीएस निदेशालय ने 31 मार्च के बाद करीब 900 करोड़ रुपये का बजट केंद्र को सरेंडर कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि पिछले बकाये का भुगतान न होने की वजह से नेफेड और पीसीडीएफ को अगले महीने के लिए पोषाहार आपूर्ति आदेश जारी करने में दिक्कत आ सकती है।
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पीसीडीएफ के एक उच्चपदस्थ सूत्र का कहना है कि अगर नियमित तौर पर भुगतान नहीं किया जाएगा तो समय से पोषाहार की आपूर्ति बाधित हो सकती है। उनका यह भी कहना है कि जल्द ही इस संबंध में सरकार और शासन के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर वस्तु स्थिति से अवगत कराया जाएगा। हालांकि आईसीडीएस बकाये भुगतान की व्यवस्था की जा रही है। बजट सरेंडर करने से भुगतान पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
पूर्व के आपूर्तिकर्ताओं का लटका है 472 करोड़ का भुगतान
पीसीडीएफ और नेफेड के अलावा पूर्व के आपूर्तिकर्ता कंपनियों का भी करीब 472 करोड़ रुपये का भुगतान आईसीडीएस में लटका है। हालांकि कंपनियां अपने भुगतान को लेकर कोर्ट भी गई हैं। इस प्रकार से देखा जाए तो आईसीडीएस पर कुल करीब 796 करोड़ की देनदारी होने के बावजूद 900 करोड़ सरेंडर कर दिए गए हैं। इसका सीधा असर पोषाहार वितरण व्यवस्था पर पड़ने की संभावना है।