बाढ़-अतिवृष्टि से बचाव को योजना तैयार: दोनों ही दशा में आशंका से पहले ही किया जाएगा सतर्क, ये है पूरी तैयारी
राहत विभाग की ओर से सभी जिलों मे बाढ़ बचाव कार्य के लिए एडीएम स्तर के अधिकारियों का प्रशिक्षण कराया गया है। प्रदेश में बाढ़ की आशंका वाले सभी शहरी और ग्रामीण इलाकों का डाटा डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराया गया है।
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राहत विभाग की ओर से सभी जिलों मे बाढ़ बचाव कार्य के लिए एडीएम स्तर के अधिकारियों का प्रशिक्षण कराया गया है। प्रदेश में बाढ़ की आशंका वाले सभी शहरी और ग्रामीण इलाकों का डाटा डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराया गया है। कौन-कौन से गांव और शहर बाढ़ या अतिवृष्टि से प्रभावित हो सकते हैं, उन गांवों या शहरों में पहले कब बाढ़ आई, वहां बाढ़ की संवेदनशीलता कितनी रहती है और क्षेत्र के आसपास कौन कौन से कार्मिक तैनात हैं इसका डाटा ऑनलाइन उपलब्ध कराया है। सभी जिलों में एक आपदा विशेषज्ञ की तैनाती की गई है। ये विशेषज्ञ जिलों में बाढ़ और अतिवृष्टि से लोगों को जागरूक करने के साथ राहत कार्य भी संचालित कराएंगे।
सवा दो करोड़ लोगों को मिलेगी समय पूर्व चेतावनी
राहत विभाग ने प्रदेश में बाढ़ और अति वृष्टि की समय पूर्व जानकारी देने के लिए एकीकृत समयपूर्व चेतावनी सिस्टम (इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम) तैयार किया है। इस सिस्टम पर बाढ़ की आशंका वाले गांवों की जनता के साथ पुलिस, होमगार्ड, आशा-सहयोगिनी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, ग्राम प्रधान सहित करीब ढाई करोड़ लोगों के मोबाइल नंबर और डाटा फीड है। किसी भी क्षेत्र में बाढ़ या अतिवृष्टि की आशंका होने पर दो घंटे पहले संबंधित क्षेत्र के लोगों के साथ राहत कार्य से जुड़े कार्मिकों को मोबाइल पर संदेश देकर सतर्क कर दिया जाएगा।
हर जिले में स्थापित होंगे आपातकालीन ऑपरेशन सेंटर
राहत विभाग की ओर से प्रदेश मुख्यालय पर आपातकालीन ऑपरेशन सेंटर स्थापित किया गया है। यह सेंटर 24 घंटे संचालित होता है। अब सभी जिलों में सेंटर की स्थापना की जा रही है। राहत विभाग ने इसके लिए सभी जिलों को बजट भी जारी कर दिया है। करीब 50 फीसदी से अधिक जिलों में सेंटर स्थापित हो गए हैं। ये सेंटर उस जिले में बाढ़ या अतिवृष्टि की स्थिति में राहत कार्य संचालित कराएंगे। एडीएम वित्त के नियंत्रण में इनका संचालन किया जाएगा।
एसडीआरएफ को दिए अत्याधुनिक उपकरण
प्रदेश सरकार ने राज्य आपदा प्रतिवादन दल (एसडीआरएफ) की तीन बटालियन को अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए बजट दिया है। एसडीआरएफ के जवानों को विशेष प्रशिक्षण के साथ हर स्थिति से निपटने के लिए दक्ष बनाया जा रहा है।
फंड की कमी नहीं
राहत आयुक्त प्रभु नारायण सिंह का कहना है कि बाढ़ बचाव और अतिवृष्टि बचाव के लिए फंड की कमी नहीं है। प्रदेश को 2575 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान है। उन्होंने बताया कि दो हजार करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध है। उनका कहना है कि विभाग समय पूर्व सभी तैयारी कर रहा है। बाढ़ या अतिवृष्टि होने पर ही सुविधाएं और संसाधन मुहैया कराने का इंतजार नहीं किया जाएगा।