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पति-पत्नी के बीच दूरी बढ़ा रही ‘अपनों’ की दखलअंदाजी
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पुलिस की कोशिश से टूटने से बच रहे परिवार।
- फोटो : ??? ?????
रेशम से भी नाजुक पति-पत्नी का रिश्ता आपसी मनमुटाव से कम अपनों की दखलंदाजी से ज्यादा टूट रहा है। यह चौंकाने वाला सच सामने आया है लखनऊ पुलिस की कुटुंब परियोजना में आने वाली शिकायतों के जरिये।
रिश्तों को टूटने से बचाकर परिवारों को जोड़े रखने की कोशिश में लगी डीसीपी महिला अपराध नियंत्रण व सुरक्षा रुचिता चौधरी ने बताया कि लॉकडाउन के बाद अचानक ऐसे मामलों की झड़ी लग गई।
अभी तक आए 412 केसों में से 80 फीसदी परिवार के दखल से टूटने की कगार पर पहुंच गए थे। इसके बाद उन्होंने सिर्फ दंपती को बैठाकर काउंसिलिंग शुरू की।
बताया कि मायके या ससुराली पक्ष के लोगों को अंत में बुलाकर रिश्तों को तोड़ने की कोशिश न करने की हिदायत देकर लौटा दिया जाता है।
जनवरी 2020 में शुरू हुई थी परियोजना
डीसीपी बताती हैं कि यह परियोजना जनवरी 2020 में शुरू हुई थी। मकसद रिश्तों में आई तल्खियां दूर कर परिवार टूटने से बचाना है। लॉकडाउन में एक भी शिकायत नहीं आई, जबकि अनलॉक होते ही शिकायतों की झड़ी लग गई। 412 मामलों में से 152 में समझौता हुआ और 221 निरस्त हुए। चार मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई और 35 मामले शेष रह गए।
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कहीं मायका तो कहीं ससुराल पक्ष हो जाता हावी
कैसरबाग निवासी दंपती की शादी 2014 में हुई, एक बेटा भी है। सब ठीक था, अचानक ससुराल वाले हावी होने लगे और पति-पत्नी में मनमुटाव बढ़ने लगा। मायके छोड़े जाने की धमकी पर पत्नी ने डीसीपी महिला अपराध के यहां प्रार्थना पत्र दिया। दोनों पक्षों को बुलाया गया। घरवाले आए तो मामला और उलझ गया। इसके बाद सिर्फ पति-पत्नी को अकेले बुलाकर काउंसिलिंग शुरू की गई। पहली काउंसिलिंग में ही सकारात्मक नतीजे सामने आने लगे। डीसीपी कहती हैं कि इसके बाद तय किया कि सिर्फ दंपती को बुलाकर काउंसिलिंग की जाएगी।
पत्नी की प्रताड़ना, पति की धोखेबाजी का भी हल निकला
चिनहट के युवक ने डीसीपी से गुहार लगाई कि पत्नी माता-पिता को प्रताड़ित करती है। पत्नी को बुलाकर काउंसिलिंग की, नतीजा परिवार हंसी-खुशी रह रहा है। भगवंत नगर के युवक का रिश्ता अफेयर की वजह से टूटने की कगार पर पहुंच गया। पत्नी के प्रार्थना पत्र पर काउंसिलिंग शुरू हुई। नतीजा, रिश्तों में धोखेबाजी खत्म हुई और परिवार को नई जिंदगी मिली।
बातचीत से समाधान की ओर
डीसीपी कहती हैं कि तलाक तो अंतिम विकल्प है ही, लेकिन यदि बातचीत से हल निकल आए और परिवार टूटने से बच जाए तो इससे बेहतर और क्या हो सकता है। कुटुंब परियोजना बातचीत से समाधान की ओर बढ़ रही है। हमने महसूस किया कि दंपती की अनबन को रिश्तेदार हवा देते हैं। इसलिए काउंसिलिंग में सिर्फ दंपती को बुला रहे है। इसके नतीजे भी सकारात्मक मिल रहे हैं।
आने वाली शिकायतों का आंकड़ा
412 मामलों आए सामने
152 में हुआ समझौता
221 मामले हो गए निरस्त
04 मामलों में एफआईआर
35 मामले अभी बाकी
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रिश्तों को टूटने से बचाकर परिवारों को जोड़े रखने की कोशिश में लगी डीसीपी महिला अपराध नियंत्रण व सुरक्षा रुचिता चौधरी ने बताया कि लॉकडाउन के बाद अचानक ऐसे मामलों की झड़ी लग गई।
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अभी तक आए 412 केसों में से 80 फीसदी परिवार के दखल से टूटने की कगार पर पहुंच गए थे। इसके बाद उन्होंने सिर्फ दंपती को बैठाकर काउंसिलिंग शुरू की।
बताया कि मायके या ससुराली पक्ष के लोगों को अंत में बुलाकर रिश्तों को तोड़ने की कोशिश न करने की हिदायत देकर लौटा दिया जाता है।
जनवरी 2020 में शुरू हुई थी परियोजना
डीसीपी बताती हैं कि यह परियोजना जनवरी 2020 में शुरू हुई थी। मकसद रिश्तों में आई तल्खियां दूर कर परिवार टूटने से बचाना है। लॉकडाउन में एक भी शिकायत नहीं आई, जबकि अनलॉक होते ही शिकायतों की झड़ी लग गई। 412 मामलों में से 152 में समझौता हुआ और 221 निरस्त हुए। चार मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई और 35 मामले शेष रह गए।
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कहीं मायका तो कहीं ससुराल पक्ष हो जाता हावी
कैसरबाग निवासी दंपती की शादी 2014 में हुई, एक बेटा भी है। सब ठीक था, अचानक ससुराल वाले हावी होने लगे और पति-पत्नी में मनमुटाव बढ़ने लगा। मायके छोड़े जाने की धमकी पर पत्नी ने डीसीपी महिला अपराध के यहां प्रार्थना पत्र दिया। दोनों पक्षों को बुलाया गया। घरवाले आए तो मामला और उलझ गया। इसके बाद सिर्फ पति-पत्नी को अकेले बुलाकर काउंसिलिंग शुरू की गई। पहली काउंसिलिंग में ही सकारात्मक नतीजे सामने आने लगे। डीसीपी कहती हैं कि इसके बाद तय किया कि सिर्फ दंपती को बुलाकर काउंसिलिंग की जाएगी।
पत्नी की प्रताड़ना, पति की धोखेबाजी का भी हल निकला
चिनहट के युवक ने डीसीपी से गुहार लगाई कि पत्नी माता-पिता को प्रताड़ित करती है। पत्नी को बुलाकर काउंसिलिंग की, नतीजा परिवार हंसी-खुशी रह रहा है। भगवंत नगर के युवक का रिश्ता अफेयर की वजह से टूटने की कगार पर पहुंच गया। पत्नी के प्रार्थना पत्र पर काउंसिलिंग शुरू हुई। नतीजा, रिश्तों में धोखेबाजी खत्म हुई और परिवार को नई जिंदगी मिली।
बातचीत से समाधान की ओर
डीसीपी कहती हैं कि तलाक तो अंतिम विकल्प है ही, लेकिन यदि बातचीत से हल निकल आए और परिवार टूटने से बच जाए तो इससे बेहतर और क्या हो सकता है। कुटुंब परियोजना बातचीत से समाधान की ओर बढ़ रही है। हमने महसूस किया कि दंपती की अनबन को रिश्तेदार हवा देते हैं। इसलिए काउंसिलिंग में सिर्फ दंपती को बुला रहे है। इसके नतीजे भी सकारात्मक मिल रहे हैं।
आने वाली शिकायतों का आंकड़ा
412 मामलों आए सामने
152 में हुआ समझौता
221 मामले हो गए निरस्त
04 मामलों में एफआईआर
35 मामले अभी बाकी