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लोहिया संस्थान के मातृ शिशु रेफरल सेंटर और एसजीपीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में इलाज मार्च से
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राजधानी में और सुधरेगी चिकित्सा सुविधा।
- फोटो : ??? ?????
राजधानी में मार्च के पहले सप्ताह से चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर लौटने की उम्मीद है। लोहिया संस्थान के मातृ शिशु रेफरल सेंटर और एसजीपीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में इलाज उपलब्ध कराने की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
इन सेंटरों में कुछ बेड कोरोना के लिए आरक्षित करके अन्य सुविधाएं बहाल करने की कवायद शुरू कर दी गई है।
मगर केजीएमयू अभी तक लिंब सेंटर के भविष्य को लेकर रणनीति नहीं बना पाया है। कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद राजधानी में तीन डेडिकेटेड कोविड सेंटर बनाए गए थे।
इसके बाद एसजीपीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा, लोहिया संस्थान के शहीद पथ स्थित मातृ शिशु रेफरल सेंटर में मिलने वाली सुविधाएं बंद कर दी गईं।
इसी तरह केजीएमयू के लिंब सेंटर में चलने वाले पांच विभागों को स्थानांतरित कर दिया गया था। अब कोविड मरीजों की संख्या बेहद कम है। ऐसे में डेडिकेटेड कोविड सेंटर भी खाली हो गए हैं।
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एपेक्स ट्रॉमा : बहाल होगी पहले जैसी व्यवस्था
एपेक्स ट्रॉमा में करीब 50 बेड कोविड मरीजों के लिए आरक्षित कर दिए जाएंगे। मरीजों को अंदर ले जाने के लिए दक्षिणी हिस्से में बनाए गए इमरजेंसी द्वारा को खोला जाएगा। इनकी ओटी एवं वार्ड सहित अन्य सुविधाएं अलग कर दी गई हैं। मुख्य द्वार से सामान्य मरीजों को प्रवेश देने की तैयारी है। निदेशक प्रो. आरके धीमान ने बताया कि तैयारियां चल रही हैं। प्रयास है कि एक मार्च से एपेक्स ट्रॉमा सेंटर को पहले की तरह शुरू किया जाए।
मातृ एवं शिशु रेफरल सेंटर : बच्चों एवं महिलाओं को मिलेगा इलाज
लोहिया संस्थान के मातृ एवं शिशु रेफरल सेंटर को भी मार्च से चलाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए अस्पताल को दो हिस्से में बांटा जा रहा है। एक हिस्से में कोविड के मरीज रहेंगे। दूसरे दिस्से में सामान्य मरीजों को इलाज दिया जाएगा। लोहिया संस्थान के मीडिया प्रभारी डॉ. श्रीकेश सिंह ने बताया कि यहां के मेटनरल आईसीयू में 13 बेड रहेंगे। बच्चों के लिए 25 बेड का आईसीयू, सात बेड का एनआईसीयू तैयार किया गया है।
लिंब सेंटर : हरी झंडी का इंतजार
पांच विभागों को स्थानांतरित कर डेडिकेटेड कोविड सेंटर बनाए गए लिंब सेंटर में अब सिर्फ 23 मरीज बचे हैं। जबकि यहां करीब 500 मरीजों को रखने की व्यवस्था है। ऐसे में यहां से स्थानांतरित होने वाले विभाग फिर से लिंब सेंटर को अपना ठिकाना बनाना चाहते हैं। लेकिन अभी तक केजीएमयू प्रशासन की ओर से हरी झंडी नहीं दी गई है। यहां से जाने वाले विभागों की कब वापसी होगी, यह भी तय नहीं हो पाया है। मीडिया प्रभारी डॉ. सुधीर सिंह का कहना है कि शासन की ओर से मिले निर्देश के तहत ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। यहां से जाने वाले विभागों को शताब्दी में जगह दे दी गई है।
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इन सेंटरों में कुछ बेड कोरोना के लिए आरक्षित करके अन्य सुविधाएं बहाल करने की कवायद शुरू कर दी गई है।
मगर केजीएमयू अभी तक लिंब सेंटर के भविष्य को लेकर रणनीति नहीं बना पाया है। कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद राजधानी में तीन डेडिकेटेड कोविड सेंटर बनाए गए थे।
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इसके बाद एसजीपीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा, लोहिया संस्थान के शहीद पथ स्थित मातृ शिशु रेफरल सेंटर में मिलने वाली सुविधाएं बंद कर दी गईं।
इसी तरह केजीएमयू के लिंब सेंटर में चलने वाले पांच विभागों को स्थानांतरित कर दिया गया था। अब कोविड मरीजों की संख्या बेहद कम है। ऐसे में डेडिकेटेड कोविड सेंटर भी खाली हो गए हैं।
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एपेक्स ट्रॉमा : बहाल होगी पहले जैसी व्यवस्था
एपेक्स ट्रॉमा में करीब 50 बेड कोविड मरीजों के लिए आरक्षित कर दिए जाएंगे। मरीजों को अंदर ले जाने के लिए दक्षिणी हिस्से में बनाए गए इमरजेंसी द्वारा को खोला जाएगा। इनकी ओटी एवं वार्ड सहित अन्य सुविधाएं अलग कर दी गई हैं। मुख्य द्वार से सामान्य मरीजों को प्रवेश देने की तैयारी है। निदेशक प्रो. आरके धीमान ने बताया कि तैयारियां चल रही हैं। प्रयास है कि एक मार्च से एपेक्स ट्रॉमा सेंटर को पहले की तरह शुरू किया जाए।
मातृ एवं शिशु रेफरल सेंटर : बच्चों एवं महिलाओं को मिलेगा इलाज
लोहिया संस्थान के मातृ एवं शिशु रेफरल सेंटर को भी मार्च से चलाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए अस्पताल को दो हिस्से में बांटा जा रहा है। एक हिस्से में कोविड के मरीज रहेंगे। दूसरे दिस्से में सामान्य मरीजों को इलाज दिया जाएगा। लोहिया संस्थान के मीडिया प्रभारी डॉ. श्रीकेश सिंह ने बताया कि यहां के मेटनरल आईसीयू में 13 बेड रहेंगे। बच्चों के लिए 25 बेड का आईसीयू, सात बेड का एनआईसीयू तैयार किया गया है।
लिंब सेंटर : हरी झंडी का इंतजार
पांच विभागों को स्थानांतरित कर डेडिकेटेड कोविड सेंटर बनाए गए लिंब सेंटर में अब सिर्फ 23 मरीज बचे हैं। जबकि यहां करीब 500 मरीजों को रखने की व्यवस्था है। ऐसे में यहां से स्थानांतरित होने वाले विभाग फिर से लिंब सेंटर को अपना ठिकाना बनाना चाहते हैं। लेकिन अभी तक केजीएमयू प्रशासन की ओर से हरी झंडी नहीं दी गई है। यहां से जाने वाले विभागों की कब वापसी होगी, यह भी तय नहीं हो पाया है। मीडिया प्रभारी डॉ. सुधीर सिंह का कहना है कि शासन की ओर से मिले निर्देश के तहत ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। यहां से जाने वाले विभागों को शताब्दी में जगह दे दी गई है।