मंत्रियों व विधायकों के खर्चों में कटौती करेगी योगी सरकार, लिए कई अहम फैसले
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योगी सरकार ने कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए अपना खजाना पूरी तरह से खोल दिया है। योगी सरकार मंत्री और विधायकों के खर्च में कटौती करने के बाद सरकारी अफसरों की यात्राओं पर भी लगाम लगाएगी, जिससे कि खजाने को खाली होने से बचाया जा सके।
वैसे कई अधिकारियों ने महामारी से पहले गर्मी में विदेश यात्रा के लिए छुट्टियां मंजूर कराई थी। लेकिन लॉकडाउन के एलान के बाद अपनी यात्राएं स्थगित कर दी है। वहीं, सरकार ने यात्रा अनुमति रद्द कर दी है।
900 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होने का अनुमान
वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए हाल ही में कई अहम फैसले करने के बाद सरकार अब अधिकारियों-कर्मचारियों आदि की विभिन्न यात्राएं व प्रशिक्षण, सामान्य तबादले आदि पर रोक लगा सकती है।
रोक लगाए जाने की दशा में 900 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होने का अनुमान है। इतना ही नहीं, कोरोना के मद्देनजर स्थिति और बिगड़ने की दशा में वेतन वृद्धि भी स्थगित की जा सकती है।
खर्चों में कटौती संबंधी कई और फैसले भी ले सकती है सरकार
कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन से राज्य सरकार को फिलहाल दस हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने की संभावना दिखाई दे रही है।
चूंकि कोविड-19 से बचाव व राहत पर लगातार खर्च भी बढ़ता जा रहा है, इसलिए सरकार हाल ही में एक वर्ष के लिए विधायक निधि निलंबित करने के साथ ही मंत्रियों-विधायकों के वेतन से 30 फीसदी की कटौती, राज्यकर्मियों के डीए को डेढ़ वर्ष तक यथावत रखने सहित छह अन्य भत्ते स्थगित करने जैसे फैसले कर चुकी है।
इसलिए खर्चों में कटौती संबंधी कई और फैसले भी जल्द सरकार ले सकती है। चूंकि अब जो बैठकें होनी हैंं, वह ज्यादातर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही होनी हैं, इसलिए अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर सरकार अधिकारियों-कर्मचारियों की सरकारी यात्राओं पर रोक लगाकर 600 करोड़ रुपये से अधिक बचा सकती है।
बजट में यात्रा व्यय के लिए 672.28 करोड़ रुपये की व्यवस्था है। इसी तरह प्रशिक्षण आदि की यात्राओं पर अंकुश लगाकर 181.68 करोड़ रुपये बचाए जा सकते हैं।
अतिरिक्त वित्तीय संसाधन आवश्यक
सरकार जरूरी स्थानांतरणों को छोड़ तबादला सत्र भी शून्य कर 57 करोड़ रुपये बचाने की तैयारी में है। वैसे तो राज्य सरकार ने अभी कोई फैसला नहीं किया है, लेकिन कोरोना से स्थिति गंभीर होने पर अगर केंद्र ने पहल की तो पहली जुलाई से होने वाली तीन फीसदी की वेतन वृद्धि पर भी यहां रोक लगाई जा सकती है। इससे भी लगभग डेढ़ हजार करोड़ रुपये बचने का अनुमान है।
चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 के बजट में कार्यालय फर्नीचर व उपकरण आदि के लिए 130.32 करोड़ रुपये की व्यवस्था है। इसी तरह से नई गाड़ियों को खरीदने के लिए भी 8.44 करोड़ है। सूत्रों का कहना है कि सरकार फिलहाल इस तरह के खर्चों पर भी रोक लगाएगी।
यूपी के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि कोरोना वायरस की समस्या के कारण राजस्व में भारी कमी आई है, जबकि इसकी रोकथाम के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन आवश्यक हैं। वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए सरकार ने हाल ही में कुछ अहम फैसले लिए हैं। परिस्थितियों को देखते हुए अनावश्यक खर्चों पर अंकुश लगाने के साथ ही और भी जो कुछ करने की जरूरत होगी, उसे किया जाएगा।